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पंजाब में क्या फिर साथ आएंगे भाजपा-अकाली दल, क्यों लग रही अटकलें? जानें चुनाव में किसे हो सकता है फायदा

पंजाब भाजपा के महासचिव अनिल सरीन ने कहा कि 'पीएम मोदी और बादल के बीच क्या बात हुई, इसके बारे में जानकारी नहीं है। शिअद ने जिस तरीके से परिसीमन और महिला आरक्षण विधेयक को समर्थन दिया, इसे देखकर ऐसा लगता है कि दोनों नेताओं के बीच इन्हीं विधेयकों पर चर्चा हुई।'

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पंजाब में फिर साथ आ सकते हैं भाजपा-शिअद। तस्वीर-AI
Written by: Alok Rao
Updated Aug 13, 2026, 09:15 IST
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Punjab Assembly Election 2027: पंजाब में विधानसभा चुनाव से पहले सियासी सरगर्मी तेज होने लगी है। चर्चा है कि 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और शिरोमणि अकाली दल (शिअद) फिर एक साथ आ सकते हैं। दरअसल, पुराने दोनों साथियों के एक साथ आने की अटकलें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिअद प्रमुख सुखबीर सिंह बादल के बीच हुई मुलाकात के बाद लगनी शुरू हुई हैं। दोनों नेताओं के बीच यह मुलाकात बीते शुक्रवार को संसद भवन में हुई। हालांकि, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पंजाब में भाजपा और शिअद के साथ आने की अटकलों को खारिज किया है। एक संवाददाता सम्मेलन में सैनी ने कहा कि भाजपा का सिर्फ पंजाब के लोगों से गठबंधन है। वहीं, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने कहा कि बीजेपी पंजाब की सभी 117 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी। नेताओं की मुलाकातों और बयानों से भाजपा-शिअद के साथ आने पर सस्पेंस बना हुआ है।

विधेयकों पर साथ आकर शिअद ने दिए संकेत

बता दें कि पंजाब में 2024 का लोकसभा चुनाव भाजपा ने शिअद से अलग होकर लड़ा था, तब से दोनों पार्टियों की राह अलग है लेकिन पंजाब विधानसभा चुनाव को लेकर दोनों पार्टियों में एक सुगबुगाहट देखी जा रही है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक पीएम मोदी और बादल के बीच हुई मुलाकात के बारे में शिअद के एक नेता ने कहा, 'प्रधान जी (सुखबीर सिंह बादल) लंबे समय बाद पीएम मोदी से मिले। ऐसे में लोग यदि अटकलें लगा रहे हैं तो हम इस बारे में क्या कह सकते हैं? चूंकि, यह बैठक सभी की नजरों में आया है तो अटकलें लग रही हैं।' दूसरी बात, पीएम मोदी और बादल के मुलाकात के बाद शिअद ने महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन विधेयक तुरंत पारित करने की मांग की। इस मांग ने दोनों राजनीतिक दलों के साथ आने की अटकलों को और हवा दी। इन दोनों विधेयकों पर शिअद के रुख की संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने अपने एक सोशल मीडिया पोस्ट में प्रशंसा की। वहीं, आम आदमी पार्टी, कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के सांसदों ने शिअद की आलोचना की।

पंजाब में अब छोटे भाई की भूमिका नहीं रहना चाहती BJP

शिअद के साथ करीबी की अटकलों पर पंजाब भाजपा के नेता खुलकर नहीं बोल रहे हैं। पंजाब भाजपा के महासचिव अनिल सरीन ने कहा कि 'पीएम मोदी और बादल के बीच क्या बात हुई, इसके बारे में जानकारी नहीं है। शिअद ने जिस तरीके से परिसीमन और महिला आरक्षण विधेयक को समर्थन दिया, इसे देखकर ऐसा लगता है कि दोनों नेताओं के बीच इन्हीं विधेयकों पर चर्चा हुई।' हालांकि, सरीन ने कहा कि भाजपा राज्य की सभी 117 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। निजी तौर पर भाजपा के नेता स्वीकार करते हैं कि अकाली दल के साथ अब कोई भी गठबंधन 2020 में तीन कृषि कानूनों को लेकर दोनों दलों के अलग होने से पहले वाले समीकरण से बिल्कुल अलग होगा। पुराने फॉर्मूले के तहत बीजेपी 117 विधानसभा सीटों में से 23 सीटों पर चुनाव लड़ती थी, जबकि SAD के हिस्से में 94 सीटें थीं। बीजेपी के एक सूत्र ने कहा, 'पंजाब में बीजेपी अब छोटे भाई की भूमिका नहीं निभा सकती।'

punjab poll

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117 सीटों पर चुनाव लड़ने की हमारी तैयारी-ढिल्लों

दोनों दलों के कार्यकर्ताओं के जमीनी स्तर पर अच्छे संबंध होने की ओर इशारा करते हुए सूत्र ने कहा कि गठबंधन से राज्य में संभावित रूप से 'सांप्रदायिक सौहार्द की लहर' पैदा हो सकती है। पंजाब बीजेपी अध्यक्ष केवाल सिंह ढिल्लों ने भी मोदी-बादल मुलाकात का स्वागत किया, लेकिन उन्होंने भी कहा कि पार्टी सभी 117 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, जो पंजाब में सक्रिय रहे हैं, इस मुद्दे पर अधिक स्पष्ट नजर आए। उन्होंने सोमवार को अकाली दल के साथ दोबारा गठबंधन की संभावना को खारिज करते हुए कहा, 'ऐसा कुछ नहीं है। पंजाब में बीजेपी का गठबंधन वहां की जनता के साथ है। प्रधानमंत्री के दरवाजे हर किसी से मिलने के लिए खुले हैं।' इस बीच सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पंजाब में रैलियां करेंगे। साथ ही पंजाब को लेकर कुछ और घोषणाएं भी जल्द की जा सकती हैं।

गठबंधन के मुद्दे पर SAD में भी मतभेद?

अकाली दल प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने सोमवार को गठबंधन से जुड़े सवालों को टाल दिया, जबकि पार्टी के नेताओं ने सार्वजनिक तौर पर ऐसी अटकलों को खारिज किया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता बलविंदर सिंह भुंडर ने कहा कि परिसीमन को लेकर पार्टी का समर्थन 'पूरी तरह पंजाब के हितों पर आधारित' है। उन्होंने कहा, 'केंद्र अब लोकसभा सीटों में समान रूप से 50 फीसदी बढ़ोतरी का प्रस्ताव कर रहा है। ऐसे में जनसंख्या के आधार पर पंजाब को 18 के बजाय करीब 20 सीटें मिल सकती हैं।' SAD के एक अन्य नेता सिकंदर सिंह मलूका ने कहा कि गठबंधन की मांग जमीनी स्तर से उठ रही है। उन्होंने कहा, 'दोनों दलों के कैडर और कार्यकर्ताओं की तरफ से गठबंधन की आवाज उठ रही है। लेकिन गठबंधन होगा या नहीं, इसका फैसला पूरी तरह दोनों पार्टियों को करना है।'

मैं उस बैठक में शामिल नहीं थी-हरसिमरत

SAD की एकमात्र लोकसभा सांसद हरसिमरत कौर बादल ने भी गठबंधन के मुद्दे पर टिप्पणी करने से परहेज किया। उन्होंने कहा, 'मैं उस बैठक में शामिल नहीं थी, इसलिए यह नहीं बता सकती कि बैठक में किन मुद्दों पर चर्चा हुई।' हालांकि, अकाली दल के एक अन्य अंदरूनी सूत्र ने कहा कि यदि दोनों पक्ष सीटों के बंटवारे पर आपसी सहमति बना लेते हैं तो गठबंधन संभव है। उन्होंने कहा, 'यह तभी हो सकता है जब दोनों में से कोई एक पार्टी बहुत ज्यादा समझौता न करे।'

क्या कहते हैं चुनावी आंकड़े?

चुनावी गणित के कारण दोनों दलों के बीच संभावित सुलह की संभावना को पूरी तरह खारिज करना मुश्किल है। 2019 में बीजेपी और SAD ने मिलकर 37.08 फीसदी वोट हासिल किए थे और दोनों पार्टियों ने दो-दो लोकसभा सीटें जीती थीं। 2024 में अलग-अलग चुनाव लड़ने पर बीजेपी का वोट शेयर 9.63 फीसदी से बढ़कर 18.56 फीसदी हो गया, जबकि SAD का वोट शेयर 27.45 फीसदी से गिरकर 13.42 फीसदी रह गया। दोनों दलों का संयुक्त वोट शेयर 31.98 फीसदी था, जो कांग्रेस के 26.3 फीसदी और आम आदमी पार्टी के 26.02 फीसदी से अधिक था। इसके बावजूद बीजेपी एक भी सीट नहीं जीत सकी, जबकि SAD को सिर्फ एक सीट मिली। वहीं कांग्रेस ने सात और AAP ने तीन सीटों पर जीत दर्ज की।

sukhbir badal

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भाजपा- शिअद दोनों देख रहे अपने लिए फायदे

SAD के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, 'सिर्फ वोट हासिल करना पर्याप्त नहीं है, सीटें जीतना भी जरूरी है। दोनों पार्टियां अपनी ताकत और कमजोरियों को समझ चुकी हैं। गठबंधन दोनों दलों और पंजाब के हित में है। केंद्र के साथ समन्वय वाली सरकार बेहतर परिणाम दे सकती है।' दोनों दलों के सूत्रों के मुताबिक, 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले पंजाब में उभर रही राजनीतिक संभावनाओं को देखते हुए भी गठबंधन के सवाल पर विचार किया जा रहा है। उनका कहना है कि AAP को कई मोर्चों पर सत्ता विरोधी लहर का सामना करना पड़ रहा है, जबकि कांग्रेस अब भी अंदरूनी गुटबाजी से जूझ रही है।

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