वोट के साथ 'लक्ष्मी' भी जाएगी? जानिए क्यों कटा हुआ नाम वापस जोड़ने के लिए Form-6 बन सकता है कानूनी मुसीबत

दिल्ली में SIR के तहत लाखों वोटरों के नाम मतदाता सूची से काट दिए गए हैं। इसका असर अब दिल्ली लक्ष्मी योजना और मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं पर भी पड़ रहा है। वहीं दूसरी ओर, चुनाव आयोग के फॉर्म-6 में किए गए बदलावों को लेकर आंतरिक विवाद गरमा गया है। आइए समझते हैं इसकी पेचीदगियों को।

राजधानी दिल्ली में मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) के बाद एक नया सामाजिक और कानूनी संकट खड़ा हो गया है। चुनाव आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद 31 अगस्त तक दिल्ली में लगभग 47.6 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची के ड्राफ्ट से हटा दिए गए हैं। हालांकि आयोग ने इन्हें अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या दोहरी एंट्री की श्रेणी में रखा है, लेकिन इस प्रक्रिया से लाखों आम नागरिकों के सामने केवल मताधिकार खोने का ही नहीं, बल्कि सरकारी योजनाओं के लाभ नहीं मिल पाने का खतरा भी मंडराने लगा है।

Delhi Electoral Roll Revision

वोटर कार्ड नहीं तो नहीं मिलेगा योजनाओं का लाभ (Newsroom Verified AI Image)

वोटर आईडी नहीं तो योजना का लाभ नहीं

दिल्ली सरकार की दो प्रमुख योजनाएं, दिल्ली लक्ष्मी योजना, जिसमें महिलाओं को 2,500 रुपये प्रति माह और मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना, जिसमें वरिष्ठ नागरिकों के लिए मुफ्त तीर्थ यात्रा मिलता है, दोनों में आवेदन के लिए 'दिल्ली का वैध वोटर आईडी कार्ड' अनिवार्य शर्त है। अगस्त में शुरू की गई दिल्ली लक्ष्मी योजना के तहत 21 से 60 वर्ष की महिलाओं को सहायता दी जाती है। यदि किसी महिला का नाम हालिया रिवीजन में कट गया है, तो वह इस योजना के तहत आवेदन करने के अयोग्य हो सकती है। चुनाव अधिकारियों के मुताबिक, जिन 47.6 लाख नामों को हटाया गया है, उनमें से लगभग आधी महिलाएं हैं। इसके अलावा, 33 लाख अन्य लोगों को पते और मैपिंग के बेमेल होने के कारण नोटिस भेजे गए हैं। हालांकि, आयुष्मान भारत, राशन कार्ड और सामाजिक कल्याण पेंशन जैसी योजनाएं इससे प्रभावित नहीं होंगी, क्योंकि उनमें निवास प्रमाण के लिए अन्य दस्तावेज भी मान्य हैं।

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