Deoria Lok Sabha Seat Election: लोकसभा चुनाव में अब चंद दिन ही बचे हैं। बीजेपी यूपी में लगभग आधे से अधिक सीटों पर प्रत्याशी का ऐलान कर चुकी है। बाकी बचे उम्मीदवारों के नाम पर मंथन किया जा रहा है। बीजेपी यूपी की अगली लिस्ट कभी भी जारी कर सकती है। इस बीच कई मौजूदा सांसदों की सांसे अटकी हुई हैं। बताया जा रहा है कि वर्तमान सांसदों के टिकट बीजेपी पुनर्विचार कर सकती है।
क्या देवरिया के सांसद का कटेगा टिकट?
क्या देवरिया के सांसद का कटने वाला है टिकट?
इसमें देवरिया लोकसभा सीट भी शामिल है। सूत्रों के मुताबिक देवरिया से बीजेपी सांसद रमापति राम त्रिपाठी (Ramapati Ram Tripathi) पर भी संशय है। एक सर्वेक्षण में भी इस बात पर मुहर लगती दिख रही है। भारत के प्रतिष्ठित चुनाव पूर्वानुमान और सर्वेक्षण मंच, जनता का मूड (Janta Ka Mood) के एक सर्वेक्षण से पता चला है कि सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी का उत्तर प्रदेश के गढ़ माने जाने वाले देवरिया निर्वाचन क्षेत्र में मतदाताओं में भारी असंतोष है।
सर्वे में बढ़ी सांसद रमापति राम त्रिपाठी की मुश्किलें
जनता का मूड उन प्रमुख निर्वाचन क्षेत्रों का एक अनूठा सर्वेक्षण कर रहा है जिन्हें उसने मौजूदा संसद सदस्यों के लिए कमजोर स्थानों के रूप में पहचाना है। देवरिया में सर्वे से पता चलता है कि यहां के मतदाता मौजूदा सांसद रमापति राम त्रिपाठी से नाखुश हैं। एक रिपोर्ट में ये बताया गया है कि सर्वे के लिए जनता का मूड ने क्षेत्र के करीब 9000 मतदाताओं से बात की।
मतदाताओं के बीच नाखुशी का मुख्य कारण यह है कि त्रिपाठी को निर्वाचन क्षेत्र में एक बाहरी व्यक्ति माना जाता है और मतदाताओं को लगता है कि उन्हें सिर्फ इसलिए टिकट दिया गया था क्योंकि भाजपा को लगता था कि यह एक ऐसी सीट थी जहां मतदाता पार्टी के प्रति वफादार थे। इससे निर्वाचन क्षेत्र में पार्टी कार्यकर्ता भी हतोत्साहित हो गए हैं, क्योंकि उनका मौजूदा सांसद से बहुत कम जुड़ाव है। इस हद तक कि अगले महीने होने वाले चुनाव में किसी बाहरी व्यक्ति के देवरिया से चुनाव लड़ने पर निष्ठा बदलने की चर्चा निर्वाचन क्षेत्र में होने लगी है।
देवरिया से किसे उम्मीदवार बना सकती है भाजपा?
निर्वाचन क्षेत्र के, "भास्कर सिंह" (Bhaskar Singh) संस्थापक, जनता का मूड ने बताया कि हमारी टीम से मतदाताओं ने कहा, 'अगर इस बार किसी बाहरी व्यक्ति को चुनाव लड़ने के लिए उतारा जाए तो देवरिया में मतदाता अन्य दलों को वोट देने पर विचार कर रहे हैं। जनता का मूड के जिन मतदाताओं से बात की गई, उन्होंने पहुंच न होने और विकास की कमी को अपने असंतोष के प्रमुख कारकों के रूप में बताया।'
