EXCLUSIVE: फातिमा ने लोगों को बताया 'फेमिनिज्म' का मतलब, कहा- 'फेमिनिस्ट होना मर्दों को कोसना नहीं बल्कि...'

  • Authored by: अभय
  • Updated Nov 20, 2025, 07:21 AM IST

Fatima Sana Shaikh Zoom Interview: बॉलीवुड एक्ट्रेस फातिमा सना शेख (Fatima Sana Shaikh) का फिल्म गुस्ताख इश्क (Gustaakh Ishq) की रिलीज से पहले एक इंटरव्यू सामने आया है, जो उन्होंने Zoom को दिया है। इस इंटरव्यू के दौरान एक्ट्रेस फातिमा सना शेख ने फेमिनिज्म के मुद्दे पर खुलकर बात की।

Fatima Sana Shaikh Zoom Interview: बॉलीवुड की जानी-मानी एक्ट्रेस फातिमा सना शेख (Fatima Sana Shaikh) इन दिनों अपनी अपकमिंग फिल्म गुस्ताख इश्क (Gustaakh Ishq) को लेकर चर्चा में बनी हुई है। फातिमा सना शेख की इस फिल्म से जुड़े एक के बाद एक अपडेट सामने आ रहे हैं। जो फैंस को फिल्म की रिलीज के लिए बेताब कर रहे हैं। इन सब के बीच फातिमा सना शेख ने Zoom को अपनी इस फिल्म की रिलीज से पहले इंटरव्यू दिया है। इस इंटरव्यू के दौरान फातिमा सना शेख ने कई मुद्दों पर बात की, जिसने लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींच लिया। तो चलिए जानते हैं फातिमा सना शेख ने इस इंटरव्यू के दौरान क्या-क्या बोला है।

Fatima Sana Shaikh Zoom Interview

Image Source: Zoom Youtube

फातिमा सना शेख ने फेमिनिज्म को लेकर कही ये बात

एक्ट्रेस फातिमा सना शेख एक बार फिर से खबरों में आ गई है, इसकी वजह Zoom को दिया इंटरव्यू है, जो खूब वायरल हो रहा है। इस इंटरव्यू के दौरान फातिमा सना शेख ने फेमिनिज्म के मुद्दे पर खुलकर बात की। फातिमा सना शेख ने कहा कि 'फेमिनिस्ट होना मतलब मेल-बैशिंग नहीं, बल्कि जेंडर इक्वालिटी का साथ देना है। हम अक्सर सोचते हैं कि सिर्फ औरतें ही ऐसे सीन लिख सकती हैं (धाक धाक के सीन जैसे), लेकिन ये तो मर्द डायरेक्टर (तरुण दुदेजा) ने लिखे थे। वो बहुत फेमिनिस्ट मैन हैं। फेमिनिस्ट होने का मतलब ये नहीं कि तुम मेल-बैशिंग वुमन हो।' फातिमा ने आगे कहा कि ज्यादातर मर्द फेमिनिज्म से तुरंत दूरी बना लेते हैं, ऐसा नहीं कि वो इसके बेसिक प्रिंसिपल्स से सहमत नहीं, बल्कि उन्हें समझ ही नहीं आता। एक्ट्रेस ने बताया कि 'अभी जैसे कुछ मीम्स चल रहे थे कि कोई लड़का जाकर लड़कों से पूछता है क्या आप फेमिनिस्ट हो? जवाब आता है, ‘नहीं-नहीं, मैं फेमिनिस्ट नहीं हूं।’ अरे तो बोलो आप क्या हो? ‘बस नहीं, हम फेमिनिस्ट नहीं हैं।’ तो बात बस इतनी-सी है कि लोग उस शब्द का मतलब ही समझने नहीं लगे। इतना सिंपल है।' अंत में कहा कि 'ये जजमेंट वाली बात नहीं है कि औरतें ही औरतों को जज करती हैं। ये जो स्टीरियोटाइप्स हैं कि औरत ही औरत की दुश्मन होती है।'

End of Feed