Iran-US Talks: आखिरकार जिसका डर था वहीं हुआ। ईरान-अमेरिका की शांति वार्ता पहले दौर में ही दम तोड़ गई। शनिवार को करीब 15 घंटे तक वार्ता चली, देर रात तक दोनों पक्षों के लोग बातचीत में व्यस्त रहे लेकिन नतीजा सिफर रहा। अमेरिकी उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि पहले दौर की वार्ता नाकाम रही है और ईरान का रुख इसके लिए जिम्मेदार है। उन्होंने वापस अमेरिका लौटने की भी बात कही। आखिर कहां फंसा है पेंच, क्या-क्या थी ईरान और अमेरिका की शर्तें, और कहां हुआ टकराव, जानने की कोशिश करते हैं।
झुकने को तैयार नहीं ईरान-यूएस
ईरान ने क्या-क्या कहा?
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने कहा कि हमने कई मुद्दों पर सहमति बनाई, लेकिन 2-3 महत्वपूर्ण मुद्दों पर मतभेद थे, और अंततः वार्ता किसी समझौते तक नहीं पहुंच सकी। वार्ता का यह दौर एक साल में सबसे लंबा था और कुल 24 या 25 घंटे तक चला। कूटनीति कभी समाप्त नहीं होती। यह राष्ट्रीय हितों की रक्षा का एक साधन है। राजनयिकों को युद्ध और शांति दोनों समय में अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए।
ये वार्ता 40 दिनों के थोपे गए युद्ध के बाद अविश्वास और संदेह के माहौल में हुई; यह स्वाभाविक था कि हमने शुरू से ही एक बैठक में समझौते की उम्मीद नहीं की थी। किसी ने भी इसकी उम्मीद नहीं की थी। एक और महत्वपूर्ण बात मुद्दों और परिस्थितियों की जटिलता थी। होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे कुछ नए मुद्दे इन वार्ताओं में शामिल किए गए, और इनमें से प्रत्येक की अपनी जटिलता है। किसी भी स्थिति में राजनयिक तंत्र में हम सभी को ईरानी जनता के अधिकारों और हितों की रक्षा करनी चाहिए।
ईरान की 10 प्रमुख शर्तें
- कोई हमला ना किया जाए, अमेरिका आक्रमकता ना दिखाए
- होमुर्ज पर ईरान का नियंत्रण बना रहेगा
- ईरान को यूरेनियम संवर्धन करने का अधिकार
- ईरान पर लगे सभी प्रतिबंध हटाए अमेरिका
- यूएन ईरान के खिलाफ अपने प्रस्ताव वापस ले
- सभी द्वितीयक प्रतिबंधों से ईरान को मुक्त किया जाए
- अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के प्रस्ताव खारिज हों
- युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई हो
- अमेरिका अपने सभी सैनिक इस क्षेत्र से हटाए
- लेबनान और दूसरे मोर्चों पर तुरंत हमले रोके जाएं
जेडी वेंस ने क्या-क्या बताया?
अमेरिका के उपराष्ट्रपति जे डी वेंस ने बताया कि ईरान के साथ इस्लामाबाद में हुई वार्ता विफल रही और 21 घंटे से अधिक समय के अथक प्रयासों के बावजूद दोनों पक्ष मतभेदों की खाई पाटने में असमर्थ रहे। वेंस ने पाकिस्तान की मध्यस्थता में दोनों पक्षों के बीच हुई प्रत्यक्ष वार्ता के दौरान महत्वपूर्ण चर्चा के बाद संवाददाता सम्मेलन में यह जानकारी दी। दोनों पक्षों के बीच इस स्तर पर 1979 के बाद यह पहली वार्ता थी। वेंस ने कहा, हम 21 घंटे से इस पर काम कर रहे हैं और अच्छी खबर यह है कि हमारे बीच कई सार्थक चर्चाएं हुई हैं। उन्होंने कहा, बुरी खबर यह है कि हम किसी समझौते पर नहीं पहुंच सके।
अमेरिका के उपराष्ट्रपति ने कहा, हमने अपनी सीमाएं स्पष्ट कर दी हैं कि हम किन बातों पर समझौता करने को तैयार हैं और किन पर नहीं। उन्होंने कहा कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने हमारी शर्तों को स्वीकार न करने का विकल्प चुना है। जब उनसे यह बताने को कहा गया कि मुख्य अड़चनें क्या थीं और ईरानियों ने किन बातों को ठुकराया तो उन्होंने इस बारे में विस्तार से बताने से इनकार कर दिया। वेंस ने कहा, मैं अधिक विस्तार से नहीं बताऊंगा क्योंकि 21 घंटे तक बंद कमरे में बातचीत करने के बाद मैं सार्वजनिक रूप से बात नहीं करना चाहता लेकिन सीधी सी बात यह है कि हमें उनकी ओर से इस बात की स्पष्ट प्रतिबद्धता दिखनी चाहिए कि वे परमाणु हथियार हासिल करने की कोशिश नहीं करेंगे और न ही ऐसे साधन हासिल करने की कोशिश करेंगे, जिनसे वे बहुत जल्दी परमाणु हथियार हासिल कर सकें।
किन मुद्दों पर बिगड़ी बात?
अमेरिका की सबसे बड़ी मांग थी कि ईरान अपना परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह से छोड़ दे। इसके अलावा होर्मुज और लेबनान का मुद्दा भी अमेरिकी मांगों में सबसे ऊपर था। लेकिन ईरान का रुख भी बेहद सख्त रहा और वह फिलहाल इन मांगों पर हामी नहीं भर रहा है। जेडी वेंस ने कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का मुख्य लक्ष्य ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है और हमने इन वार्ताओं के जरिये यही हासिल करने की कोशिश की है।
अमेरिका की 3 प्रमुख मांगें
- ईरान का यूरेनियम संवर्धन और परमाणु कार्यक्रम बंद किया जाए
- होर्मुज जलडमरूमध्य में 28 फरवरी से पहले की तरह शिपिंग जारी रहे
- लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ इजरायल का सैन्य अभियान रहेगा जारी
किस बात पर अड़ा ईरान?
बहरहाल, साफ हो गया है कि ईरान ने अमेरिका की शर्तें मानने से इनकार कर दिया है। ईरान-अमेरिका वार्ता के बाद ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका को अत्यधिक मांगें और अनुचित अनुरोध नहीं करने चाहिए। वहीं, घाना में स्थित ईरान के दूतावास @IRAN_GHANA ने कहा कि अमेरिका ने अपनी उपराष्ट्रपति को दुनिया के दूसरे छोर पर इस्लामाबाद भेजा। वहां 21 घंटे तक बातचीत चली, जिसमें अमेरिका ने वे सभी मांगें रखीं, जिन्हें वह युद्ध के जरिए हासिल नहीं कर सका था। लेकिन ईरान ने इन मांगों को साफ तौर पर खारिज कर दिया। बातचीत खत्म हो गई है। जलडमरूमध्य अब भी बंद है और अमेरिकी उपराष्ट्रपति खाली हाथ वापस लौट रहे हैं। साफ है कि ईरान ने अमेरिका की ओर से परमाणु कार्यक्रम पर रोक और होर्मुज पर सुचारू आवाजाही की मांग को खारिज कर दिया है। अब सबसे बड़ा सवाल है कि क्या महायुद्ध फिर से शुरू होने जा रहा है।
