बंदर मूवी का रिव्यू (pic credit-bandar movie)
Bobby deol,Saba Azad
andar Movie Review: Bandar Movie Review: 'एनिमल' और 'आश्रम' के बाद बॉबी देओल एक बार फिर अलग अंदाज में लौटे हैं। अनुराग कश्यप के निर्देशन में बनी 'बंदर' एक डार्क और गंभीर फिल्म है। अनुराग कश्यप की इस डार्क दुनिया में बॉबी देओल कितना प्रभाव छोड़ पाए हैं, आइए जानते हैं इस रिव्यू में...
Bandar Movie Review: बीते कुछ सालों में बॉबी देओल (Bobby Deol) ने अपने करियर को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। साल 2023 में रिलीज हुई फिल्म 'एनिमल' में उनके दमदार अभिनय ने दर्शकों का खूब ध्यान खींचा। इस फिल्म ने उनके करियर को नई रफ्तार दी। वहीं, वेब सीरीज 'आश्रम' ने उन्हें ओटीटी की दुनिया का बड़ा सितारा बना दिया। अब बॉबी देओल अपने कंफर्ट जोन से बाहर निकलकर एक बिल्कुल अलग तरह की फिल्म 'बंदर' (Bandar) लेकर आए हैं। अनुराग कश्यप के निर्देशन में बनी यह फिल्म आज सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। अनुराग कश्यप की इस डार्क और चुनौतीपूर्ण दुनिया में बॉबी देओल कितना प्रभाव छोड़ पाए हैं, आइए जानते हैं इस रिव्यू में। (टाइम्स नाव नवभारत पर ये भी पढ़ें-एक्टिंग देख लोगों ने लॉर्ड बॉबी को किया सलाम, कमजोर स्क्रीनप्ले ने किया निराश)
अनुराग कश्यप की फिल्म 'बंदर' एक बेहद गंभीर और परेशान करने वाली कहानी पेश करती है। ये फिल्म समाज, कानून और न्याय व्यवस्था के उन पहलुओं को दिखाती है, जिनपर लोग कम बात करते हैं। फिल्म को देखकर कहा जा सकता है कि अनुराग कश्यप एक बार फिर उसी तरह के सिनेमा में लौटे हैं, जिसके लिए उन्हें जाना जाता है। फिल्म की कहानी समर मेहरा (बॉबी देओल) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो कभी टीवी की दुनिया का बड़ा चेहरा हुआ करता था। लेकिन समय के साथ उसकी लोकप्रियता कम हो गई है और अब वह अपने करियर को बचाने के लिए संघर्ष कर रहा है। समर अपनी गर्लफ्रेंड खुशी (सबा आजाद) को हमेशा यह भरोसा दिलाता रहता है कि उसे जल्द ही कोई बड़ा प्रोजेक्ट मिलने वाला है। हालांकि, सच्चाई यह है कि वो आर्थिक परेशानियों और कई निजी समस्याओं से जूझ रहा है। समर की जिंदगी तब पूरी तरह बदल जाती है, जब पुलिस अचानक उसे गिरफ्तार कर लेती है। उस पर उसकी एक्स गर्लफ्रेंड गायत्री (सपना पब्बी) द्वारा गंभीर आरोप लगाए जाते हैं। पुलिस मामले को दबाने के बदले उससे बड़ी रकम मांगती है, लेकिन खुद को निर्दोष मानने वाला समर इसके लिए तैयार नहीं होता। इसके बाद उसे जेल भेज दिया जाता है। इसके बाद जो होता है वो आपके रोंगटे खड़े कर देगा। पूरी बात जानने के लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी।
वैसे तो बॉबी देओल शुरू से ही जबरदस्त एक्टर रहे हैं, लेकिन उनको मौका कम मिला। इन दिनों उन्हें अच्छी कहानियां मिली है तो उनकी एक्टिंग भी सुपर से ऊपर रही है। बात करें फिल्म बंदर की तो बॉबी देओल को देखकर आप दंग रह जाएंगे। उनकी एक्टिंग आपको हिलाकर रख देगी। फिल्म बंदर में उन्होंने समर के दर्द, डर और बेबसी को बहुत अच्छे से पर्दे पर उतारा है। उनका अभिनय फिल्म की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरता है। सपना पब्बी ने गायत्री के किरदार में शानदार काम किया है। वहीं सान्या मल्होत्रा को सीमित स्क्रीन टाइम मिला है, लेकिन वह अपनी मौजूदगी दर्ज कराने में सफल रहती हैं। सबा आजाद भी अपने किरदार में अच्छी लगती हैं।
फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसकी कहानी है, जो दर्शकों को शुरू से आखिर तक सोचने पर मजबूर करती है। फिल्म बार-बार यह सवाल उठाती है कि आखिर सच में पीड़ित कौन है और दोषी कौन। साथ ही यह भी दिखाती है कि कई बार समाज और कानून हर व्यक्ति के साथ एक जैसा व्यवहार नहीं करते। फिल्म का टाइटल 'बंदर' शुरुआत में थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, इसका मतलब साफ होने लगता है। समर के किरदार में बॉबी देओल एक ऐसे इंसान बन जाते हैं, जिसे सिस्टम, कानून, समाज और उसकी एक्स गर्लफ्रेंड अपनी मर्जी से इधर-उधर घुमाते नजर आते हैं। वह मानो एक ऐसे बंदर की तरह बन जाता है, जो दूसरों के इशारों पर नाचने को मजबूर है। फिल्म के जेल वाले सीन्स सबसे ज्यादा असर छोड़ते हैं। जेल के अंदर समर को कई तरह की परेशानियों और अत्याचारों का सामना करना पड़ता है।
'बंदर' हर तरीके से बेस्ट साबित होती है लेकिन इसकी सबसे बड़ी कमजोरी इसकी धीमी रफ्तार है। फिल्म लंबे समय तक एक ही माहौल और मुद्दे के आसपास घूमती रहती है, जिससे कई जगह कहानी खिंची हुई महसूस होती है। जेल वाले सीन्स काफी प्रभावशाली हैं, लेकिन ये हिस्से जरूरत से ज्यादा लंबे लगते हैं। समर और गायत्री की कहानी जेल के परेशान करने वाले माहौल के बीच थोड़ी राहत देती है, लेकिन यह रिश्ता भी काफी जल्दी-जल्दी दिखाया गया है। अगर आपको डार्क कहानी और बॉबी देओल की एक्टिंग की पसंद है तो ये मूवी आपके लिए परफेक्ट है। इसे टाइम्स नाव नवभारत 3.5 स्टार देता है।