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US मिडटर्म चुनाव से पहले क्या भारत से तेल चाहते हैं ट्रंप, इसलिए हुआ रूबियो, UAE के डिप्टी PM का मुंबई दौरा?

मार्को रूबियो के भारत दौरे के समय संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के डिप्टी प्रधानमंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नहयान भी मुंबई पहुंचे। नहयान 19 और 20 अक्टूबर को भारत में थे। इस दौरान उनकी मुलाकात रूबियो से भी हुई। एक्सपर्ट मानते हैं कि यूएई का तेल और भारत की रिफाइनरी ट्रंप के डीजल संकट को दूर कर सकते हैं।

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अमेरिका में डीजल की कमी होने से महंगाई बढ़ी है। तस्वीर-AI
Written by: आलोक कुमार राव
Updated Oct 23, 2026, 14:06 IST
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Marco Rubio India visit: अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने हाल ही में भारत का दौरा किया है। अपनी इस यात्रा के दौरान उन्होंने भारत-अमेरिका ट्रेड डील सहित दोनों देशों के रिश्ते पर अच्छी-अच्छी बातें कहीं। अमेरिकी विदेश मंत्री का भारत दौरा उनके जामनगर जाने की वजह से ज्यादा सुर्खियों में रहा। जामनगर में रिलायंस की रिफाइनरी है। यह दुनिया की सबसे बड़ी ऑयल रिफाइनरी है। यहां से कच्चा तेल रिफाइन होकर दुनिया भर में जाता है। इस रिफाइनरी के पास खराब से खराब कच्चे तेल को रिफाइन करने की क्षमता है। रूबियो का यहां जाना और रिलायंस इंडस्ट्रीज के मालिक मुकेश अंबानी से मुलाकात करना, इस बात का संकेत है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चाहते हैं कि रिलायंस की रिफाइनरी से निकला तेल (डीजल) तेजी से अमेरिकी बाजारों तक पहुंचे। दरअसल, अमेरिका में बढ़ी हुई महंगाई का असर तीन नवंबर को होने जा रहे मिडटर्म चुनावों में हो सकता है। डीजल के दाम बढ़ने से अमेरिका में ट्रकर्स और किसान परेशान हैं। ये ट्रंप के परंपरागत वोटर हैं। चुनाव में इनकी नाराजगी ट्रंप को भारी पड़ सकती है। ऐसे में महंगाई पर नियंत्रण पाने के लिए ट्रंप बाजार में भारी मात्रा में डीजल की आपूर्ति सुनिश्चित करना चाहते हैं।

UAE के डिप्टी पीएम नहयान भारत पहुंचे

रूबियो के भारत दौरे के समय संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के डिप्टी प्रधानमंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नहयान भी मुंबई पहुंचे। नहयान 19 और 20 अक्टूबर को भारत में थे। इस दौरान उनकी मुलाकात रूबियो से भी हुई। एक्सपर्ट मानते हैं कि यूएई का तेल और भारत की रिफाइनरी ट्रंप के डीजल संकट को दूर कर सकते हैं। अमेरिका चाहता है कि यूएई का कच्चा तेल भारत आए और यहां जामनगर रिफाइनरी से होकर अमेरिका रवाना हो। दूसरा, ट्रंप यह भी चाहते हैं कि रिलायंस इंडस्ट्रीज वेनेजुएला में कच्चे तेल को भी रिफाइन करे। जानकार मानते हैं कि रूबियो का भारत दौरा बहुत हद तक तेल के लिए हुआ है।

ट्रंप पर भारी पड़ सकती है पेट्रोल-डीजल की महंगाई

अल जजीरा के मुताबिक ट्रंप की लोकप्रियता की रेटिंग महंगाई और ईंधन की कीमतों के कारण अपने सबसे निचले स्तर पर है। ऐसे में मुंबई में अमेरिका, भारत और UAE के बीच हुई ऊर्जा वार्ता को सिर्फ कूटनीतिक मुलाकात मानना ठीक नहीं होगा। बात यह है कि अमेरिका को भारत से कच्चा तेल नहीं, बल्कि रिफाइनिंग क्षमता और रिफाइंड ईंधन चाहिए। अमेरिका में गैसोलीन-डीजल की कीमतें बढ़ने की असली वजह रिफाइनिंग क्षमता की कमी बताई जा रही है।

Marco Rubio

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रिलायंस का सबसे बड़ा निर्यात डीजल है, जिसे लेकर ट्रंप खास तौर पर चिंतित हैं, क्योंकि अमेरिका में डीजल की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर हैं। NBC की रिपोर्ट के अनुसार ट्रंप प्रशासन को उम्मीद है कि समाधान का एक हिस्सा गुजरात के जामनगर जैसे भारतीय रिफाइनरी परिसर में है। ईरान युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य में रुकावट ने आपूर्ति और मुश्किल कर दी है।

UAE के डिप्टी पीएम का भारत दौरा क्यों हुआ?

UAE के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद 19-20 अक्टूबर को मुंबई में विदेश मंत्री एस जयशंकर के मेहमान रहे। एजेंडे में ऊर्जा, व्यापार, निवेश, फिनटेक, रक्षा और कनेक्टिविटी के साथ पश्चिम एशिया की स्थिति शामिल थी। आधिकारिक तौर पर यह द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा थी। लेकिन दौरे का सबसे अहम पल था 20 अक्टूबर की त्रिपक्षीय बैठक। इसमें जयशंकर, शेख अब्दुल्ला और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ऊर्जा सुरक्षा, कनेक्टिविटी और आर्थिक सहयोग पर चर्चा की। यह बैठक ऐसे समय हुई जब ईरान की नाकेबंदी से होर्मुज होकर जाने वाली वैश्विक आपूर्ति बाधित है। किसी आधिकारिक बयान में यह नहीं कहा गया कि दौरा ट्रंप के कहने पर हुआ, लेकिन समय और एजेंडे को देखते हुए ऊर्जा सुरक्षा इसके केंद्र में रही, यह साफ है।

क्या रिलायंस से वेनेजुएला का काम तेज करवाना चाहते हैं ट्रंप?

यहा एक स्पष्टीकरण जरूरी है। उपलब्ध रिपोर्टें वेनेजुएला में रिफाइनरी बनाने की बात नहीं करतीं। ब्लूमबर्ग के अनुसार अमेरिका रिलायंस को ज्यादा वेनेजुएलाई कच्चा तेल रिफाइन करने के लिए मनाना चाहता है। रुबियो ने कहा कि वे रिलायंस से वेनेजुएलाई क्रूड की ज्यादा रिफाइनिंग पर बात करेंगे। वजह यह है कि वेनेजुएला का तेल भारी और गाढ़ा होता है। अमेरिका में बहुत कम रिफाइनरियां इसे प्रोसेस कर सकती हैं, और वे पहले ही पूरी क्षमता से चल रही हैं। रिलायंस की इकाइयां ऐसे भारी ग्रेड के लिए जानी जाती हैं। फरवरी में IOC और HPCL ने भी वेनेजुएलाई क्रूड का कार्गो खरीदा था। साथ ही रिलायंस ने अमेरिका के टेक्सास में रिफाइनरी की योजना भी घोषित की है, और विश्लेषकों के मुताबिक टेक्सास मिडटर्म में अहम राज्यों में से एक है। यानी राजनीति और कारोबार दोनों की गणित यहां जुड़ती है।

UAE रोज कितना तेल निकालता है?

उत्पादन के ताजा आंकड़े युद्ध के कारण अनिश्चित हैं, इसलिए क्षमता को पैमाना मानना बेहतर है। IEA के अनुसार UAE की कच्चे तेल की क्षमता 2016 के 31 लाख बैरल से बढ़कर 2026 तक लगभग 44 लाख बैरल प्रतिदिन हो गई है, साथ में करीब 11 लाख बैरल कंडेनसेट और NGL क्षमता है। ADNOC खुद 48.5 लाख बैरल प्रतिदिन की क्षमता का दावा करती है। IEA का अनुमान है कि 2027 में UAE का कुल उत्पादन 52 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच सकता है।

Marco Rubio india visit

Marco Rubio india visit

रिफाइनिंग में UAE की ताकत रुवैस है। यह परिसर रोज 9.22 लाख बैरल से ज्यादा क्रूड और कंडेनसेट प्रोसेस कर सकता है और दुनिया की चौथी सबसे बड़ी सिंगल-साइट रिफाइनरी है। ADNOC की सभी सुविधाएं मिलाकर लगभग 10 लाख बैरल प्रतिदिन रिफाइन कर सकती हैं। ईरानी ड्रोन हमले के बाद इसे फिर पूरी क्षमता पर बहाल किया गया है।

भारत की रिफाइनिंग क्षमता कितनी है?

PPAC के आंकड़ों के अनुसार 1 अप्रैल 2026 को भारत की स्थापित रिफाइनिंग क्षमता 267.1 मिलियन टन प्रति वर्ष थी, यानी लगभग 56 लाख बैरल प्रतिदिन। यह चीन, अमेरिका और रूस के बाद दुनिया में चौथे स्थान पर है। पानीपत का विस्तार 15 से 25 MMTPA करने का लक्ष्य दिसंबर 2026 है। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी के अनुसार 2028 तक क्षमता करीब 309 मिलियन टन तक पहुंचेगी। UAE का दौरा और रुबियो का जामनगर जाना एक ही कहानी के दो हिस्से हैं: होर्मुज संकट के बीच अमेरिका को ऐसे साझेदार चाहिए जिनके पास तेल भी हो और रिफाइनिंग भी। भारत के पास रिफाइनिंग है और UAE के पास क्रूड व निर्यात बुनियादी ढांचा। हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि वेनेजुएला सौदे का अमेरिकी पेट्रोल कीमतों पर चुनाव से पहले असर नहीं दिखेगा। इसलिए यह चुनावी राहत से ज्यादा लंबी रणनीति है।

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