Andy Burnham Vs Keir Starmer: ब्रिटेन में प्रधानमंत्री पद की रेस में एंडी बर्नहम के आ जाने से यह चुनाव दिलचस्प हो गया है। गैटर मैनचेस्टर के मेयर पद पर करीब एक दशक तक सेवा दे चुके बर्नहम का संसद में चुनकर आना मौजूदा प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर के लिए चुनौती बन गई है। बर्नहम लेबर पार्टी और देश के नेता के तौर पर स्टॉर्मर की जगह लेने की कोशिश कर रहे हैं। बर्नहम उन्हें लगातार चुनौती दे रहे हैं। 18 जून को मेकरफील्ड उपचुनाव में जीत दर्ज करने के बाद उनके हौसले बुलंद हैं और वह खुद को नए पीएम के रूप में पेश कर रहे हैं। वहीं, बर्नहम से मिल रही चुनौती के बारे में स्टार्मर का कहना है कि उन्हें पद से हटाने के बर्नहम के प्रयासों का वह मुकाबला करेंगे। स्टॉर्मर ने कहा कि वह पीछे नहीं हटेंगे और यदि नेतृत्व के लिए कोई मुकाबला होता है, तो वह उसमें हिस्सा लेंगे।
कौन हैं एंडी बर्नहम?
56 वर्षीय एंडी बर्नहम की गिनती लेबर पार्टी के सबसे अनुभवी नेताओं में होती है। उनका राजनीतिक करियर दो दशकों से अधिक समय तक फैला हुआ है और इसमें सरकार के शीर्ष स्तर पर काम करने के साथ-साथ इंग्लैंड के सबसे महत्वपूर्ण शहर-क्षेत्रों में से एक का लगभग एक दशक तक नेतृत्व करने का अनुभव शामिल है। कई समकालीन नेताओं के विपरीत, जिनकी पहचान केवल वेस्टमिंस्टर की राजनीति से जुड़ी है, बर्नहम की राजनीतिक पहचान दो अलग-अलग चरणों में विकसित हुई। उनके करियर का पहला चरण राष्ट्रीय राजनीति में उनका उदय था। 2001 में ली से लेबर सांसद चुने जाने के बाद उन्होंने पार्टी में तेजी से अपनी पहचान बनाई।
कई महत्वपूर्ण पद संभाल चुके हैं बर्नहम
टोनी ब्लेयर और गॉर्डन ब्राउन की लेबर सरकारों में उन्होंने कई महत्वपूर्ण पद संभाले। इनमें ट्रेजरी के चीफ सेक्रेटरी, संस्कृति मंत्री और स्वास्थ्य मंत्री जैसे पद शामिल थे। लेबर में उनकी बढ़ती पहचान के चलते उन्होंने 2010 में पार्टी नेतृत्व के लिए दावेदारी पेश की, लेकिन असफल रहे। पांच साल बाद 2015 में भी उनका दूसरा प्रयास सफल नहीं हुआ। इसके बाद उन्होंने वेस्टमिंस्टर की राजनीति में बने रहने के बजाय एक अलग रास्ता चुना। 2017 में उन्होंने संसद छोड़ दी और ग्रेटर मैनचेस्टर के पहले सीधे निर्वाचित मेयर का चुनाव जीता। यही फैसला उनके राजनीतिक कद को नई ऊंचाइयों तक ले गया।
ग्रेटर मैनचेस्टर में अपनी लोकप्रियता साबित की
आने वाले वर्षों में बर्नहम ने क्षेत्रीय हितों और स्थानीय प्रशासन के मजबूत समर्थक के रूप में पहचान बनाई। उनका तर्क था कि सत्ता और संसाधन अत्यधिक रूप से लंदन में केंद्रित हो गए हैं और इंग्लैंड के शहरों एवं क्षेत्रों को अधिक स्वायत्तता मिलनी चाहिए। मेयर के रूप में उनकी सफलता ने इस छवि को और मजबूत किया। 2021 और 2024 में मिली भारी जीतों ने ग्रेटर मैनचेस्टर में उनकी लोकप्रियता साबित की और उन्हें वेस्टमिंस्टर के बाहर लेबर के सबसे चर्चित नेताओं में शामिल कर दिया। उनकी सबसे चर्चित उपलब्धियों में से एक बी नेटवर्क का विकास था। इस योजना के तहत ग्रेटर मैनचेस्टर की बस सेवाओं को वर्षों की निजी व्यवस्था के बाद फिर से सार्वजनिक नियंत्रण में लाया गया।
Andy burnham
इस परियोजना के तहत किराए की अधिकतम सीमा तय की गई और लंदन की तरह एकीकृत परिवहन नेटवर्क विकसित करने की कोशिश की गई। इन उपलब्धियों ने बर्नहम की छवि एक ऐसे प्रशासक के रूप में बनाई जो सिर्फ राष्ट्रीय बहसों का हिस्सा नहीं बनता, बल्कि जमीन पर परिणाम भी देता है। इसी दौरान उन्हें 'किंग ऑफ द नॉर्थ' का उपनाम मिला, जो उनके क्षेत्रीय प्रभाव और केंद्र सरकार के फैसलों को चुनौती देने की उनकी क्षमता को दर्शाता है।
बर्नहम को लेकर क्यों तेज हुई PM पद की चर्चा?
इस उपचुनाव के नतीजे ने लेबर पार्टी के भीतर पहले से चल रही तीखी बहस को और बढ़ा दिया है। बहस इस बात पर है कि पार्टी का भविष्य क्या होगा, वह नाइजल फराज की रिफॉर्म यूके पार्टी की बढ़ती लोकप्रियता का मुकाबला कैसे करेगी, और क्या किएयर स्टार्मर अगले आम चुनाव तक लेबर का नेतृत्व करने के लिए सही व्यक्ति हैं। उपचुनाव के नतीजे को सत्तारूढ़ पार्टी के कई नेताओं ने इस बात के प्रमाण के रूप में देखा है कि एंडी बर्नमैन के पास वह राजनीतिक आकर्षण और जनसमर्थन है, जिसकी मदद से लेबर निराश मतदाताओं से दोबारा जुड़ सकती है। साथ ही, इससे इस चर्चा को भी बल मिला है कि 'किंग ऑफ द नॉर्थ' के नाम से मशहूर बर्नहम क्या भविष्य में ब्रिटेन के अगले प्रधानमंत्री बन सकते हैं।
बर्नहम संसद में क्यों लौटे?
राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती लोकप्रियता के बावजूद बर्नहम के प्रधानमंत्री बनने की महत्वाकांक्षा के सामने एक संवैधानिक बाधा थी क्योंकि वे सांसद नहीं थे। ब्रिटेन में प्रधानमंत्री आमतौर पर हाउस ऑफ कॉमन्स का सदस्य होता है। संसद में सीट के बिना वे राजनीतिक बहसों को प्रभावित तो कर सकते थे, लेकिन सरकार का नेतृत्व करने की वास्तविक संभावना नहीं थी। स्थिति तब बदली जब ग्रेटर मैनचेस्टर की मेकरफील्ड सीट से लेबर सांसद जोश साइमन्स ने इस्तीफा दे दिया। इससे बर्नहम को चुनाव लड़ने का अवसर मिला। इस कदम को व्यापक रूप से उनके समर्थकों द्वारा उन्हें दोबारा वेस्टमिंस्टर भेजने की रणनीति के रूप में देखा गया। यह उपचुनाव जल्द ही ब्रिटेन की हालिया राजनीति के सबसे चर्चित चुनावों में बदल गया। सामान्य स्थानीय चुनाव की बजाय इसे लेबर पार्टी में बर्नहम की भविष्य की भूमिका पर जनमत संग्रह जैसा माना जाने लगा।
रिफॉर्म यूके जैसी चुनौती का सामना कर सकते हैं बर्नहम
जब नतीजे आए तो बर्नहम ने शानदार जीत दर्ज की। उन्हें 54.8 प्रतिशत वोट मिले, जबकि रिफॉर्म यूके के उम्मीदवार को 34.5 प्रतिशत वोट मिले। कई लेबर नेताओं ने इस नतीजे को इस बात का प्रमाण माना कि बर्नहम रिफॉर्म यूके जैसी चुनौती का प्रभावी ढंग से मुकाबला कर सकते हैं। इस बड़ी जीत ने पार्टी के भीतर बर्नहम की स्थिति को मजबूत किया और स्टार्मर के नेतृत्व पर सवालों को और बढ़ा दिया। समर्थकों को संबोधित करते हुए बर्नहम ने कहा, 'हमें जनता की आवाज सुननी होगी, उस पर कार्रवाई करनी होगी और सही फैसले लेने होंगे। दूसरा मौका नहीं मिलेगा।' उन्होंने इस जीत को 'टर्निंग प्वाइंट' बताया और कहा कि यह ब्रिटिश राजनीति को नई दिशा देने का अवसर है। बर्नहम ने कहा कि यह परिणाम ब्रिटेन को 'उस विभाजित और अंधेरी राजनीति के रास्ते से दूर ले जाने का मौका देता है, जैसा हम अमेरिका में देखते हैं।'
कीर स्टार्मर के सामने संकट क्यों?
बर्नहम की वापसी ऐसे समय हुई है जब स्टार्मर कठिन दौर से गुजर रहे हैं। सिर्फ दो साल पहले स्टार्मर ने लेबर को भारी जीत दिलाकर सत्ता में वापस पहुंचाया था। लेकिन बड़े बहुमत के बावजूद उनकी सरकार राजनीतिक गति बनाए रखने में संघर्ष कर रही है। कई विवाद, नीतिगत यू-टर्न और निर्णयों को लेकर आलोचनाओं ने उनकी लोकप्रियता को नुकसान पहुंचाया है। हालिया सर्वेक्षणों में स्टार्मर की लोकप्रियता बेहद नीचे चली गई है और उन्हें आधुनिक दौर के सबसे अलोकप्रिय ब्रिटिश प्रधानमंत्रियों में गिना जा रहा है। मई में हुए स्थानीय चुनावों के बाद स्थिति और बिगड़ गई। लेबर को भारी नुकसान उठाना पड़ा, जबकि रिफॉर्म यूके लगातार मजबूत होती गई। इससे लेबर सांसदों में चिंता बढ़ गई कि 2029 के आम चुनाव से पहले उनकी अपनी सीटें खतरे में पड़ सकती हैं। रिपोर्टों के अनुसार, स्थानीय चुनावों के बाद लगभग एक-चौथाई लेबर सांसदों ने स्टार्मर से पद छोड़ने की मांग की है। सरकार के भीतर से भी दबाव बढ़ा है। रक्षा और स्वास्थ्य विभाग से जुड़े वरिष्ठ मंत्रियों ने पार्टी की दिशा और नेतृत्व को लेकर चिंताओं के बीच इस्तीफा दे दिया।
Keir Starmer
बर्नहम को सबसे मजबूत विकल्प क्यों?
नाइजेल फराज की रिफॉर्म यूके ब्रिटिश राजनीति में तेजी से मजबूत हो रही है। खासकर उन क्षेत्रों में जहां व्यवस्था-विरोधी भावना और आव्रजन जैसे मुद्दे प्रमुख हैं। कई लेबर सांसदों को डर है कि यदि पार्टी ने अपनी रणनीति नहीं बदली तो अगला चुनाव रिफॉर्म यूके के लिए बड़ा अवसर साबित हो सकता है। मेकरफील्ड में रिफॉर्म यूके को हराने वाली बर्नहम की जीत इसलिए प्रतीकात्मक रूप से बहुत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। एक लेबर सांसद के मुताबिक, बर्नहम अब लंदन ऐसे नेता के रूप में लौट रहे हैं जो फराज के राजनीतिक अभियान को चुनौती देने की क्षमता रखते हैं। यही कारण है कि पार्टी के भीतर नेतृत्व परिवर्तन की मांग तेज हो रही है। लेबर सदस्यों के बीच हुए सर्वेक्षणों में भी बर्नहम को संभावित नेतृत्व चुनाव का सबसे मजबूत दावेदार माना गया है।
क्या बिना आम चुनाव के PM बन सकते हैं बर्नहम?
सवाल है कि क्या बिना आम चुनाव के बर्नहम प्रधानमंत्री बन सकते हैं। तो इसका जवाब हां है क्योंकि वर्तमान में लेबर पार्टी के पास संसद में बहुमत है, इसलिए नेतृत्व परिवर्तन के लिए आम चुनाव जरूरी नहीं होगा। ब्रिटेन की संसदीय व्यवस्था में सत्तारूढ़ पार्टी का नेता ही सामान्यतः प्रधानमंत्री बनता है। इसलिए यदि बर्नहम लेबर पार्टी का नेतृत्व हासिल कर लेते हैं, तो वे बिना आम चुनाव के भी 10 डाउनिंग स्ट्रीट पहुंच सकते हैं। इसके लिए कई रास्ते संभव हैं। एक रास्ता यह हो सकता है कि स्टार्मर व्यवस्थित तरीके से पद छोड़ने की समयसीमा तय करें। कुछ लेबर नेताओं का मानना है कि इससे पार्टी को आंतरिक संघर्ष से बचाया जा सकता है और एक शांतिपूर्ण सत्ता हस्तांतरण संभव होगा। ऐसी स्थिति में यदि कोई मजबूत प्रतिद्वंद्वी सामने नहीं आता, तो बर्नहम सर्वसम्मति से नेता बन सकते हैं। दूसरा विकल्प यह है कि बर्नहम खुद नेतृत्व चुनाव की चुनौती पेश करें। लेबर पार्टी के नियमों के अनुसार किसी भी चुनौती देने वाले उम्मीदवार को पार्टी के 20 प्रतिशत सांसदों का समर्थन हासिल करना होता है। मौजूदा संख्या के हिसाब से यह आंकड़ा लगभग 81 सांसदों का है, जिसमें उम्मीदवार स्वयं भी शामिल होता है।
