Atal Vayo Abhyuday Yojana Explained : भारत में बुजुर्गों की आबादी तेजी से बढ़ रही है। उम्र बढ़ने के साथ कई लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं, रहने की सुरक्षित जगह, आर्थिक सहायता और रोजमर्रा के कामों में मदद की जरुरत होती है। वहीं, शहरों में बढ़ते पलायन और संयुक्त परिवारों की जगह छोटे परिवारों के बढ़ने से बुजुर्गों की देखभाल की पारंपरिक व्यवस्था भी कमजोर हो रही है। ऐसी स्थिति में वरिष्ठ नागरिकों को सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन देने के लिए सरकार की योजनाओं की भूमिका अहम हो जाती है। अटल वयो अभ्युदय योजना (AVYAY) ऐसी ही एक प्रमुख योजना है, जिसका उद्देश्य बुजुर्गों को स्वास्थ्य, देखभाल, सहायक उपकरण और सामाजिक सहयोग जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
बुजुर्गों की देखभाल से इलाज तक… जानें अटल वयो अभ्युदय योजना में क्या-क्या मिलता है (तस्वीर-AI)
क्या है अटल वयो अभ्युदय योजना?
अटल वयो अभ्युदय योजना की शुरुआत वर्ष 2021 में सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने की थी। यह वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण से जुड़ी कई योजनाओं को एक साथ जोड़ने वाली व्यापक योजना है। इसके तहत पहले से चल रही वरिष्ठ नागरिकों के लिए राष्ट्रीय कार्ययोजना (NAPSrC) को भी शामिल किया गया। इस योजना का मुख्य उद्देश्य बुजुर्गों को स्वस्थ, सुरक्षित, सम्मानजनक और सक्रिय जीवन जीने में मदद करना है। इसके लिए रहने की सुविधा, भोजन, स्वास्थ्य सेवाएं, फिजियोथेरेपी, मनोरंजन और समुदाय के स्तर पर देखभाल जैसी सुविधाओं को बढ़ावा दिया जाता है। योजना के तहत जरूरतमंद वरिष्ठ नागरिकों को विशेष प्राथमिकता दी जाती है, खासकर उन लोगों को जिनके पास पर्याप्त पारिवारिक या सामाजिक सहयोग नहीं है।
बुजुर्गों के लिए यह योजना क्यों जरूरी है?
जनगणना 2011 के आंकड़ों के अनुसार, भारत में 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र के 10.38 करोड़ लोग थे। इनमें 5.11 करोड़ पुरुष और 5.27 करोड़ महिलाएं शामिल थीं। अनुमान है कि वर्ष 2036 तक देश में वरिष्ठ नागरिकों की संख्या बढ़कर करीब 23 करोड़ हो सकती है। बुजुर्गों की बढ़ती आबादी के साथ उनकी देखभाल की जरुरतें भी बढ़ रही हैं। उम्र के कारण कई लोगों को चलने-फिरने, देखने, सुनने या रोजमर्रा के काम करने में परेशानी होती है। कुछ बुजुर्ग ऐसे भी होते हैं जिनके परिवार के सदस्य काम के सिलसिले में दूसरे शहरों में रहते हैं। ऐसे में उनकी देखभाल करना मुश्किल हो सकता है। अटल वयो अभ्युदय योजना का उद्देश्य इन चुनौतियों का सामना करना और बुजुर्गों को ऐसी सुविधाएं देना है, जिससे वे अपनी उम्र के इस पड़ाव पर भी सम्मान के साथ जीवन बिता सकें।
योजना के तहत कौन-कौन सी सुविधाएं मिलती हैं?
इस योजना के अंतर्गत वरिष्ठ नागरिकों की जरुरतों को ध्यान में रखकर अलग-अलग कार्यक्रम चलाए जाते हैं। इनमें बुजुर्गों के लिए आवासीय सुविधाएं, स्वास्थ्य सेवाएं, सहायक उपकरण और देखभाल करने वाले लोगों को प्रशिक्षण देना शामिल है। योजना के तहत सहायता प्राप्त संस्थानों में वरिष्ठ नागरिकों के लिए रहने, भोजन और स्वास्थ्य देखभाल की व्यवस्था की जाती है। जरूरत के अनुसार मोबाइल चिकित्सा इकाइयों और फिजियोथेरेपी क्लीनिक के माध्यम से भी सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। इनका उद्देश्य बुजुर्गों को उनकी शारीरिक जरूरतों के मुताबिक सहायता देना है। हालांकि, योजना की सभी सुविधाएं हर बुजुर्ग को सीधे नकद राशि के रूप में नहीं मिलतीं। कई सुविधाएं सरकारी सहायता प्राप्त संस्थानों, शिविरों और संबंधित कार्यक्रमों के माध्यम से दी जाती हैं।
1. वरिष्ठ नागरिकों के लिए आवास और देखभाल की सुविधा
योजना के तहत इंटीग्रेटेड प्रोग्राम फॉर सीनियर सिटिजंस (IPSrC) चलाया जाता है। इसके अंतर्गत गैर-सरकारी संगठनों (NGOs), पंचायती राज संस्थाओं और स्थानीय निकायों को बुजुर्गों की देखभाल से जुड़ी सुविधाएं विकसित करने के लिए आर्थिक सहायता दी जाती है। इस कार्यक्रम के तहत वरिष्ठ नागरिकों के लिए आवास, निरंतर देखभाल वाले केंद्र, मोबाइल चिकित्सा इकाइयां, फिजियोथेरेपी क्लीनिक और प्रशिक्षण केंद्र जैसी सुविधाओं को समर्थन मिलता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस कार्यक्रम के तहत 764 वरिष्ठ नागरिक गृह, 13 निरंतर देखभाल गृह, 17 मोबाइल चिकित्सा इकाइयां और तीन फिजियोथेरेपी क्लीनिक सहायता प्राप्त कर रहे हैं। इन सुविधाओं का उद्देश्य ऐसे बुजुर्गों की मदद करना है, जिन्हें सुरक्षित रहने की जगह, नियमित देखभाल या स्वास्थ्य संबंधी सहायता की जरुरत है।
2. जरूरतमंद बुजुर्गों को मिलते हैं सहायक उपकरण
उम्र बढ़ने के साथ कई वरिष्ठ नागरिकों को चलने, सुनने या देखने में परेशानी होने लगती है। ऐसे लोगों की मदद के लिए राष्ट्रीय वयोश्री योजना (RVY) चलाई जाती है। इसे वर्ष 2017 में शुरू किया गया था और बाद में अटल वयो अभ्युदय योजना के अंतर्गत शामिल कर लिया गया। इस योजना के तहत पात्र बुजुर्गों को उनकी जरुरत के अनुसार सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जाते हैं। इनमें चलने में मदद करने वाले उपकरण, सुनने से जुड़े उपकरण और अन्य सहायक साधन शामिल हो सकते हैं। ये उपकरण जरूरतमंद वरिष्ठ नागरिकों को अधिक आत्मनिर्भर बनाने में मदद करते हैं। इन्हें वितरित करने के लिए विशेष शिविरों और प्रधानमंत्री दिव्याशा वयोश्री केंद्रों का उपयोग किया जाता है। इन केंद्रों का संबंध आर्टिफिशियल लिम्ब्स मैन्युफैक्चरिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (ALIMCO) से है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, इस कार्यक्रम के माध्यम से 10.45 लाख से अधिक वरिष्ठ नागरिकों को करीब 55.88 लाख सहायक उपकरण दिए जा चुके हैं।
3. राज्यों को भी मिलती है आर्थिक सहायता
हर राज्य में बुजुर्गों की जरूरतें अलग-अलग हो सकती हैं। पहाड़ी क्षेत्रों, ग्रामीण इलाकों और बड़े शहरों में रहने वाले वरिष्ठ नागरिकों के सामने अलग तरह की चुनौतियां होती हैं। इन्हें ध्यान में रखते हुए योजना में स्टेट एक्शन प्लान फॉर सीनियर सिटिजंस (SAPSrC) का प्रावधान है। इसके तहत राज्य और केंद्रशासित प्रदेश बुजुर्गों के कल्याण के लिए अपनी जरूरत के अनुसार योजनाएं बना सकते हैं। इन योजनाओं में बुजुर्गों की देखभाल करने वाले कर्मचारियों को प्रशिक्षण देना, मोतियाबिंद के ऑपरेशन के लिए अभियान चलाना और वरिष्ठ नागरिकों के लिए सुविधाओं को मजबूत करना शामिल हो सकता है। राज्य निर्धारित नियमों के तहत आवंटित राशि का 20 प्रतिशत तक हिस्सा अपनी जरूरतों के अनुसार स्वीकृत विशेष कार्यक्रमों पर खर्च कर सकते हैं। इससे राज्यों को स्थानीय समस्याओं के हिसाब से काम करने में मदद मिलती है।
4. बुजुर्गों की मदद के लिए हेल्पलाइन और डिजिटल सेवाएं
अटल वयो अभ्युदय योजना से जुड़े प्रयासों में हेल्पलाइन और डिजिटल सेवाओं का भी महत्व है। इनका उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों तक जानकारी पहुंचाना और जरूरत पड़ने पर उनकी सहायता करना है।
एल्डरलाइन 14567:- वरिष्ठ नागरिकों के लिए राष्ट्रीय हेल्पलाइन अक्टूबर 2021 में शुरू की गई थी। इसके माध्यम से बुजुर्ग मुफ्त जानकारी, मार्गदर्शन, भावनात्मक सहयोग और शिकायतों के समाधान में मदद ले सकते हैं। जरूरत पड़ने पर संबंधित अधिकारियों और सामाजिक संगठनों के सहयोग से सहायता पहुंचाने का प्रयास भी किया जाता है।
JEEVAN मोबाइल ऐप:- मई 2026 में शुरू किए गए इस ऐप का पूरा नाम जॉइंट एल्डरली एम्पावरमेंट एंड वर्चुअल असिस्टेंस नेटवर्क है। इसका उद्देश्य बुजुर्गों को कल्याणकारी योजनाओं, देखभाल केंद्रों और आपातकालीन सेवाओं से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराना है। इसमें जरूरी हेल्पलाइन तक पहुंचने के लिए एक टैप से कॉल करने की सुविधा भी शामिल है।
SHATAYU डैशबोर्ड:- मई 2026 में शुरू किया गया यह प्लेटफॉर्म वरिष्ठ नागरिकों को प्रशिक्षित देखभालकर्ताओं से जोड़ने में मदद करता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इसमें 30,151 देखभालकर्ताओं का डेटाबेस है। इनमें 23,334 महिलाएं और 6,817 पुरुष शामिल हैं।
इसके अलावा, ‘अनुभव बोलता है’ पहल के जरिए बुजुर्ग अपने जीवन के अनुभव, उपयोगी जानकारी और प्रेरक कहानियां साझा कर सकते हैं। इस माध्यम से स्वस्थ उम्र बढ़ने, कानूनी अधिकारों और सरकारी योजनाओं के बारे में जागरूकता बढ़ाने का भी प्रयास किया जाता है।
5. बुजुर्गों के लिए रोजगार और नए अवसर
वरिष्ठ नागरिकों के पास लंबे अनुभव और विशेष कौशल होते हैं। ऐसे में उनकी भूमिका केवल सहायता प्राप्त करने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। इसी सोच के तहत योजना से जुड़ी कुछ पहल बुजुर्गों को सक्रिय और आत्मनिर्भर बनाए रखने पर ध्यान देती हैं। सीनियरकेयर एजिंग ग्रोथ इंजन (SAGE) बुजुर्गों की जरूरतों को ध्यान में रखकर उत्पाद, तकनीक और सेवाएं विकसित करने वाले स्टार्टअप को बढ़ावा देता है। चयनित स्टार्टअप को निर्धारित शर्तों के तहत एक करोड़ रुपये तक की इक्विटी सहायता मिल सकती है। इससे बुजुर्गों के लिए बेहतर सुविधाएं विकसित करने और इस क्षेत्र में नए रोजगार पैदा करने में मदद मिल सकती है। वहीं, सीनियर सिटिजन अपॉर्चुनिटीज फॉर प्रोडक्टिव एंगेजमेंट (SCOPE) वरिष्ठ नागरिकों के अनुभव और कौशल के अनुसार रोजगार या अन्य उपयोगी गतिविधियों के अवसर उपलब्ध कराने पर ध्यान देता है। PM-SPECIAL पहल के तहत निर्धारित संस्थानों के माध्यम से बुजुर्गों की देखभाल करने वाले लोगों को कौशल आधारित प्रशिक्षण देने का प्रावधान है। इससे प्रशिक्षित देखभालकर्ताओं की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
योजना की निगरानी कैसे होती है?
योजना के तहत मिलने वाली सहायता का सही इस्तेमाल सुनिश्चित करने के लिए निगरानी की व्यवस्था भी की गई है। जिला स्तर पर जिला कलेक्टर या मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता वाली समितियां लाभार्थियों के चयन और स्थानीय स्तर पर कार्यक्रमों की निगरानी में भूमिका निभाती हैं। इसके अलावा, परियोजनाओं का निरीक्षण, खर्च का विवरण, उपयोगिता प्रमाणपत्र और ऑडिट की गई वित्तीय रिपोर्ट जैसी व्यवस्थाएं भी लागू हैं। ई-अनुदान पोर्टल, बायोमेट्रिक उपस्थिति और सीसीटीवी के जरिए निगरानी को मजबूत करने का प्रयास किया जाता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 में सितंबर 2026 को समाप्त तिमाही के लिए वरिष्ठ नागरिकों से जुड़े एकीकृत कार्यक्रम के तहत 755 परियोजनाओं को 77.98 करोड़ रुपये की अनुदान सहायता जारी की गई।
अटल वयो अभ्युदय योजना का लाभ कैसे लें?
इस योजना के तहत लाभ पाने का तरीका इस बात पर निर्भर करता है कि वरिष्ठ नागरिक को किस तरह की सहायता चाहिए। यदि किसी बुजुर्ग को सहायक उपकरण चाहिए, तो राष्ट्रीय वयोश्री योजना के तहत आयोजित शिविरों या संबंधित केंद्रों की जानकारी ली जा सकती है। आवासीय देखभाल या अन्य सेवाओं के लिए संबंधित वरिष्ठ नागरिक गृह, सहायता प्राप्त संस्था या राज्य के सामाजिक कल्याण विभाग से संपर्क किया जा सकता है।
सबसे पहले अपनी जरूरत के अनुसार संबंधित सुविधा की जानकारी जुटाना जरूरी है। इसके बाद पात्रता, जरूरी दस्तावेज और आवेदन की प्रक्रिया के बारे में संबंधित विभाग या संस्था से पुष्टि करनी चाहिए। आधार, आय प्रमाणपत्र या अन्य दस्तावेजों की जरूरत सुविधा और लागू नियमों के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। इसलिए सभी सुविधाओं के लिए एक ही आवेदन प्रक्रिया या पात्रता मान लेना सही नहीं होगा। किसी बुजुर्ग को सहायता या मार्गदर्शन की जरूरत होने पर एल्डरलाइन 14567 पर भी संपर्क किया जा सकता है।
अटल वयो अभ्युदय योजना का उद्देश्य बुजुर्गों को केवल आर्थिक या संस्थागत सहायता देना नहीं, बल्कि उन्हें सुरक्षित, स्वस्थ, सम्मानजनक और सक्रिय जीवन जीने के अवसर उपलब्ध कराना है। आवासीय देखभाल, सहायक उपकरण, चिकित्सा सुविधाएं, हेल्पलाइन, डिजिटल सेवाएं और रोजगार से जुड़ी पहल इसके प्रमुख हिस्से हैं। भारत में वरिष्ठ नागरिकों की आबादी बढ़ने के साथ ऐसी योजनाओं की जरूरत भी बढ़ेगी। इनका वास्तविक लाभ तभी अधिक लोगों तक पहुंचेगा, जब बुजुर्गों और उनके परिवारों को योजनाओं की सही जानकारी मिले, पात्रता और आवेदन प्रक्रिया स्पष्ट हो और सहायता समय पर उपलब्ध कराई जाए।
