पाकिस्तान भारत में अस्थिरता और आतंकवाद फैलाने में पीछे नहीं रहता है। पर खुद पाकिस्तान को अपने एक प्रांत से सालों से जबर्दस्त चुनौती मिलती रही है...हम बात कर रहे हैं बलूचिस्तान (Balochistan) की जो बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है। वहां बलोच आंदोलन पाकिस्तान सरकार की नाक में दम कर रखा है। आखिर ऐसी क्या वजहें हैं जो बलूचों के मन में Pakistan को लेकर इतना गुस्सा और आक्रोश है और पाकिस्तानी सेना और बलूच समूहों में दशकों से टकराव जारी है।
बलूचिस्तान में असंतोष का मुख्य कारण है पाकिस्तान द्वारा इस क्षेत्र को जबरन अपने में मिलाना। बलूचिस्तान एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध क्षेत्र है, जो कभी स्वतंत्र रियासत कहलाता था। विलय के बाद से ही बलूच नेता लगातार स्वतंत्रता की मांग कर रहे हैं और कई विद्रोह हो चुके हैं
बलूचिस्तान-क्षेत्रफल में सबसे बड़ा,आबादी में सबसे कम
बलूचिस्तान की बात करें तो बता दें कि यह प्रांत क्षेत्रफल में सबसे बड़ा पर आबादी में सबसे कम है। पाकिस्तान के कुल क्षेत्रफल का काफी बड़ा हिस्सा अकेले बलूचिस्तान में है। बलूचिस्तान में प्राकृतिक गैस,सोना, तांबा, कोयला, क्रोमाइट, यूरेनियम जैसे पदार्थों की भरमार है फिर भी यह इलाका गरीबी और पिछड़ेपन से दो-चार ही होता रहा है।
बलूचिस्तान-क्षेत्रफल में सबसे बड़ा, आबादी में सबसे कम
बलूचिस्तान में असंतोष के मुख्य कारण
बलूचिस्तान में गैस,सोना-तांबा, कोयला जैसे संसाधन प्रचुर हैं, यानी यहां पर गैस, खनिज और समुद्री बंदरगाह जैसे प्राकृतिक संसाधन हैं, लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि इन संसाधनों का शोषण किया जा रहा है और उन्हें इसका उचित लाभ नहीं मिल रहा है।वहीं बलूच लोग अपने क्षेत्र की स्वतंत्रता चाहते हैं और पाकिस्तान से अलग होना चाहते हैं। साथ ही बलूचिस्तान में विकास की कमी है और स्थानीय लोगों को बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।
पाकिस्तान सेना की कार्रवाई से बलूच लोगों में असंतोष
पाकिस्तानी सेना द्वारा बार-बार सैन्य ऑपरेशन, चेकपोस्ट, छापे, गिरफ्तारियां से आम लोगों पर असर पड़ता है और उनमें डर, असुरक्षा की भावना के साथ ही आक्रोश पैदा होता है। बलूचों की शिकायत है कि यहां के ज्यादातर फैसले इस्लामाबाद में बैठी सरकार करती है और स्थानीय नेतृत्व को अधिकार नहीं है। वहीं पाकिस्तान सेना की कार्रवाई के कारण बलूच लोगों में असंतोष है, जो उन्हें आतंकवादियों के खिलाफ लड़ने के लिए मजबूर कर रही है।इन कारणों से बलूचिस्तान में असंतोष बढ़ रहा है और यह एक जटिल और संवेदनशील मुद्दा बन गया है।
ग्वादर पोर्ट और CPEC बलूचिस्तान में ही है
चीन के लिए बेहद अहम ग्वादर पोर्ट और CPEC बलूचिस्तान में ही है
बलूचिस्तान की एक और खासियत यह है कि ग्वादर बंदरगाह बलूचिस्तान में है और यह चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) का अहम हिस्सा है। यह चीन के लिए बेहद अहम है क्योंकि इस से अरब सागर तक सीधी पहुंच हो जाएगी। साथ ही तेल और व्यापार का शॉर्ट रूट भी है जिसके चलते बलूचिस्तान भू-राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील है।
बलूचों का फटता रहता है गुस्सा
इसी साल यानी 2025 में क्वेटा से पेशावर जा रही पाकिस्तानी यात्री ट्रेन ' जाफर एक्सप्रेस' , जिसमें कम से कम 380 यात्री सवार थे, को 11 मार्च 2025 को बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) ने अगवा कर लिया। हमलावरों ने ट्रेन पर गोलीबारी करने से पहले सुरंगों और पटरियों पर विस्फोटक सामग्री में विस्फोट किया, जिससे ट्रेन एक पहाड़ी क्षेत्र में रुक गई, जहां अधिकारियों का पहुंचना मुश्किल था। फिर 11 से 12 मार्च 2025 तक, पाकिस्तानी सशस्त्र बलों ने 'ऑपरेशन ग्रीन बोलन' नामक एक अभियान चलाया, जिसके तहत अपहृत ट्रेन पर कई बार छापे मारे गए। अंततः 354 बंधकों को छुड़ाया गया था।
बलूचिस्तान में असंतोष के मुख्य कारण
बलूच आंदोलन की क्या खास हैं मांगे
बलूच राष्ट्रवादी आंदोलन बलूचिस्तान के लोगों का एक राजनीतिक और सशस्त्र आंदोलन है, जो पाकिस्तान से पूर्ण स्वतंत्रता या अधिक स्वायत्तता, सांस्कृतिक पहचान की सुरक्षा और संसाधनों पर नियंत्रण की मांग करता है। वहीं बलूच राष्ट्रवादी अधिक सांस्कृतिक, आर्थिक और राजनीतिक स्वतंत्रता चाहते हैं, जिसमें कुछ समूह बलूचिस्तान के एक स्वतंत्र राज्य के निर्माण की मांग करते हैं जिसे लेकर बलूचों का आक्रोश अक्सर फटता रहता है। वहीं ताजा घटनाक्रम में बलूचिस्तान में पेन-डाउन स्ट्राइक का ऐलान किया गया है। बलूचिस्तान ग्रैंड अलायंस से जुड़े सरकारी कर्मचारियों के संगठन सोमवार को पेन-डाउन स्ट्राइक (काम रोको हड़ताल) कर रहे हैं, जिसके बाद 30 और 31 दिसंबर को प्रांत के सभी सरकारी संस्थानों में पूरी तरह लॉकडाउन रहेगा।
बलूचिस्तान में 'गायब लोगों' का मुद्दा बेहद गंभीर
बलूचिस्तान में गायब लोगों का मुद्दा बहुत गंभीर है। जहां मानवाधिकार संगठन और स्थानीय परिवार पाकिस्तानी सुरक्षा एजेंसियों पर बलूच युवाओं, छात्रों और कार्यकर्ताओं के अपहरण का आरोप लगाते हैं, जिससे उनके परिवार मानसिक पीड़ा में जी रहे हैं। वहीं यह मुद्दा एक बड़े मानवीय संकट का रूप ले चुका हैऔर ऐसे गायब लोगों के बारे में उनके परिवारों को उनके बारे में कोई जानकारी नहीं है। ऐसा माना जाता है कि ये लोग सैन्य कार्रवाई के दौरान गायब हुए हैं। बलूच महिलाओं और छात्रों के जबरन गायब होने के मामले काफी सामने आते रहे हैं। जिससे यहां की आबादी में आतंक और डर का माहौल है। संगठनों के अनुसार अब तक हजारों लोग गायब हुए हैं, और हाल के महीनों में भी यह प्रवृत्ति बढ़ी है। वहीं पाकिस्तानी सरकार और सेना इसे प्रचार बताकर खारिज करती रही है और दावा करती है कि ज्यादातर मामले सुलझा लिए गए हैं पर मानवाधिकार कार्यकर्ता इन आंकड़ों को गलत बताते हैं और इसे पाक सरकार का प्रोपेगंडा बताते हैं।
