Fathers Day Special on Gandhi ji: पिता और बच्चों के रिश्ते की व्याख्या शब्दों में कर पाना शायद संभव नहीं होगा। क्योंकि कुछ रिश्तों की गहराई बयां करने के लिए शब्द ही नहीं बने हैं। पिता आसमान है, पिता सारा जहान है। पिता वो छत है, जिसके बिना कोई बच्चा धूप में जलता है, बारिश में भींग जाता है और ठंड से ठिठुर जाता है। पिता वो पेड़ है जिसके न होने से बच्चे के सिर से साया उठ जाता है। पिता का दर्जा आकाश का होता है। महाभारत में युधिष्ठर ने यज्ञ के एक सवाल के जवाब में आकाश से ऊंचा 'पिता' को कहा है और यक्ष ने उसे सही माना भी है। लेकिन किसी व्यक्ति को देश का पिता (Father of Nation) यानी 'राष्ट्रपिता' कहा जाए, तो उसकी अहमियत और बलिदानों को समझना मुश्किल नहीं है।
महात्मा गांधी को कहा जाता है बापू और राष्ट्रपिता
भारत की स्वतंत्रता में महात्मा गांधी के बलिदान को कभी कोई भुला नहीं सकता है। मोहनदास करमचंद गांधी को भारतवासी महात्मा गांधी, राष्ट्रपिता और बापू कहकर पुकारते हैं। लेकिन क्या आप इसके पीछे की वजह जानते हैं, या फिर ये जानते हैं कि पहली बार मोहन दास करमचंद गांधी को महात्मा किसने कहा था, राष्ट्रपति की संज्ञा किसने दी थी? भारत के लोग बापू की आदर करते हैं और उनके प्रति सम्मान का बखान करने से कभी नहीं कतराते हैं।पहली बार किसने गांधी को कहा था राष्ट्रपिता?
क्या आपने कभी ये सोचा है कि गांधी जी को महात्मा गांधी या फिर राष्ट्रपिता और बापू कहकर क्यों पुकारा जाता है, उनके ये सारे नाम कैसे पड़े। बापू, राष्ट्रपिता और महात्मा पहली बार किसने और क्यों पुकारा? आपको इसके पीछे की कहानी बताते हैं। पहली मोहनदास करमचंद को ‘राष्ट्रपिता’ की उपाधि सुभाष चंद्र बोस ने दी थी।
राष्ट्रपिता की उपाधि से क्या है सिंगापुर का कनेक्शन?
वो तारीख इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गई जब नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने गांधी जी को पहली बार राष्ट्रपिता की उपाधि दी थी। वर्ष 1944 के जून माह का चौथा दिन यानी 4 जून, 1944... सिंगापुर रेडियो से एक संदेश प्रसारित करते हुए सुभाष चन्द्र बोस ने महात्मा गांधी को ‘देश का पिता’ (राष्ट्रपिता) कहकर संबोधित किया था। लोगों ने उन्हें राष्ट्रपिता कहकर पुकारना शुरू कर दिया। इसके बाद भारत सरकार ने भी इस नाम को मान्यता दे दी। 30 जनवरी 1948 को जब महात्मा गांधी का देहांत हो गया, उसके बाद भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने रेडियो के माध्यम से देश को संबोधित किया था और कहा था कि 'राष्ट्रपिता अब नहीं रहे'।
जब महात्मा गांधी को मिली 'बापू' की संज्ञा
महात्मा गांधी जब दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे तो उन्होंने देश की स्वतंत्रता के लिए कई आंदोलन चलाए। सूट-बूट पहनने वाले गांधी धीरे-धीरे सादा जीवन अपनाने लगे। उन्होंने अपना कोट और जूता सबकुछ त्याग दिया। धोती, शॉल और खड़ाऊ पहनकर महात्मा गांधी लोगों के बीच उठने बैठने लगे। अहिंसा का मार्ग अपनाया, एक धोती और लाठी के साथ पदयात्राएं की, जेल गए। लोगों और देश के प्रति गांधी के इस भाव को देखकर लोग उन्हें प्रेम से बापू (पितातुल्य) पुकारने लगे।
सबसे पहले गांधी को किसने कहा था महात्मा?
बताया जाता है कि वर्ष 1915 में वैद्य जीवन राम कालिदास ने मोहनदास करमचंद गांधी को महात्मा गांधी कहकर संबोधित किया था। हालांकि कई जगह इस बात का भी उल्लेख किया गया है कि पहली बार महात्मा शब्द की संज्ञा और उपाधि रवींद्रनाथ टैगोर ने दी थी। इतिहासकारों ने गांधी को महात्मा कहने का श्रेय टैगोर को दी है।
