फिल्म पेड्डी रिव्यू (Image Source: IMDb)
Ram Charan,Janhvi Kapoor,Shiva Rajkumar
Peddi Full Movie Review: राम चरण की फिल्म पेड्डी बड़े पर्दे पर रिलीज हो गई है। फिल्म पेड्डी को देखने के प्लान कर रहे हैं, तो ये रिव्यू आपके काफी काम आने वाला है। फिल्म में काफी कुछ ऐसा देखने को मिलने वाला है, जो आपके दिल को जीत लेगा, तो वहीं कुछ सीन्स बोर करने वाले हैं।
Peddi Full Movie Review: साउथ के जाने-माने स्टार राम चरण की फिल्म पेड्डी आज यानी 4 जून को बड़े पर्दे पर रिलीज हो गई है। राम चरण की इस फिल्म काफी लंबे समय से इंताजर किया जा रहा था। बुची बाबू सना द्वारा डायरेक्टेड स्पोर्ट्स ड्रामा है, जो एक रियल पर्सन पेड्डी की जिंदगी से इंस्पायर्ड है। फिल्म में राम चरण के साथ जाह्नवी कपूर, शिवराज कुमार, बोमन इरानी, दिव्येंदु, जगपति बाबू और रवि किशन जैसे एक्टर्स अहम रोल में हैं। इस फिल्म ने रिलीज होते ही धमाल मचा दिया है। अगर आप भी वीकेंड पर इस फिल्म को देखने का प्लान कर रहे हैं, तो ये रिव्यू आपके काफी काम आने वाला है। इस रिव्यू में हम आपको फिल्म की अच्छाई के साथ-साथ कमी भी बताने वाले हैं।
कहानी 2016 से शुरू होती है। एक स्पोर्ट्स ऑफिशियल (बोमन इरानी) एक रिमोट पहाड़ी गांव जाता है जहां लोग पेड्डी (राम चरण) की कहानी सुनाना चाहते हैं। पेड्डी एक गरीब परिवार से है जो गुड़ के फैक्ट्री में काम करता है और क्रिकेट भी खेलता है। वो लोअर कास्ट होने के बावजूद अपनी स्किल्स से नाम कमाता है लेकिन इस दौरान उसके दुश्मन भी बन है। लोग उसे पहाड़ी तिहाड़ी भी कहते हैं। फिल्म पेड्डी का क्रिकेट करियर, फिर कुश्ती और बाद में रनिंग तक की जर्नी दिखाया गया है। बीच में कास्ट पॉलिटिक्स, गरीबी, ऑप्शन्स और फैमिली स्ट्रगल भी है। स्टोरी चैप्टर्स में बंटी हुई है।
राम चरण इस फिल्म के असली हीरो हैं। उन्होंने पूरी फिल्म अकेले कंधों पर उठा ली है। उनका ट्रांसफॉर्मेशन, कुश्ती के सीन और धोबी पछाड़ वाली इनिंग्स देखने लायक हैं। स्क्रीन पर उनकी एनर्जी और डेडिकेशन साफ दिखता है। कुश्ती के सीन ब्रिलियंट हैं, स्केल बहुत बड़ा है और कास्ट पॉलिटिक्स को अच्छे से हैंडल किया गया है। शिवराज कुमार के साथ वाले पार्ट्स भी कमाल के हैं। दिव्येंदु खलनायक के रोल में बहुत खतरनाक और याद रहने वाला है। गाने विजुअली खूबसूरत हैं। फिल्म आम आदमी की ग्रिट और रेजिलिएंस को सेलिब्रेट करती है। कुछ मोमेंट्स में इमोशंस अच्छे से छू जाते हैं और राम चरण की वजह से बोरियत नहीं होती।
फिल्म काफी प्रेडिक्टेबल है। 3 घंटे 9 मिनट की लंबाई में कई जगह पेस स्लो हो जाता है और कुछ पार्ट्स बिना मतलब के लगते हैं। स्टोरी में लॉजिकल गैप्स और सिली ट्विस्ट्स हैं। हर नया चैप्टर पिछले से डिसकनेक्टेड फील होता है। इमोशंस ज्यादातर एक टोन के हैं, ओपनेशन, गरीबी और मेलोड्रामा बार-बार रिपीट होते हैं। जाह्नवी कपूर का रोल काफी वीक और ऑब्जेक्टिफाइड है। स्क्रिप्ट मीडियोकर है और फिल्म लॉजिक की जगह सिर्फ इमोशंस पर ज्यादा भरोसा करती है।
अब ये सवाल है कि फिल्म देखें या न देखे। अगर आप राम चरण के बड़े फैन हो, स्पोर्ट्स ड्रामा पसंद करते हो और उनकी मेहनत देखना चाहते हो तो फिल्म जरूर देख लो। राम चरण की परफॉर्मेंस और एक्शन सीन के लिए थिएटर जाना वर्थ है।लेकिन अगर आप टाइट, ओरिजिनल और फास्ट पेस्ड स्टोरी वाली फिल्म चाहते हो तो थोड़ा सोच लो। ये काफी फॉर्मूला वाली और प्रेडिक्टेबल है, कुछ पार्ट्स बोरिंग भी लग सकते हैं।