आपातकाल के 50 वर्ष : इंदिरा गांधी और लोकतंत्र का 'काला अध्याय', 1975-77 इन दो वर्षों में क्या-क्या हुआ

आपातकाल के दौरान सबसे बड़ी नेता इंदिरा गांधी थी, इन्होंने आपातकाल घोषित किया। राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद थे इन्होंने आपातकाल की घोषणा पर हस्ताक्षर किए। गांधी के खिलाफ विपक्षी आंदोलन के नेता जयप्रकाश नारायण थे। तो वहीं इंदिरा गांधी के बेटे संजय गांधी तानाशाही उपायों को लागू करने में शामिल थे। कूमी कपूर, कुलदीप नायर, और अन्य: लेखक जिन्होंने विभिन्न साहित्यिक कार्यों के माध्यम से आपातकाल के प्रभाव को अपनी किताबों में दर्ज किया।

50 Years of Emergency : आज से ठीक 50 साल पहले 25 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल लागू किया। 21 महीनों का यह दौर संविधान, नागरिक अधिकारों के उल्लंघन, प्रेस की अभिव्यक्ति पर रोक और विपक्ष के नेताओं की गिरफ्तारियां का रहा। आपातकाल भारतीय लोकतंत्र का एक 'काला अध्याय' था जो निरंकुश सत्ता के दुरुपयोग, तानाशाही और प्रतिरोध की याद दिलाता है। आपातकाल की शुरुआत सुप्रीम कोर्ट के फैसले से हुई, जिसने गांधी को पद से अयोग्य ठहराया। आपातकाल के बाद हुए घटनाक्रमों ने भारतीय राजनीति में कई अहम बदलाव आए। इसमें कांग्रेस पार्टी का उत्थान और पतन और राष्ट्रीय पटल पर नए राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय दलों का उभार भी शामिल है।

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25 जून 1975 को देश में आपातकाल लागू किया।

आपातकाल के दौर के बड़े किरदार

आपातकाल के दौरान सबसे बड़ी नेता इंदिरा गांधी थी, इन्होंने आपातकाल घोषित किया। राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद थे इन्होंने आपातकाल की घोषणा पर हस्ताक्षर किए। गांधी के खिलाफ विपक्षी आंदोलन के नेता जयप्रकाश नारायण थे। तो वहीं इंदिरा गांधी के बेटे संजय गांधी तानाशाही उपायों को लागू करने में शामिल थे। कूमी कपूर, कुलदीप नायर, और अन्य: लेखक जिन्होंने विभिन्न साहित्यिक कार्यों के माध्यम से आपातकाल के प्रभाव को अपनी किताबों में दर्ज किया।

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