फिल्म दृश्यम 3 का रिव्यू (Image Source: Drishyam 3 Movie)
Drishyam 3 Full Movie Review: मोहनलाल की फिल्म दृश्यम 3 रिलीज हो गई है। आप भी इस फिल्म को देखने की प्लानिंग बना रहे हैं तो ये रिव्यू आपके काफी काम आने वाला है। तो चलिए जानते हैं कि फिल्म दृश्यम 3 में क्या खास है।
Drishyam 3 Full Movie Review: साउथ के जाने-माने स्टार मोहनलाल की फिल्म दृश्यम 3 आज यानी 21 मई को रिलीज हो गई है। मोहनलाल फिर से जॉर्जकुट्टी के रोल में हैं और जिथू जोसेफ डायरेक्टर और राइटर हैं। फिल्म का रनटाइम करीब 2 घंटे 38 मिनट है। इसमें मोहनलाल के साथ मीना, अंसिबा हसन, एस्थर अनिल, अशा शरत, कलबवन शाजॉन अहम रोल में हैं। इस फिल्म का काफी दिनों से इंतजार किया जा रहा था। अगर आप भी इस फिल्म को देखने के तैयारी कर रहे हैं, तो ये रिव्यू आपके काफी काम आने वाला है। इस खबर में हम आपको फिल्म के हर एक पहलू के बारे में बताने वाले हैं।
कहानी जॉर्जकुट्टी और उसके परिवार के चार-पांच साल बाद की है। जॉर्जकुट्टी अपनी पहली फिल्म प्रोड्यूस करके सेलिब्रेट कर रहा है, जो उसके परिवार की असली घटनाओं पर बेस्ड है। सब कुछ नॉर्मल लग रहा है लेकिन अचानक नई मुश्किलें शुरू हो जाती हैं। एक जर्नलिस्ट वरुण के केस पर डॉक्यूमेंट्री बनाने लगता है और पुराना मामला फिर से खुलने लगता है। जॉर्जकुट्टी को फिर से अपने परिवार को बचाने के लिए प्लान बनाना पड़ता है। फिल्म स्लो बर्नर स्टाइल में आगे बढ़ती है और सेकंड हाफ में माइंड-बेंडिंग ट्विस्ट्स आते हैं।
मोहनलाल इस फिल्म के सबसे बड़े हीरो हैं। वो वल्नरेबल दिखते हैं लेकिन हर पल अगला मूव कैलकुलेट करते रहते हैं। उनकी बॉडी लैंग्वेज और आंखों से इंटेंसिटी निकलती है। जिथू जोसेफ ने स्लो बर्नर बनाया है जो कैरेक्टर्स को अच्छे से दिखाता है। सेकंड हाफ में भरपूर सस्पेंस है। जॉर्जकुट्टी अब अमीर होकर भी अपनी जड़ों से जुड़ा दिखता है। मीना पत्नी के रोल में फिल्म में एक नई जान डाल देती हैं। एस्थर अनिल की कॉमिक टाइमिंग भी कमाल की है। कुछ सीन में ट्विस्ट्स काफी धांसू है, जो आपको कुर्सी से हिलने नहीं देंगे।
फिल्म काफी स्लो है, खासकर फर्स्ट हाफ में। कई लोग बोर भी हो सकते हैं क्योंकि असली एक्शन और ट्विस्ट्स सेकंड हाफ में आते हैं। कुछ ट्विस्ट्स फोर्स्ड लगते हैं और स्टोरी को अनलिमिटेड चलाने के लिए बनाए गए महसूस होते हैं। जर्नलिस्ट वाला हिस्सा थोड़ा वीक और कम लॉजिक वाला है। गीता प्रभाकर का स्ट्रॉन्ग इम्पैक्ट इस बार मिसिंग है। फिल्म कभी-कभी फ्यूचर पार्ट्स सेटअप करने लगती है बजाय स्टैंडअलोन अच्छी कहानी देने के।
अगर आप दृश्यम फिल्म सीरीज के फैन है, मोहनलाल की एक्टिंग पसंद करते है और स्लो बर्नर थ्रिलर्स में मजा आता है तो जरूर देखे। फिल्म फ्रैंचाइजी को आगे ले जाती है और कुछ अच्छे ट्विस्ट्स के साथ एंटरटेन करती है। थिएटर में बड़े स्क्रीन पर देखने लायक है, खासकर मोहनलाल के फैंस के लिए। लेकिन अगर आपको पहली दो फिल्मों जैसी टाइट और ब्रिलियंट थ्रिलर चाहिए या स्लो पेस पसंद नहीं तो थोड़ा सोचकर जाना होगा। ये पिछले पार्ट्स जितनी शानदार नहीं है लेकिन फिर भी ठीक-ठाक है।