‘यहां भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 लागू है। पांच या इससे अधिक व्यक्तियों का समूह इस क्षेत्र में एकत्रित न हो...’ दिल्ली पुलिस की यह चेतावनी कहीं और नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजधानी के बीचों-बीच मौजूद लुटियंस दिल्ली की धड़कन, कनॉट प्लेस के आसपास चस्पा है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे कांग्रेस और सीजेपी। AI IMAGE
जहां हमेशा रौनक और कभी न खत्म होने वाली हलचल रहती है, वहां आज दिल्ली पुलिस और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) का पहरा है। पिछले कुछ दिनों से यह क्षेत्र सियासी रणभूमि बन चुका है। अशोक रोड और जंतर-मंतर रोड पर बैरिकेडिंग की दीवार खड़ी कर दी गई है। एक तरफ पिछले कुछ दिनों से कांग्रेस नेता राहुल गांधी की अगुवाई में विपक्षी दल कनॉट प्लेस से अपने विरोध प्रदर्शन का शंखनाद कर रहे हैं। वहीं, 10 अक्टूबर को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने अपने समर्थकों से जंतर-मंतर पर जुटने का आह्वान किया है।
चुनाव आयुक्त के खिलाफ आंदोलन कर रहे कांग्रेस कार्यकर्ताओं की फोटो। ANI
चाहे विपक्षी इंडी गठबंधन हो या सीजेपी, दोनों की लड़ाई का मुद्दा एक ही है। आरोप और मांग बिल्कुल साफ हैं। उनका आरोप है कि वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) और फॉर्म-6 में कथित गड़बड़ियों के जरिए वोट चोरी की गई है, जिससे देश का लोकतंत्र कमजोर हुआ है। इसलिए मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए। भले ही दोनों गुटों के आरोप और मांगें एक जैसी हों, लेकिन उनकी लड़ाई लड़ने का तरीका बिल्कुल अलग दिखाई दे रहा है।
कांग्रेस की मांगें क्या हैं?
राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे समेत कांग्रेस के नेताओं ने एसआईआर की प्रक्रिया और चुनाव आयोग की जवाबदेही पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस की प्रमुख मांगों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाना या उनका इस्तीफा, एसआईआर की प्रक्रिया को वापस लेना और इस प्रक्रिया के दौरान किए गए विवादित बदलावों की समीक्षा करना शामिल है।
इसके अलावा, कांग्रेस इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) के बजाय बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग भी उठा रही है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने तो यहां तक दावा किया है कि हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव और अन्य चुनाव अवैध थे। उन्होंने इन चुनावों को बैलेट पेपर के जरिए दोबारा कराने की मांग की है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर डटी कांग्रेस पार्टी। ANI
कांग्रेस के लिए यह आंदोलन चुनाव आयोग की भूमिका, चुनावी निष्पक्षता और लोकतांत्रिक संस्थाओं की जवाबदेही से जुड़ा है। गौरतलब है कि पार्टी के पास सांसदों, कार्यकर्ताओं और राज्य स्तर के संगठनों का नेटवर्क है, जिसके जरिए वह विरोध को एक व्यापक राजनीतिक अभियान का रूप दे सकती है।
कॉकरोच जनता पार्टी की मांगें कितनी अलग हैं?
सीजेपी की पहचान पहले बेरोजगारी, प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ आंदोलनों से बनी। CJP के समर्थकों में बड़ी संख्या ऐसे युवाओं की है, खासकर जेन जी की, जिनका किसी राजनीतिक दल से प्रत्यक्ष जुड़ाव जरूरी नहीं है। पेपर लीक के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के बाद अब अभिजीत दीपके की अगुवाई में संगठन मतदाता अधिकारों और चुनाव आयोग की जवाबदेही को प्रमुख मुद्दा बना रहा है। सीजेपी ने एसआईआर वापस लेने, 2025 की मतदाता सूची बहाल करने और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ जांच की मांग भी उठाई है।
बता दें कि सीजेपी की मांगें केवल ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक सीमित नहीं हैं। संगठन ने एसआईआर वापस लेने, 2025 की मतदाता सूची के आधार पर चुनाव कराने और नए चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए स्वतंत्र चयन व्यवस्था बनाने की मांग भी उठाई है।
बेंगलुरु में CJP के प्रदर्शन में शामिल हुए ध्रुव राठी, प्रकाश राज।
सीजेपी की रणनीति में सोशल मीडिया के जरिए लोगों को जोड़ना, युवा कार्यकर्ताओं को प्रदर्शन के लिए लामबंद करना और अलग-अलग विचारधाराओं वाले नागरिकों को एक मंच पर लाने की कोशिश शामिल है। इसीलिए इसके आंदोलन को केवल कांग्रेस के प्रदर्शन की दूसरी शक्ल कहना अधूरा होगा।
क्या कांग्रेस और सीजेपी के बीच नेतृत्व की लड़ाई भी है?
दरअसल, कांग्रेस के पास राष्ट्रीय स्तर का राजनीतिक नेटवर्क है, जबकि CJP ने सोशल मीडिया और युवाओं की लामबंदी के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई है। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) जैसे छात्र संगठन भी अपने जमीनी नेटवर्क के जरिए आंदोलन को आगे बढ़ा रहे हैं।
सोशल मीडिया, सबसे बड़ा अंतर
कांग्रेस और सीजेपी के प्रदर्शन में सबसे बड़ा अंतर सोशल मीडिया पर नजर आने वाले चेहरों और आंदोलन को लोगों तक पहुंचाने के तरीके का है। कांग्रेस के प्रदर्शन में राहुल गांधी समेत विपक्षी नेताओं, सांसदों और पार्टी संगठन की भूमिका प्रमुख रही। प्रदर्शन की तस्वीरें, नेताओं के भाषण, पुलिस के साथ टकराव और पार्टी के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल इसके प्रचार के अहम माध्यम बने। यानी यहां आंदोलन का मुख्य चेहरा राजनीतिक नेतृत्व रहा।
जंतर-मंतर में विरोध प्रदर्शन कर रहे युवाओं की फोटो।
इसके उलट, सीजेपी के प्रदर्शन में संगठनात्मक चेहरों के साथ सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और यूट्यूबर्स की मौजूदगी खास चर्चा में रही। 8 अक्टूबर को बेंगलुरु में हुए प्रदर्शन में सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके के साथ यूट्यूबर ध्रुव राठी और अभिनेता प्रकाश राज भी शामिल हुए। ध्रुव राठी जैसे डिजिटल क्रिएटर की मौजूदगी से इस मुद्दे को उनके ऑनलाइन दर्शकों तक पहुंचने का अतिरिक्त अवसर मिला।
इस तरह सीजेपी के प्रदर्शन में आंदोलन के मुद्दे के साथ चर्चित डिजिटल चेहरों की भागीदारी भी आकर्षण का केंद्र बनी। मोटे तौर पर समझें तो इंडी गठबंधन और कॉकरोच जनता पार्टी, दोनों की मांगें एक जैसी लगती हैं, लेकिन दोनों अलग-अलग मोर्चों पर अपनी लड़ाई लड़ रहे हैं।
