Maa Behen Review: हल्की कहानी में भारी बात कह गईं माधुरी दीक्षित-तृप्ति डिमरी
Madhuri Dixit,Ravi Kishan,Triptii Dimrii,Dharna Durga
Comedy
Jun 4, 20262 hr 36 mins
Maa Behen Review in Hindi: माधुरी दीक्षित और तृप्ति डिमरी स्टारर मां बहन एक हल्की कहानी दर्शकों के सामने लेकर आई है, जिसमें गंभीर बात कही गई है। इसे आप घर बैठकर एन्जॉय कर सकते हैं लेकिन उम्मीदें थोड़ी कम ही रखेंगे तो ज्यादा बेहतर रहेगा।
Maa Behen Review in Hindi: कुछ वक्त पहले रिलीज हुआ माधुरी दीक्षित, तृप्ति डिमरी और धारणा दुर्गा स्टारर मां बहन का ट्रेलर देखकर ऐसा लगा था कि ये हल्की-फुल्की मर्डर मिस्ट्री होने वाली है, जिसमें ये तीनों मिलकर खूब हंसाएंगी लेकिन जैसे ही आप इसे शुरू करते हैं, वैसे ही आपको पता चलता है कि आपने एक हटकर फिल्म के लिए साइन अप किया है, जिसमें गंभीर बातें हल्के-फुल्के अंदाज में समझायी जाएंगी और दमदार परफॉर्मेंसेज देखने को मिलेंगी।
फिल्म मां बहन की कहानी रेखा नाम की एक महिला की है, जिसे समाज सालों से बेइज्जत करता आया है। उसके पड़ोसी उसका मजाक उड़ाते हैं और मोहल्ले के मर्द उस पर गंदी नजर रखते हैं। रेखा दो बेटियों की बिधवा मां है, जो अलग-अलग बापों से पैदा हुई हैं। इन दोनों बहनों की ज्यादा बनती नहीं है और आपस में ये लड़की ही रहती हैं। समाज इन दोनों बहनों का मजाक उड़ाने के लिए अलग-अलग नामों से पुकारता है और इन्हें इनकी सच्चाई भूलने नहीं देता है। हालांकि इन तीनों ने अब इस सच के साथ जीना सीख लिया है लेकिन इनकी जिंदगी में वो रात आती है जो सबकुछ बदल देती है। रेखा अपनी दोनों बेटियों जया और सुषमा से अपने पड़ोसी गुप्ता जी का मर्डर छुपाने में मदद मांगती है।
क्या जया और सुषमा अपनी लड़ाई को दरकिनार करके मां रेखा की मदद करेंगी? और समाज से इज्जत की उम्मीद रखने वाली ये तीनों महिलाएं क्या अपनी बेगुनाही साबित कर पाएंगी? और इस सबमें दर्शकों को कितना मजा आएगा, ये आपको मां-बहन में देखना पड़ेगा।
मां बहन की शुरुआत थोड़ी स्लो है, जिस कारण ये दर्शकों के धैर्य की परीक्षा लेती है। मां बहन का ट्रेलर जितना कमा का था, इसकी शुरुआत उतनी ही निराश करती है। डायरेक्टर ने धीरे-धीरे मां बहन की दुनिया खोली है और दिखाया है कि रेखा, जया और सुषमा अपनी-अपनी जिंदगी में क्या-क्या लड़ाइयां लड़ रही हैं। फर्स्ट हाफ में बहुत ही कम ऐसे मौके हैं जो दिल में उतरते हैं लेकिन इन तीनों की एक्टिंग अच्छी है।
बात अगर सेकेंड हाफ की करें तो यहां से कहानी रफ्तार पकड़ती है और हंसाना शुरू करती है। सेकेंड हाफ ना केवल एंटरटेनिंग है बल्कि ये भी बताता है कि हमारे समाज में महिलाओं को हर रोज कितना जज होना पड़ता है। सालों से लोगों का जजमेंट झेल रहीं रेखा, जया और सुषमा सेकेंड हाफ में समाज के सामने झुकने से मना कर देती हैं और उन्हीं तानों को उनके खिलाफ यूज करती हैं जो उन पर दागे गए हैं। सेकेंड हाफ में कई ऐसे मूमेंट्स हैं, जो दर्शकों के दिलों में रह जाते हैं।
फिल्म में माधुरी दीक्षित एकदम नए अवतार में दिखाई देती हैं और खूब एंटरेटन करती हैं। माधुरी को रेखा के किरदार में देखकर लगता है कि उन्हें अभी एक एक्टर के तौर पर एक्सप्लोर किया जाना बाकी है। तृप्ति डिमरी एनिमल के बाद एक खास इमेज में बंधती दिख रही थीं, जो उन्होंने मां बहन से तोड़ी है। वो कमाल की परफॉर्मर हैं, जो किसी भी स्क्रिप्ट में जान डाल सकती हैं। धारणा दुर्गा माधुरी-तृप्ति जैसी अदाकाराओं के बीच भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा पाती हैं, जो उनके हुनर को दिखाता है। बार रवि किशन की करें तो उन्हें बहुत ही लिमिटेड स्क्रीन स्पेस मिला है और उसमें वो छा जाते हैं।
आखिरी सवाल ये है कि क्या मां बहन को देखने के लिए वक्त निकाला जाना चाहिए या नहीं? तो जवाब है कि ये फिल्म वन टाइम वॉच तो है। माधुरी, तृप्ति और धारणा की अच्छी अदाकारी से सजी मां बहन गंभीर मुद्दा उठाती है और एंटरटेन करती है। फर्स्ट हाफ को अगर थोड़ा इग्नोर कर दिया जाए तो मां बहन दिमाग की मां बहन नहीं करती है बल्कि एंटरटेन करती है।