'जीरो टॉलरेंस' के बाद अब 'एक्ट ऑफ वार', आतंकियों को अमेरिका-इजरायल की तरह सजा देगा भारत

Act Of War Policy: भारत का संदेश अब साफ और स्पष्ट है। यानी कि भारत पर आतंकवादी हमले में पाकिस्तान की धरती का इस्तेमाल यदि हुआ है तो वह सीधे कार्रवाई करेगा। पाकिस्तान और पीओके में दाखिल होना अब उसके लिए कोई नई बात नहीं है। भारत के खिलाफ आतंकी मंसूबे पालने वालों के लिए यह सीधी चेतावनी है कि हमला करोगे तो बचोगे नहीं।

Act Of War Policy: 'ऑपरेशन सिंदूर' ने आतंकवाद के खिलाफ भारत के नए संकल्प और नई सोच को आगे बढ़ा दिया है। सरकार के सूत्रों का कहना है कि शनिवार को 7, लोक कल्याण मार्ग पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में हुई उच्च स्तरीय बैठक में यह फैसला लिया गया कि आगे देश में होने वाले किसी भी आतंकवादी हमले को 'आतंकवादी कृत्य' माना जाएगा। एक्सपर्ट का मानना है कि यह बहुत बड़ा नीतिगत फैसला और आतंकवाद के खिलाफ बहुत बड़ा कदम है। अब तक भारत आतंकवाद पर 'जीरो टॉलरेंस' यानी कतई बर्दाश्त नहीं नीति का पालन करता आया है। अब वह एक कदम और आगे बढ़ गया है। आतंकवादी हमले को 'युद्ध का कृत्य' मान लेना की नीति उसे अमेरिका और इजरायल के साथ खड़ा कर देती है।

Act Of War

आतंकवादी हमलों को अब 'एक्ट ऑफ वार' मानेगा भारत।

अमेरिका-इजरायल जैसा मिलेगा तुरंत जवाब

अमेरिका और इजरायल अपने यहां होने वाले आतंकवादी हमलों को 'युद्ध की कार्रवाई' मान लेते हैं और फिर इसका जवाब भी वे तत्काल और सैन्य तरीके से देते हैं। यानी अगर किसी से ने उन पर हमला किया है तो उसे तत्काल सजा देने का मिशन शुरू हो जाता है। चाहे वह कहीं भी छिपा हो, उसके खात्मे के लिए सैन्य कार्रवाई शुरू हो जाती है। बाकी एजेंसियां तो अपना काम करती ही हैं। अब तक बाहर किसी देश से होने वाले आतंकवादी हमले पर भारत सरकार कूटनीतिक और अन्य तरीकों जिसमें सैन्य कार्रवाई भी शामिल है, जवाब देती रही है। 2016 में उरी हमले के बाद सर्जिकल स्ट्राइक और 2019 में पुलवामा के बाद बालाकोट एयरस्ट्राइक करने में भारत हिचका नहीं। अब पहलगाम हमले के बाद 'ऑपरेशन सिंदूर' ने आतंकवाद के खिलाफ भारत के दृढ़ संकल्प और कठोर फैसले की एक बहुत बड़ी लकीर खींची है।

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