Image Source: Youtube
rishab shetty,gulshan devaiah,rukumani vasanth
Kantara Chapter 1 Review in Hindi: परंपरा-आस्था और विश्वास की ये कहानी अपने साथ नया मोड लेकर आई है। इस बार कांतारा में भूत कोला क्या हंगामा खड़ा करेगा, यह देखना मजेदार होने वाला है। फिल्म रिलीज हो गई है जिसका दर्शक बेताबी से इंतजार कर रहे थे। अगर आप इसे देखने का प्लान बना रहे हैं तो रिव्यू पढ़ते जाइए।
Kantara Chapter 1 Review in Hindi: ऋषभ शेट्टी( Rishab Shetty) की मोस्ट अवेटेड मूवी कांतारा चैप्टर 1 ( Kantara Chapter 1) रिलीज हो गई है। फिल्म वहीं से शुरू होती है जहां इसका पहला पार्ट खत्म हुआ था। कांतारा की कहानी ने जिस तरह से फैंस के दिलों पर छाप छोड़ी थी। अब इसका दूसरा पार्ट कैसे असर करता है यह जानने के लिए हर कोई बेताब है। फिल्म के ट्रेलर ने स्टोरी के लिए बज क्रीऐट कर दिया था , जिसमें भूत कोला की पारंपरिक कहानी को दिखाया गया है। अब यह कहानी आगे क्या मोड़ लेती है यह देखना दिलचस्प होगा। फिल्म के वीएफएक्स से लेकर इसके रियल सीन्स तक, क्या चीज है खास और क्या बनाती है फिल्म को फीका। आइए आपको बताते हैं कांतारा चैप्टर 1 का रिव्यू
कहानी फिल्म की सबसे दिलचस्प बात यह है कि इसकी कहानी पिछली कड़ी के ठीक बाद से शुरू होती है। शुरुआत में एक बच्चा सवाल पूछता है और उसके जवाब में उसे एक प्राचीन दंतकथा सुनाई जाती है। कहानी कदंब साम्राज्य के दौर की है। एक तरफ ईश्वर का मधुबन है, जहां भगवान शिव के उपासक कांतारा गांव वाले रहते हैं, और दूसरी तरफ राजा विजयेंद्र (जयराम) का बांगरा साम्राज्य। विजयेंद्र के दादा ने कभी मधुबन पर कब्ज़ा करने की कोशिश की थी, लेकिन दैव की शक्ति ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया। इसके बाद से बांगरा राजवंश कांतारा गांव से भयभीत रहने लगा और उन्हें यह विश्वास हो गया कि वहां कोई ब्रह्मराक्षस वास करता है। इसी डर के चलते सालों तक बांगरा साम्राज्य का कोई भी व्यक्ति कांतारा की सीमा में नहीं गया।
बाद में, जब विजयेंद्र ने अपने बेटे कुलशेखर (गुलशन देवैया) को गद्दी सौंपी, तो उसने कांतारा में प्रवेश करने की कोशिश की। इसके जवाब में कांतारा का रक्षक बेर्मे (ऋषभ शेट्टी) भी बांगरा साम्राज्य में घुसपैठ करता है। शुरुआत में सब कुछ शांत दिखाई देता है, लेकिन हालात तब बिगड़ जाते हैं जब कुलशेखर जबरन कांतारा में घुसकर वहां के लोगों की हत्या कर देता है और उनके घर जला देता है। इस अत्याचार से दैव क्रोधित हो जाते हैं और यहीं से असली संघर्ष की शुरुआत होती है।
अभिनय और किरदार
ऋषभ शेट्टी ने अपने अभिनय और निर्देशन दोनों में ही कम-उच्च क्षण दिखाए हैं। विशेष रूप से क्लाइमेक्स और दूसरी-छमाही (second half) में उनकी मौजूदगी भारी महसूस होती है। रुक्मिणी वसंत (Rukmini Vasanth) भी अपनी भूमिका में मजबूती से खड़ी हुई हैं। Gulshan Devaiah, Jayaram आदि का काम भी कहानी की बनावट को सहारा देता है।
फिल्म की सिनेमैटोग्राफी, जंगलों की लोकेशन, कलर टोन, लाइटिंग, VFX आदि चीजें कमाल की है। देखकर लग रहा है कि जंगल की वास्तविक लोकेशन पर शूटिंग हुई है, वातावरण की गहराई और प्राकृतिक सौंदर्य ने फिल्म को अनोखा बनाया है। शानदार विजुअल्स के साथ थिएटर में फिल्म को देखना दिलचस्प है। इसे बड़ी स्क्रीन पर देखने का कुछ अलग ही अनुभव है।