Ram Temple Donation Row: राम मंदिर चढ़ावा/दान चोरी मामले में विशेष जांच दल (SIT) तेजी के साथ अपनी जांच को आगे बढ़ा रहा है। मामले में गिरफ्तार आठ आरोपी पुलिस हिरासत में हैं और इनसे पूछताछ की जा रही है। इस जांच के बारे में जानकारी रखने वाले सूत्रों का कहना है कि आरोपियों के बैंक खातों की जांच के बाद पता चला है कि इनका बैंक ट्रैंजेक्शन इनकी कमाई से ज्यादा है और सरकार इनकी जब्त संपत्तियों से चोरी हुई रकम की भरपाई करने की तैयारी में है। इस बीच, छह जुलाई को श्री राम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास की बैठक होनी है। इस बैठक में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे को स्वीकार करने के लिए वोटिंग कराई जा सकती है।
बता दें कि चंपत राय और अनिल मिश्रा ने अपने पद से इस्तीफा दिया है लेकिन ट्रस्ट ने इनके इस्तीफे को स्वीकार नहीं किया है। अयोध्या विकास प्राधिकरण ने लवकुश की पत्नी सुप्रिया मिश्रा के नाम पर बन रही संपत्ति पर सख्त कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। इस बीच, चढ़ावा चोरी मामले में फैजाबाद बार एसोसिएशन के सदस्यों ने गुरुवार को प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए पुलिस में शिकायत दी। जानकारी के मुताबिक राम मंदिर का दान चोरी करने के लिए आरोपियों ने नायाब तरीका चुना था। ये निगरानी कैमरों और सुरक्षाकर्मियों को चकमा देने के लिए कथि गबन का एक अलग तरीका ढूंढ निकाला था।
परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों के बारे में जानकारी थी
रिपोर्टों के मुताबिक अविनाश शुक्ला ने पूछताछ में एसआईटी को बताया है कि उन सबको मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों के बारे में जानकारी थी, जिससे वे पकड़े जाने से बच जाते थे। शुक्ला ने जांचकर्ताओं को बताया कि दान की गिनती के दौरान एक व्यक्ति कथित तौर पर कैश निकाल लेता था जबकि बाकी लोग CCTV कैमरों की नजर से बचने के लिए उसे घेरे रहते थे। आरोप है कि पैसे को पहले वॉशरूम में छिपाया गया और बाद में मौका मिलने पर उसे परिसर से बाहर निकाल लिया गया। शुक्ला ने दावा किया कि अनिल मिश्रा ने दान की गिनती की प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाई थी और ट्रस्ट के अधिकारियों से करीबी संबंध होने के कारण आरोपियों की ज़्यादा जांच-पड़ताल नहीं हुई।
टिन्नू यादव के पास गिनती वाले कमरे की एक चाबी थी
जांच करने वाले अधिकारी मंदिर के दान की गिनती वाले कमरे तक पहुंचने के रास्ते की भी जांच कर रहे हैं। मीडिया में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि आरोपी रामाशंकर उर्फ टिन्नू यादव के पास कथित तौर पर गिनती वाले कमरे की एक चाबी थी जबकि दूसरी चाबी गिनती की प्रक्रिया में शामिल बैंक कर्मचारियों के पास थी। नकद दान की गिनती का काम SBI के अधिकार में है, जिसने इस काम के लिए एक प्राइवेट एजेंसी को लगाया है। नकद दान चार दान-पेटियों में जमा किया जाता है और 14 लोगों की एक टीम इसकी गिनती करती है, जिसमें 11 बैंक कर्मचारी और तीन मंदिर ट्रस्ट के सदस्य शामिल होते हैं। SIT इस बात की जांच कर रही है कि क्या कोई मिलीभगत थी, जिसकी वजह से दान की रकम का कथित तौर पर गबन किया जा सका।
संपत्तियों का ब्योरा जुटाकर हो रहा कीमत का आकलन
सूत्रों का कहना है कि चोरी के धन से इकट्ठा की गई आरोपियों के संपत्ति से चढ़ावा चोरी की रकम वसूली जाएगी। यही नहीं राम जांच में हैसियत से कई गुना ट्रांजैक्शन आरोपियों के बैंक खातों में मिला है। साल भर में सभी आरोपियों के खातों की डिटेल में हैसियत से ज्यादा रकम के ट्रांजैक्शन के सबूत मिले हैं। एसआईटी और पुलिस ने इसको सबूत के तौर पर जांच में शामिल किया है। सभी के मकान, प्लॉट और हॉस्टल समेत कई संपत्तियों का ब्योरा जुटाकर उसकी कीमत का आकलन किया जा रहा है। वहीं, पुलिस अनिल और गोपाल को भी नोटिस जारी कर चुकी है। बैंकों से आरोपियों के बैंक खातों का विवरण मांगा था। इसमें आरोपियों के कई परिवार वालों के खाते भी शामिल हैं। एक-एक आरोपी और उनके परिवार वालो के खातों में जितनी रकम का ट्रांजैक्शन हुआ है वो इनकी कमाई से बहुत ज्यादा है। इनके खातों से लाखों की रकम का ट्रांजैक्शन हुआ है। ये सबूत ये साबित करने के लिए काफी हैं कि आरोपियों ने जो रकम चढ़ावे की पार की और उसे इधर-उधर खपाई।
रडार पर लवकुश की पत्नी के नाम की संपत्ति
अयोध्या विकास प्राधिकरण ने लवकुश की पत्नी सुप्रिया मिश्रा के नाम पर बन रही संपत्ति पर सख्त कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। प्राधिकरण ने मकान निर्माण को लेकर सुप्रिया को नोटिस जारी कर सकता है। पुलिस की जांच में सामने आया है कि लवकुश मिश्रा ने राम मंदिर में नौकरी के दौरान ही सोहावल तहसील के मंगसी परगना इलाके में अपनी पत्नी के नाम पर जमीन खरीदी थी। 16 अक्टूबर 2025 को हुई इस रजिस्ट्री में जमीन की कीमत मात्र 8.8 लाख रुपये बताई गई, जबकि बाजार मूल्य करीब 25 लाख रुपये आंका जा रहा है। प्राधिकरण अधिकारियों ने जब निर्माण स्थल का निरीक्षण किया तो पाया कि बिना मंजूर नक्शे के और नियमों की अनदेखी करते हुए निर्माण कार्य चल रहा था। नोटिस में पूछा जायेगा कि क्या निर्माण के लिए कोई नक्शा पास कराया गया था। प्राधिकरण की ओर से कागजात जमा करने की समयसीमा दी जाएगी। एक हफ्ते में संतोषजनक जवाब न मिलने पर आगे की कार्यवाही की जाएगी।
राम मंदिर में हुए निर्माण कार्यों की भी जांच होगी
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में SIT सभी पहलुओं को खंगाल रहीहै। उसने मंदिर के व्यवस्थापक गोपाल राव सहित 10 लोगों से पूछताछ की है। पुलिस ने आरोपी लवकुश के पिता बच्चूलाल मिश्र को हिरासत में लिया है। उसने आरोपियों लवकुश, अनुकल्प और करुणेश के मिल्कीपुर, खंडासा और रुदौली स्थित पैतृक गांवों में छापेमारी की। बताया जा रहा है कि SIT अब ट्रस्ट के पांच साल के ऑडिट का ऑडिट करेगी। शुरुआती जांच में बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ियों की आशंका को देखते हुए हर वित्तीय लेनदेन की बारीकी से तफ्तीश की जाएगी। जांच के दौरान एसआईटी को कुछ अहम साक्ष्य भी मिले हैं। सूत्रों का कहना है कि जांच की जद में ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारी भी आ सकते हैं। यही नहीं बीते समय में राम मंदिर में हुए निर्माण कार्यों की भी जांच होगी। एसआईटी अब 15 जुलाई को रिपोर्ट शासन को सौंपेगी। एसआईटी ने प्रारंभिक जांच में आपराधिक पहलू की जांच की है और इसी आधार पर प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।
23 जून को एसआईटी ने दी प्रारंभिक रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश सरकार ने अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट के दान और वित्तीय प्रबंधन से संबंधित आरोपों की जांच कर रहे तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का कार्यकाल 15 दिन बढ़ा दिया। प्रदेश सरकार ने आरोपों की जांच के लिए 13 जून को एसआईटी का गठन किया था और शुरुआत में उसे 15 दिन का समय दिया था। 23 जून को एसआईटी द्वारा प्रारंभिक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के बाद 25 जून को मामले में एक प्राथमिकी दर्ज की गई और आठ आरोपियों अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और रमाशंकर यादव उर्फ टीनू यादव को गिरफ्तार किया गया। एसआईटी में लखनऊ के मंडलायुक्त आईएएस विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल है।
रिपोर्ट में कठोर कार्रवाई की सलाह
एसआईटी का गठन करने वाले आदित्यनाथ पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि एसआईटी इस प्रकरण में हर पहलू की गहनता और निष्पक्षता से जांच करते हुए सच्चाई सामने लाएगी। गत 23 जून को एसआईटी के प्रमुख सदस्य लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत ने प्रारंभिक रिपोर्ट गृह विभाग को सौंपा थी, जिसमें कठोर कार्रवाई की सलाह दी गई थी। इन संस्तुतियों के आधार पर 25 जून को ट्रस्ट के सदस्य कृष्णमोहन की लिखित शिकायत पर श्रीराम जन्मभूमि थाने में पहली प्राथमिकी दर्ज की गई थी, जिसमें आठ नामजद व अन्य अज्ञात व्यक्तियों को अभियुक्त बनाया गया था। सभी नामजद अभियुक्त गिरफ्तार किए जा चुके हैं।