चीन में राजनीतिक हलचल, जानिए क्या खास हुआ चीन के दो सत्रों में?

एनपीसी को चीन की सर्वोच्च सत्ताधारी संस्था कहा जाता है। जिसके पास राष्ट्रीय नेताओं को चुनने और सरकारी बजट और राष्ट्रीय विकास योजनाओं को मंजूरी देने आदि का अधिकार होता है।

आजकल चीन में महत्वपूर्ण दो सत्रों का आयोजन हो रहा है। जिसे साल का सबसे बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम कहा जाता है। एक ऐसा घटनाक्रम जिसमें चीनी राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री के साथ-साथ देश के बड़े-बड़े नेता और विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधि हिस्सा लेते हैं। इन सत्रों के दौरान विभिन्न नीतियां बनती हैं, निर्णय लिए जाते हैं और अहम मुद्दों पर व्यापक विचार-विमर्श किया जाता है। वहीं पिछले साल लागू की गयी योजनाओं की समीक्षा होती है। NPC और CPPCC के नाम से चर्चित इन सत्रों पर पूरी दुनिया की नजर रहती है। बड़ी संख्या में चीनी व विदेशी पत्रकार इस इवेंट को कवर करने पहुंचते हैं। ये सत्र आमतौर पर मार्च महीने की शुरुआत में होते हैं, और करीब एक सप्ताह तक चलते हैं।

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आर्थिक स्थिरता और आधुनिक तकनीक पर है जोर

जैसा कि हम जानते हैं कि चीन विश्व की दूसरी सबसे बड़ी आर्थिक ताकत है। चीन में होने वाली हलचल का पड़ोसी देशों और विश्व पर व्यापक असर दिखता है। ऐसे में चीन की राजधानी बीजिंग में राष्ट्रीय जन प्रतिनिधि सभा(NPC) और चीनी जन राजनीतिक सलाहकार सम्मेलन(CPPCC) का आयोजन चर्चा के केंद्र में रहता है। इस बार आर्थिक नीतियों पर काफी ध्यान दिया गया है। चीनी प्रधानमंत्री ली छ्यांग ने एनपीसी के समक्ष जो रिपोर्ट पेश की, उसमें इस वर्ष के लिए जीडीपी का लक्ष्य 5 फीसदी निर्धारित किया गया है। जानकार मानते हैं कि यह एक ऐसा लक्ष्य है, जो कि हासिल किया जा सकता है। यह वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक अच्छा संकेत है। इसके साथ ही अपने नागरिकों को रोजगार के अधिक मौके प्रदान करने पर प्रतिनिधियों ने जोर दिया है। कहा गया है कि बेरोजगारी दर 5 प्रतिशत पर स्थिर है। वहीं उभरते उद्योगों को प्रोत्साहन देने पर फोकस रहा है। चीन बार-बार उच्च गुणवत्ता वाली स्थिर इकोनॉमी की बात करता है, इन सत्रों में भी चीन ने इसे दोहराया है। जिसमें देश के भीतर चक्रीय अर्थव्यवस्था के संचालन की बात की जाती है।

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