सांप भी मर गया और लाठी भी नहीं टूटी... भाजपा ने उत्तर प्रदेश की कैसरगंज लोकसभा सीट पर ऐसा दांव खेला, जिस पर ये कहावत बिल्कुल सटीक बैठती नजर आ रही है। भले ही बृजभूषण शरण सिंह का पत्ता कट गया हो, लेकिन भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें नाराज नहीं किया। आसान भाषा में समझा जाए तो कैसरगंज सीट से भाजपा सांसद बृजभूषण का टिकट काट दिया गया है, लेकिन पार्टी ने उनके बेटे को टिकट देकर मास्टरस्ट्रोक खेल दिया है। बीते लंबे समय से भाजपा सांसद बृजभूषण विवादों से घिरे हुए हैं, अदालत में उनके खिलाफ यौन उत्पीड़न का मामला चल रहा है। आखिर इस मामले में कब-क्या हुआ, आपको पूरी टाइमलाइन से रूबरू करवाते हैं।
जानें इस पूरे केस में कब-क्या हुआ।
कैसे शुरू हुआ था बृजभूषण से जुड़ा विवाद?
पिछले साल 2023 के जनवरी माह में तत्कालीन भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह पर महिला पहलवानों ने यौन शोषण का आरोप लगाया था। इसके बाद दिल्ली के जंतर-मंतर पर पहलवानों ने विरोध प्रदर्शन शुरू किया, जिसके बाद ये मामला सुर्खियों में आया। साक्षी मलिक, विनेश फोगाट और बजरंग पूनिया जैसे नामचीन पहलवानों ने उनके खिलाफ आवाद बुलंद की थी। पहलवानों के विरोध प्रदर्शन के बाद बृजभूषण ने इस्तीफा दिया और फिर उनके दोबारा चुनाव हुए तो उनके करीबी संजय सिंह WFI अध्यक्ष चुने गए। बाद में खेल मंत्रालय ने डब्ल्यूएफआई पैनल को निलंबन कर दिया। नीचे पढ़ें सारा विवाद।
कब-क्या हुआ, जानिए पूरा टाइमलाइन
| तारीख | घटनाक्रम |
| 18 जनवरी, 2023 | जंतर मंतर पर पहलवानों का विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ |
| 18 जनवरी | बृजभूषण शरण सिंह पर यौन शोषण और धमकी का आरोप लगा |
| 18 जनवरी | पहलवानों ने उनके इस्तीफे और WFI को भंग करने की मांग की |
| 19 जनवरी | बबीता फोगाट ने पहलवानों से मुलाकात की और सरकार से बात करने का भरोसा दिया |
| 20 जनवरी | भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) अध्यक्ष पीटी ऊषा को पहलवानों ने शिकायत पत्र लिखा |
| 20 जनवरी | डब्ल्यूएफआई को पहलवानों की सलाह से चलाने के लिए नई समिति की नियुक्ति की मांग की |
| 20 जनवरी | आरोपों की जांच के लिए जांच समिति के गठन करने की मांग की गई |
| 20 जनवरी | IOA ने जांच के लिए सात सदस्यीय समिति गठित की, जिसमें मैरीकॉम और योगेश्वर दत्त थे |
| 21 जनवरी | पहलवानों ने खेल मंत्री अनुराग ठाकुर से मुलाकात के बाद विरोध प्रदर्शन समाप्त किया |
| 21 जनवरी | खेल मंत्री ने कहा कि आरोपों की जांच के लिए एक निगरानी समिति बनायी जायेगी |
| 21 जनवरी | अनुराग ठाकुर ने कहा कि जांच पूरी होने तक बृजभूषण पद से हट जाएंगे |
| 21 जनवरी | डब्ल्यूएफआई ने महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न के आरोपों से किया इनकार |
| 21 जनवरी | खेल मंत्रालय ने WFI से सभी गतिविधियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने को कहा |
| 21 जनवरी | डब्ल्यूएफआई के सहायक सचिव विनोद तोमर निलंबित किए गए |
| 23 जनवरी | मैरीकॉम की अगुआई में पांच सदस्यीय निगरानी समिति का गठन किया गया |
| 23 जनवरी | निगरानी समिति को जांच पूरी करने के लिए चार हफ्ते का समय दिया गया |
| 24 जनवरी | पहलवानों ने निराशा व्यक्त की कि सरकार ने समिति के सदस्यों के लिए उनसे सलाह नहीं ली |
| 23 फरवरी | निगरानी समिति का कार्यकाल दो हफ्ते बढ़ाया गया |
| 16 अप्रैल | समिति की रिपोर्ट खेल मंत्रालय को सौंपे जाने के बाद WFI ने सात मई को चुनाव की घोषणा की |
| 23 अप्रैल | पहलवानों ने जंतर-मंतर पर अपना विरोध प्रदर्शन फिर से शुरू किया |
| 23 अप्रैल | एक नाबालिग समेत सात महिला पहलवानों ने बृजभूषण के खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई |
| 23 अप्रैल | पहलवानों ने दावा किया कि पुलिस ने अभी तक प्राथमिकी दर्ज नहीं की है |
| 24 अप्रैल | खेल मंत्रालय ने सात मई के चुनाव रोक दिए |
| 25 अप्रैल | बृजभूषण के खिलाफ पहलवानों ने प्राथमिकी दर्ज करने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया |
| 25 अप्रैल | सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया |
| 27 अप्रैल | आईओए की ओर से तीन सदस्यीय पैनल का गठन |
| 27 अप्रैल | पीटी ऊषा ने कहा कि सड़कों पर उतरने के बजाय आईओए से संपर्क करना चाहिए था |
| 3 मई | दिल्ली पुलिस और पहलवानों के बीच झड़प हुई, जिसमें कुछ प्रदर्शनकारियों के सिर में चोटें आईं |
| 3 मई | प्रदर्शनकारियों ने नशे में धुत्त अधिकारियों पर मारपीट और महिला पहलवानों के साथ दुर्व्यवहार का आरोप लगाया |
| 5 मई | बृजभूषण के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराने वाली पहलवानों के बयान दर्ज किए |
| 10 मई | पहलवानों ने बृजभूषण शरण सिंह को नार्को टेस्ट कराने की चुनौती दी |
| 11 मई | पुलिस ने बृजभूषण शरण सिंह का बयान दर्ज किया |
| 28 मई | विनेश फोगाट, साक्षी मलिक और बजरंग पूनिया सहित प्रदर्शन कर रहे पहलवानों पर मामला दर्ज किया गया |
| 28 मई | वे नई संसद की ओर बढ़ने का प्रयास कर रहे थे, जब पीएम नरेंद्र मोदी इसका उद्घाटन करने जा रहे थे |
| 30 मई | अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति और यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग ने पुलिस के व्यवहार और हिरासत की निंदा की |
| 30 मई | पहलवान अपना पदक बहाने हरिद्वार पहुंचे |
| 8 जून | नाबालिग पहलवान के पिता ने बताया कि उन्होंने जानबूझकर यौन उत्पीड़न की झूठी पुलिस शिकायत दर्ज कराई |
| 7 जून | अनुराग ठाकुर ने आश्वासन दिया कि बृजभूषण के खिलाफ पुलिस जांच पूरी हो जाएगी, जिसके बाद विरोध रुका |
| 12 जून | जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश महेश मित्तल कुमार को निर्वाचन अधिकारी नियुक्त किया |
| 13 जून | डब्ल्यूएफआई का चुनाव छह जुलाई, 2023 को तय हुआ |
| 15 जून | दिल्ली पुलिस ने अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया |
| 25 जून | असम कुश्ती संघ की याचिका पर गोवाहाटी हाई कोर्ट ने 11 जुलाई को होने वाले WFI चुनावों पर रोक लगाई |
| 18 जुलाई | दिल्ली की अदालत ने बृजभूषण सिंह को अंतरिम जमानत दी |
| 18 जुलाई | बजरंग और विनेश को एशियाई खेलों में सीधे प्रवेश मिला |
| 19 जुलाई | बजरंग और विनेश को ट्रायल में अनुचित छूट के विरोध में युवा पहलवानों ने हिसार की सड़कों पर प्रदर्शन किया |
| 19 जुलाई | डब्ल्यूएफआई चुनाव सात अगस्त को तय हुए |
| 20 जुलाई | कई जूनियर पहलवान आईओए मुख्यालय पहुंच विनेश,बजरंग को दी गई छूट वापस लेने की मांग की |
| 20 जुलाई | डब्ल्यूएफआई चुनाव 12 अगस्त को पुनर्निर्धारित |
| 11 अगस्त | पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने 12 अगस्त को होने वाले डब्ल्यूएफआई चुनावों पर रोक लगा दी |
| 23 अगस्त | समय पर चुनाव नहीं कराने के लिए डब्ल्यूएफआई को निलंबित कर दिया गया |
| 5 दिसंबर | डब्ल्यूएफआई के चुनाव 21 दिसंबर को निर्धारित हुए |
| 21 दिसंबर | बृजभूषण के खास संजय सिंह को डब्ल्यूएफआई का नया प्रमुख चुना गया |
| 21 दिसंबर | उनके पैनल ने ज्यादातर पदों पर आसानी से जीत हासिल की |
| 21 दिसंबर | बजरंग और साक्षी ने प्रेस कांफ्रेंस की। साक्षी ने चुनाव के विरोध में कुश्ती से संन्यास ले लिया |
| 22 दिसंबर | संजय सिंह के चुनाव के विरोध में बजरंग ने पद्मश्री पुरस्कार लौटाया |
| 24 दिसंबर | खेल मंत्रालय ने डब्ल्यूएफआई को अगले आदेश तक निलंबित कर दिया |
| 24 दिसंबर | नवनिर्वाचित संस्था ने उचित प्रकिया का पालन नहीं किया |
| 24 दिसंबर | हलवानों को तैयारी के लिए पर्याप्त समय दिए बिना आयोजन की ‘जल्दबाजी में घोषणा’ की |
| 02 मई, 2024 | बृजभूषण शरण सिंह का टिकट कटा और उसके बेटे को भाजपा ने कैसरगंज से प्रत्याशी बनाया |
कट गया बृजभूषण शरण सिंह का टिकट
उत्तर प्रदेश के कैसरगंज लोकसभा सीट के लिए भारतीय जनता पार्टी ने अपने उम्मीदवार के नाम पर मुहर लगा दी है। इस बार भाजपा ने बृजभूषण शरण सिंह को टिकट नहीं देने का फैसला किया है। हालांकि भाजपा ने उनके बेटे करण भूषण सिंह को अपना उम्मीदवार बनाया है। आपको इस बार इस लोकसभा सीट का समीकरण समझाते हैं और यहां के चुनावी इतिहास से रूबरू कराते हैं।
क्या कहता है कैसरगंज सीट का इतिहास?
कैसरगंज लोकसभा सीट पर अब तक कांग्रेस पार्टी को मजह तीन बार जीत नसीब हो सकी है। जबकि भाजपा ने चार बार इस सीट पर जीत का परचम फहाराया है। यहां से सबसे अधिक 5 बार समाजवादी पार्टी ने जीत हासिल किया है, जबकि सबसे अधिक 4 बार सांसद भी सपा के बेनी प्रसाद वर्मा ही रहे। कैसरगंज सीट से हिंदू महासभा की शकुंतला नायर पहली सांसद चुनी गई थीं। उन्होंने इसके बाद 1967 और 71 में भारतीय जनसंघ के टिकट से जीत हासिल की थी। 1977 में जनता पार्टी के रूद्र सेन चौधरी ने जीत हासिल की। हालांकि कांग्रेस के राणा वीर सिंह ने 1980 और 84 के चुनाव में जीत का डंका बजाया। 1989 के चुनाव में भाजपा के टिकट से रूद्र सेन चौधरी फिर से सांसद चुने गए। फिर 1991 में भाजपा के लक्ष्मीनारायण मणि त्रिपाठी और फिर इस सीट पर लगातार 5 बार सपा का डंका बजा।
कैसरगंज सीट से कब कौन बना सांसद?
| वर्ष | नाम | पार्टी |
| 1952 | शकुंतला नायर | हिंदू महासभा |
| 1957 | भगवानदीन मिश्र | कांग्रेस |
| 1962 | बसंत कुंवरि | स्वतंत्र पार्टी |
| 1967 | शकुंतला नायर | भारतीय जनसंघ |
| 1971 | शकुंतला नायर | भारतीय जनसंघ |
| 1977 | रूद्र सेन चौधरी | जनता पार्टी |
| 1980 | राणा वीर सिंह | कांग्रेस |
| 1984 | राणा वीर सिंह | कांग्रेस |
| 1989 | रूद्र सेन चौधरी | भारतीय जनता पार्टी |
| 1991 | लक्ष्मीनारायण मणि त्रिपाठी | भारतीय जनता पार्टी |
| 1996 | बेनी प्रसाद वर्मा | समाजवादी पार्टी |
| 1998 | बेनी प्रसाद वर्मा | समाजवादी पार्टी |
| 1999 | बेनी प्रसाद वर्मा | समाजवादी पार्टी |
| 2004 | बेनी प्रसाद वर्मा | समाजवादी पार्टी |
| 2009 | बृजभूषण शरण सिंह | समाजवादी पार्टी |
| 2014 | बृजभूषण शरण सिंह | भारतीय जनता पार्टी |
| 2019 | बृजभूषण शरण सिंह | भारतीय जनता पार्टी |
कभी भाजपा, कभी सपा अब फिर भाजपा में बृजभूषण
बृजभूषण शरण सिंह ने सपा में रहते हुए 2009 में इस सीट पर पहली बार लोकसभा चुनाव जीता था। जिसके बाद 2014 में उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया और वो इस सीट से तीसरी बार सांसद हैं। हालांकि बृजभूषण पहली बार 1991 में गोंडा लोकसभा सीट से भाजपा के टिकट पर सांसद चुने गए थे। 1991 के बाद 1999 में वो दोबारा इस सीट से सांसद बने। 2004 में भाजपा के टिकट पर ही वो बलरामपुर लोकसभा सीट से सांसद चुने गए।
जब भाजपा से निष्कासित हो गए थे बृजभूषण
ये बात साल 2008 की है, जब लोकसभा में विश्वास मत के दौरान सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने संसद क्रॉस वोटिंग कर दी थी। इसके चलते भाजपा ने उन्हें निष्कासित कर दिया था। इसी के बाद उन्होंने समाजवादी पार्टी का रुख किया और मुलायम सिंह यादव की साइकिल पर सवार हो गए। सपा ने 2009 में उन्हें कैसरगंज सीट से उम्मीदवार बनाया और उन्होंने जीत हासिल की।
बृजभूषण के खिलाफ अदालत ने स्थगित की सुनवाई
दिल्ली की एक अदालत भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ छह महिला पहलवानों द्वारा दर्ज कराए गए यौन उत्पीड़न के मामले में उनके खिलाफ आरोप तय करने को लेकर 26 अप्रैल को अपना फैसला सुना सकती है।
IPC की इन धाराओं के तहत बृजभूषण पर केस
दिल्ली पुलिस ने छह बार के सांसद सिंह के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 354 (किसी महिला का शील भंग करने के इरादे से उस पर हमला या आपराधिक बल प्रयोग), 354ए (यौन उत्पीड़न), 354डी (पीछा करना) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत 15 जून को मामले में आरोपपत्र दाखिल किया था। पुलिस ने इस मामले में डब्ल्यूएफआई के निलंबित सहायक सचिव विनोद तोमर पर भी आरोप लगाए थे।
