कैसी है वेब सीरीज शक (pic credit-netflix)
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Shaque Trust No One Review: नेटफ्लिक्स की सीरीज ‘शक: ट्रस्ट नो वन’ सस्पेंस और रहस्य से भरपूर है। परिणीति चोपड़ा, जेनिफर विंगेट और ताहिर राज भसीन की एक्टिंग कहानी को मजबूत बनाती है। क्या इसे देखना चाहिए? आइए जानते हैं।
Shaque Trust No One Review: नेटफ्लिक्स की नई सीरीज ‘शक: ट्रस्ट नो वन’ (Shaque Trust No One) रिलीज होते ही अपने सस्पेंस और रहस्य को लेकर ध्यान खींच रही है। परिणीति चोपड़ा (Parineeti Chopra), जेनिफर विंगेट और ताहिर राज भसीन जैसे कलाकारों से सजी यह कहानी आपको शुरुआत से ही सोचने पर मजबूर करती है कि आखिर सच क्या है और किस पर भरोसा किया जाए। हर एपिसोड के साथ कहानी में कुछ नया सामने आता है और शक की सुई बार-बार बदलती रहती है। लेकिन क्या सीरीज का यह सस्पेंस आखिर तक बना रहता है? क्या कलाकारों की एक्टिंग और कहानी आपको बांधकर रख पाएगी? आइए जानते हैं, ‘शक: ट्रस्ट नो वन’ देखनी चाहिए या नहीं...(टाइम्स नाउ नवभारत पर ये भी पढ़ें-Scoop 2 की तैयारियां शुरू, इस महीने से शुरू हो सकती है शूटिंग)
शिमला की खूबसूरत वादियों के बीच बनी ‘शक: ट्रस्ट नो वन’ की कहानी एक ऐसे रहस्य से शुरू होती है, जिसका जवाब सालों बाद भी नहीं मिलता। अन्विता यानी परिणीति चोपड़ा की छोटी बेटी अपेक्षा अस्पताल से अचानक गायब हो जाती है। पुलिस भी इस गुत्थी को सुलझा नहीं पाती। नौ साल बाद भी अन्विता को यकीन है कि उसकी बेटी जिंदा है। हर साल बेटी के जन्मदिन पर उसे एक रहस्यमयी तस्वीर मिलती है, जो उसकी उम्मीद बढ़ा देती है। इसी बीच उसकी मुलाकात साक्षी और गौरव से होती है। उनकी बेटी रिया को देखकर अन्विता को शक होता है कि कहीं यही उसकी खोई हुई बेटी तो नहीं? अब सवाल है कि अन्विता का शक सच है या सिर्फ उसका वहम?
शक: ट्रस्ट नो वन’ से परिणीति चोपड़ा ने ओटीटी पर डेब्यू किया है। सीरीज में वह अन्विता का किरदार निभा रही हैं, जो अपनी बेटी को सालों से ढूंढ रही है। इस किरदार में मां का दर्द, उम्मीद और बेचैनी साफ दिखाई देती है। परिणीति ने इन भावनाओं को काफी अच्छे तरीके से दिखाया है। खासकर जब अन्विता अपनी बेटी को लेकर उम्मीद और डर के बीच फंसती है, तब परिणीति का काम अच्छा लगता है। उनके कई सीन ऐसे हैं, जहां बिना ज्यादा कुछ कहे भी उनका दर्द समझ आ जाता है। एक मां के रूप में परिणीति का अभिनय सीरीज के इमोशनल हिस्से को मजबूत बनाता है। अगर किसी एक कलाकार ने इस सीरीज में सबसे ज्यादा ध्यान खींचा है, तो वह जेनिफर विंगेट हैं। साक्षी के किरदार में जेनिफर बहुत शांत रहते हुए भी सीन में अपनी अलग छाप छोड़ती हैं। उनकी चुप्पी, चेहरे के भाव और छोटे-छोटे रिएक्शन किरदार को रहस्यमयी बनाते हैं। उन्हें देखकर कई बार लगता है कि उनके मन में कुछ ऐसा है, जो वह बता नहीं रही हैं। यही बात साक्षी को देखने में दिलचस्प बनाती है। वहीं ताहिर राज भसीन आलोक के रोल में शांत नजर आते हैं और कहानी में अपनी जगह बनाए रखते हैं। सुमीत व्यास, हरलीन सेठी, सोनी राजदान और अनूप सोनी ने भी अच्छा साथ दिया है।
कुल मिलाकर ‘शक: ट्रस्ट नो वन’ एक ऐसी सीरीज है, जो आपको कहानी के साथ-साथ शक के खेल में भी उलझाए रखती है। यहां मामला सिर्फ यह जानने का नहीं है कि आखिर गुनहगार कौन है, बल्कि हर किरदार के पीछे छिपी कहानी भी धीरे-धीरे सामने आती है। सीरीज की शुरुआत से ही कई सवाल खड़े होते हैं और हर जवाब के साथ एक नया सवाल सामने आ जाता है। कहानी की रफ्तार कुछ जगह थोड़ी धीमी जरूर पड़ती है, लेकिन मेकर्स ने हर राज को तुरंत नहीं खोला है। यही बात सस्पेंस को बनाए रखती है। मां की अपने बच्चे को खोजने की जिद के साथ इसमें दर्द, भरोसा, धोखा और रिश्तों की उलझन भी देखने को मिलती है।
‘शक: ट्रस्ट नो वन’ कोई परफेक्ट थ्रिलर नहीं है, लेकिन इसका रहस्य आपको आखिर तक जोड़े रखता है। अगर आपको ऐसी कहानियां पसंद हैं, जहां हर कुछ देर में आपका शक बदलता रहे, तो यह सीरीज आपको अंत तक बांधे रख सकती है। हम इस सीरीज को 3.5 स्टार देते हैं।