Tu Hai Meri Kiran Movie Review: सोनाक्षी सिन्हा और जहीर इकबाल की फिल्म 'तू है मेरी किरण' रिलीज कर दी गई है। अगर आप इस मूवी को देखने का मन बना रहे हैं तो पहले यह रिव्यू पढ़ें लें।
जानिए कैसी है सोनाक्षी-जहीर की 'तू है मेरी किरण' (Pic Credit: Insatgram)
Tu Hai Meri Kiran Review in Hindi: अक्सर देखा गया है कि टाइम से जुड़ाव वाली कहानियां हमेशा उत्सुकता पैदा करती हैं। जब एक ही कहानी में प्यार, मिस्ट्री और अलग-अलग समय की दुनिया शामिल हो जाए तो दिलचस्पी बढ़ना लाजमी है। 23 अक्टूबर को ऐसी ही एक फिल्म रिलीज हुई है, जिसका नाम 'तू है मेरी किरण' है। इस मूवी में सोनाक्षी सिन्हा और जहीर इकबाल अहम रोल में हैं। इस मूवी की कहानी में आपकी दिखाई देगा कि किस तरह एक पुराना फोन दो अलग-अलग सालों में जी रहे लोगों को आपस में जोड़ देता है। तो चलिए देखते हैं निर्देशक करण रावल की यह रोमांटिक थ्रिलर अंत तक दर्शकों को बांधे रखने में कामयाब होती है या नहीं?
फिल्म की कहानी सितंबर 2026 में शुरू होती है, जहां किरण (सोनाक्षी सिन्हा), अपने पति रियान (अंकित गुप्ता) के साथ खुशहाल जिंदगी बिता रही है। किरण एक लेखिका है और आराम से उसकी लाइफ चल रही है। इसी बीच उसकी अलमारी में रखा एक पुराना फोन अचानक उसकी जिंदगी में एक नया मोड़ ले आता है। इस फोन के जरिए उसकी बातचीत समर (जहीर इकबाल) नाम के एक शख्स से होने लगती है। शुरुआत में यह मुलाकात नॉर्मल लगती है लेकिन जल्द ही किरण को पता चलता है कि समर साल 2016 में रह रहा है जबकि वह खुद 2026 में है। दोनों के बीच सिर्फ दूरी नहीं बल्कि पूरे दस साल का अंतर है।
धीरे-धीरे बातचीत का सिलसिला बढ़ता है और समर इस अनोखे रिश्ते को लेकर इमोशनल तौर पर कनेक्ट हो जाता है। हालांकि कहानी तब नया मोड़ लेती है जब किरण अचानक फोन फेंककर समर से बातचीत बंद कर देती है। आखिर किरण ऐसा क्यों करती है? उनके रिश्ते के पीछे कौन-सा रहस्य छिपा है? फिल्म इन्हीं सवालों के जरिए आगे बढ़ती है।
करण रावल ने फिल्म का सब्जेक्ट को बेहद दिलचस्प चुना है लेकिन कहानी आगे बढ़ते-बढ़ते अपने रास्ते से भटक जाती है। अतीत और वर्तमान के बीच फोन के जरिए स्थापित होने वाला संपर्क कहानी को एक अलग पहचान देता है। फिल्म की शुरुआत दर्शकों के मन में कई सवाल पैदा करती है। फिल्म की खासियत इसकी नॉन-लीनियर कहानी है, यानी घटनाएं सीधे क्रम में आगे नहीं बढ़तीं बल्कि अलग-अलग समय की परतें खुलती रहती हैं।
यह तरीका शुरुआती हिस्से में अच्छा काम करता है। जैसे-जैसे कहानी के नए पहलू सामने आते हैं, दर्शकों की उत्सुकता भी बढ़ती है। खासकर इंटरवल के आसपास आने वाला मोड़ कहानी को नई दिशा देता है और आगे क्या होगा, ऑडियंस के अंदर यह जानने की बेताबी दिखती है कि आगे क्या होगा? हालांकि फिल्म आगे चलकर कमजोर पड़ जाती है। एक अच्छी थ्रिलर दर्शकों को चौंकाने के साथ-साथ अपनी कहानी से जोड़े भी रखती है। 'तू है मेरी किरण' पहले हाफ में कुछ हद तक सफल होती है लेकिन दूसरे हाफ में यह बोर फील कराने लगती है।
'तू है मेरी किरण' में सोनाक्षी सिन्हा अपने किरदार में मजबूत नजर आती हैं। उनका किरदार भावनात्मक उलझनों से गुजरता है, जहां उसे अपने रिश्तों और सामने आ रहे रहस्यों के बीच संतुलन बनाना पड़ता है। सोनाक्षी अपने किरदार में संवेदनशीलता और गंभीरता का अच्छा मेल दिखाती हैं। वहीं दूसरी ओर जहीर इकबाल समर के किरदार में कहानी की मिस्ट्री को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। उनका किरदार शुरुआत से ही कई सवाल खड़े करता है। हालांकि कहानी आगे बढ़ने के साथ उनका किरदार कुछ हद तक एक ही दायरे में घूमता हुआ महसूस होता है। उनके किरदार को और अच्छे प्रेजेंट किया जा सकता था। अंकित गुप्ता रियान की भूमिका में दिखाई देते हैं। उनका स्क्रीन टाइम सीमित है, लेकिन वह अपने हिस्से का काम ठीक तरह से करते हैं।
फिल्म की शुरुआत उम्मीद जगाती है और इसका पहला हिस्सा दर्शकों को मिस्ट्री वर्ल्ड में खींचने में सफल रहता है। लेकिन जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, इसकी जटिलता बढ़ने लगती है और सस्पेंस का असर धीरे-धीरे कम होने लगता है। कमजोर पड़ती कहानी और अधूरे लगने वाले सवाल फिल्म के अनुभव को प्रभावित करते हैं। अगर आपको टाइम-बेंडिंग कहानियां, रोमांटिक थ्रिलर और रहस्य से भरी फिल्में पसंद हैं, तो यह मूवी आपके लिए एक बार देखने का ऑप्शन हो सकती है।