Bangladesh Violence: 'आप मित्र तो बदल सकते हैं, लेकिन पड़ोसी नहीं...,' पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने साल 2003 के मई महीने में संसद से यह बात कही थी। आज के समय में भारत के बाईं और दाईं ओर दोनों तरफ ऐसे मुल्क हैं, जो धार्मिक कट्टरवाद का शिकार हो चुके हैं। पाकिस्तान तो पहले से ही दरिद्रता का शिकार अंताकियों के लिए जन्नत है, लेकिन अब बांग्लादेश भी विकास की पटरी से उतरकर धार्मिक उन्माद और कट्टरवाद की राह पर चल पड़ा है।
चिकन नेक कॉरिडोर पर बुरी नजर रखने वालों को भारतीय सेना ने दिया करारा जवाब।(फोटो सोर्स: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल)
शेख हसीना को सत्ता से दूर करने के बाद जिस अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद युनूस ने 'नया बांग्लादेश' बनाने का दावा किया था, वो देश आज कट्टरपंथ के गिरफ्त में आ चुका है। मोहम्मद युनूस सरकार ने कट्टरवादियों को फलने-फूलने का पूरा इको इकोसिस्टम दिया, जिसका परिणाम है कि आज बांग्लादेश हिंसा की आग में जल रहा है।
शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद बांग्लादेश में बवाल।(फोटो सोर्स: AP)
भारत के खिलाफ जहर उगल रहे बांग्लादेशी नेता
जिस भारत की वजह से बांग्लादेश को पाकिस्तान से आजादी मिली, आज उसी देश में भारत विरोधी नारे लगाए जा रहे हैं। भारत की संप्रभुता पर हमले करने की बात कही जा रही है। इसमें कोई दो राय नहीं है कि बांग्लादेश के युवाओं में यह जहर घोलने का काम पाकिस्तान लगातार कर रहा है, लेकिन सवाल यह है कि आखिर भारत अपनी सुरक्षा के लिए कितना तैयार है।
दरअसल, बांग्लादेश के नेताओं की ओर से 'सिलीगुड़ी कॉरिडोर' (Siliguri Corridor) के खिलाफ लगातार बयानबाजी हो रही है। बता दें कि भारत के उत्तर पूर्वी राज्यों को जोड़ने वाला पश्चिम बंगाल का सिलीगुड़ी कॉरिडोर या चिकन नेक बेहद महत्वपूर्ण है। इसकी चौड़ाई केवल 22 किलोमीटर और लंबाई 60 किलोमीटर है, जो नेपाल और बांग्लादेश की सीमा से सटा हुआ है।
पिछले कुछ दिनों से बांग्लादेश में भड़क उठी है हिंसा।(फोटो सोर्स: AP)
सबसे बड़ी बात है कि बांग्लादेश के अलावा चीन की भी 'सिलीगुड़ी कॉरिडोर' पर नापाक नजर रहती है।
शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद बांग्लादेश में भड़की हिंसा के दौरान कई बार वहां के नेताओं ने चिकन नेक पर हमला करने की गीदड़भभकी दी है। हालांकि, सच्चाई ये है कि बांग्लादेश तो क्या चीन और पाकिस्तान भी पूर्वोत्तर की ओर आंख उठा कर नहीं देख सकते।
भारतीय सेना की क्या है तैयारी?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीय सेना मिजोरम-बांग्लादेश सीमा पर एक बड़ा सैन्य अड्डा स्थापित कर रही है। हाल ही में भारतीय सेना ने तीन नए गैरीसन बनाए हैं। असम के धुबरी (लाचित बोरफुकन मिलिट्री स्टेशन) सैन्य बेस तैयार किए हैं।
धुबरी के पास बामुनी में स्थित लाचित बोरफुकन सैन्य अड्डा है, जो बांग्लादेश के साथ असम की सीमा पर स्थित पहला स्थायी सैन्य अड्डा है। 65 एकड़ में फैला और तेजपुर स्थित 4 कोर (गजराज कोर) के अधीन संचालित यह अड्डा त्वरित तैनाती, घुसपैठ-विरोधी गतिविधियों और क्षेत्र पर प्रभुत्व स्थापित करने के लिए बनाया गया है। इसमें अर्धविशेष बलों की एक टुकड़ी सहित 1,500 जवान तैनात हैं।
इसी कॉरिडोर के किनारे बिहार के किशनगंज और उत्तरी बंगाल के चोपड़ा में दो अतिरिक्त अग्रिम चौकियां तेजी से विकसित की गई हैं। बांग्लादेश के टेटुलिया से एक किलोमीटर से भी कम दूरी पर स्थित चोपड़ा अड्डा एक रणनीतिक स्थान पर है। दोनों चौकियों में लगभग 1,000 सैनिक तैनात हैं और ये बंगाल के पानागढ़ स्थित 17 माउंटेन स्ट्राइक कोर (ब्रह्मास्त्र कोर) के अधीन हैं।
इन तीनों जगहों से सेना बांग्लादेश के हालात और सिलीगुड़ी कॉरिडोर पर निगरानी रखेगी।
सिलीगुड़ी कॉरिडोर की निगरानी मजबूत कर रही भारतीय सेना।(फोटो सोर्स: @himantabiswa)
ब्रह्मोस और S-400 देख थर-थर कापंगे दुश्मन
इतना ही नहीं, सेना ने हाशिमारा एयरबेस पर राफेल फाइटर जेट तैनात किए हैं। इसके अलावा, ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल रेजिमेंट और एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम भी इन सैन्य अड्डों पर तैनात किए गए हैं। इसके अलावा, टैंक, मैकेनाइज्ड, एयर डिफेंस और पेरा स्पेशल फोर्सेस भी हैं, जो चिकेन नेक की हर पल निगरानी रखेंगे।
इसके अलावा, चिकन नेक (Chicken Neck) पर आवाजाही की निर्भरता कम करने के लिए सरकार कई मास्टर प्लान भी बना रही है। सरकार नए रेल-रोड प्रोजेक्ट, म्यांमार के रास्ते समुद्री सप्लाई और नेपाल-बांग्लादेश से वैकल्पिक कनेक्टिविटी पर काम कर रही है।
ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल रेजिमेंट और एस-400 एयर डिफेंस बढ़ रहा भारत की सैन्य ताकत।(फोटो सोर्स: ANI)
सिलीगुड़ी कॉरिडोर की रखवाली करने में मदद करेगा भूटान
सिलीगुड़ी कॉरिडोर की हिफाजत करने में भारत के प्रिय मित्रों में से एक देश, भूटान भी अहम भूमिका निभा रहा है। सिलीगुड़ी की रखवाली करने में भूटान, भारत का सबसे भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार है। चीन से डोकलाम टकराव के दौरान भी भूटान ने साफ कहा था कि उनकी जमीन का इस्तेमाल भारत के खिलाफ नहीं होगा।
बांग्लादेश नहीं, पाकिस्तान है असली खतरा
सबसे बड़ा सवाल है कि क्या वाकई चिकेन नेक या सिलीगुड़ी कॉरिडोर को बांग्लादेश से खतरा है। इसमें कोई दो राय नहीं है कि बांग्लादेश के पास इतनी मजबूत सेना नहीं है कि वह भारत के खिलाफ हमले की सोच भी सकता है, लेकिन मौजूदा समय में पाकिस्तान और चीन मिलकर बांग्लादेश में बड़ी तादाद में सैन्य उपकरण का निर्माण कर रहे हैं।
पाकिस्तानी सैन्य आपूर्तिकर्ता कंपनी हेवी इंडस्ट्रीज तक्षशिला बांग्लादेशी टैंकों को और बेहतर बना रही है। पाकिस्तान सेना की ओर से जेएफ-17 लड़ाकू विमानों को उड़ाने के लिए बांग्लादेशी पायलटों को ट्रेनिंग दी जा रही है। और, पाकिस्तानी नौसेना का एक जहाज, पीएनएस सैफ, नवंबर में चटोग्राम बंदरगाह पर पहुंच चुका है। बांग्लादेशी नौसेना का एक जहाज, बीएनएस समुद्र जॉय, फरवरी में पाकिस्तान के अमान-2025 नौसैनिक अभ्यास में शामिल हुआ, और आईएसआई की टीमें बांग्लादेश में सक्रिय हैं।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और मोहम्मद युनूस की फाइल फोटो।( AP)
बता दें कि इस साल जनवरी महीने में, जनवरी 2025 में, बांग्लादेश के सशस्त्र बल प्रभाग के प्रधान स्टाफ अधिकारी, लेफ्टिनेंट जनरल एस.एम. कामरुल हसन ने पाकिस्तान में पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल एस.एस. मिर्जा और पाकिस्तानी वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल जहीर अहमद बाबर सिद्धू से मुलाकात की।
कैसे बांग्लादेश की सैन्य ताकत को मजबूत बना रहा चीन?
चीन भी बांग्लादेश को सैन्य मदद देने में पीछे नहीं हट रहा। 2.2 अरब डॉलर के समझौते के तहत चीन बांग्लादेश को 20 जे-10सीई लड़ाकू जेट देगा, और संयुक्त ड्रोन कारखाने खुल चुके हैं। चीन बांग्लादेश के मोंगला और चटोग्राम बंदरगाहों को अपग्रेड कर रहा है। इन घटनाओं ने भारत को अलर्ट कर दिया है।
मोहम्मद यूनुस और शी जिनपिंग की फाइल फोटो।(AP)
हालांकि, भारत को बांग्लादेश जैसे देश से ज्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं है। अगर बांग्लादेश को गलतफहमी है कि वह भारत का बाल भी बांका कर सकता है, तो वह पाकिस्तान से भारतीय सेना की ताकत की जानकारी ले सकता है। सैन्य कार्रवाई 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान जिस तरह भारत ने पाकिस्तान में घुसकर उसके सैन्य अड्डों को तबाह किया था, उसी तरह बांग्लादेश में मौजूद हर कट्टरपंथी को भारत मुंहतोड़ जवाब देने के लिए हर समय तैयार है।
