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Bastar: The Naxal Story Review: नक्सलियों से प्रभावित आदिवासी महिलाओं की व्यथा और दर्द दिखाती है बस्तर द नक्सल स्टोरी

Shashank PandeyUpdated Mar 15 2024, 12:42 IST

Bastar: The Naxal Story Review: अदा शर्मा स्टारर फिल्म बस्तर द नक्सल स्टोरी सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। इस फिल्म में छत्तीसगढ़ और वहां की महिलाओं के दर्द को दिखाया गया है। पढ़िए यह रिव्यू और देखिए फिल्म।

महिलाओं और मांओं की व्यथा

साल 2000 में मध्य प्रदेश से अलग होकर एक नया राज्य बना। नाम छत्तीसगढ़, यह प्रदेश आदिवासी बाहुल्य है। जंगल यहां बहुत हैं और उतना की खनिज पदार्थ भी यहां रहा। इसके साथ ही यहां नक्सलियों और माओवादियों का भी आतंक शुरू हो गया। इससे बस्तर और उससे सटे इलाकों के आदिवासी परेशान होते। उनका यह कहना होता कि नक्सलियों से बात करो तो पुलिस उन्हें माओवादी समझ मार देती। अगर पुलिस से बात करो नक्सली मुखबिर समझ कर मार देते। बस्तर को नक्सलियों से मुक्त कराने का बीड़ा IPS नीरजा माधवन लेती है। वह चाहती है कि बस्तर में विकास हो और वहां के बच्चे स्कूलों में पढ़ने जाएं। हालांकि उसपर कई आरोप लगे हैं कि वह फर्जी एनकाउंटर कर मासूम आदिवासियों को मार रही हैं। एक दिन एक आदिवासी टीचर एक दिन अपने स्कूल में तिरंगा लहरता है। इस दौरान स्कूल में उसके परिवार के साथ गांव के लोग मौजूद रहते हैं। स्कूल में नक्सलियों की आमद होती है और वह सबको उठा कर अपने बेस ले जाते हैं। इसके बाद नक्सलियों की जन अदालत लगती है, जिसमें उसके पति को काट दिया जाता है। दूसरी तरफ राज्य के एक नेता जो अब सामाजिक कार्यकर्ता बन गए हैं, वह पुलिस के साथ मिलकर सलवा जुडूम आंदोलन चला रहे हैं। इससे नक्सली खफा थे और वह नीरजा और नेता कर्मा को इसकी सजा देना चाहते थे। कई बार नक्सलियों और माओवादियों के निशाने में अर्द्ध सैनिक बल के बेस भी आए। एक 76 जवानों की नक्सलियों ने हत्या भी की। बस्तर द नक्सल स्टोरी बस्तर की इन्हीं कहानियों को दिखाती है।