First General Election: हालांकि अभी लोकसभा चुनाव 2024 (Lok Sabha Election 2024) की तारीखों का ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन विभिन्न दलों ने इसकी तैयारियां शुरू कर दी हैं। जहां एक तरफ पीएम नरेंद्र मोदी धुआंधार नई योजनाओं का श्रीगणेश कर रहे हैं और जनसभाओं में बीजेपी सरकार की उपलब्धियां लोगों को बता रहे हैं। वहीं, कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों का इंडिया गठबंधन एनडीए और बीजेपी को चुनौती देने की पुरजोर कोशिश में है। राहुल गांधी भारत जोड़ो न्याय यात्रा के जरिए गठबंधन के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिशों में जुटे हैं।
कैसा रहा था देश का पहला चुनाव
आजाद भारत में पहला चुनाव कैसा था
यही चुनाव देश का 18वां लोकसभा चुनाव होगा। इस चुनाव की गहमागहमी के बीच आइए जान लेते हैं देश में हुए पहले चुनाव का इतिहास। क्या आपको पता है आजाद भारत में पहला चुनाव कैसा रहा था। इसके क्या नतीजे रहे थे और किस पार्टी ने कितनी सीटें हासिल की थी। आजाद भारत का पहला चुनाव होने के कारण यह चुनाव अपने आप में बेहद अहम था। चुनाव आयोग के सामने कई चुनौतियां थीं। इसी पर आपको हर जानकारी दे रहे हैं।
पहला आम चुनाव चार महीने तक चला था
चुनाव आयोग के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि कैसे लोगों को वोट देने के लिए जागरुक कैसे किया जाए। 1950 में संविधान लागू होने के बाद 1951-52 में देश में पहला आम चुनाव हुआ था। चुनाव की शुरुआत 25 अक्टूबर 1951 को हुई और 21 फरवरी 1952 को चुनाव खत्म हुआ। यानी पहला आम चुनाव चार महीने तक चला था। देश के इस पहले आम चुनाव में 14 राष्ट्रीय पार्टियां, 39 क्षेत्रीय पार्टियां मैदान में उतरी थीं। तब 489 लोकसभा सीट के लिए 17.3 करोड़ वोटर थे, लेकिन सिर्फ 44 प्रतिशत लोगों ने ही मतदान किया था। राष्ट्रीय पार्टियों में मुख्य तौर पर कांग्रेस, सीपीआई, भारतीय जनसंघ जैसी पार्टियां मैदान में थीं।
कांग्रेस ने किया सूपड़ा साफ
इस चुनाव में कांग्रेस ने बाकी दलों का सूपड़ा साफ कर दिया था। कांग्रेस और बाकी दलों के बीच सीटों का बहुत बड़ा फासला था। लोकसभा की 489 सीटों में से 364 कांग्रेस के खाते में आई थीं और उसने पूर्ण बहुमत हासिल किया था। सीपीआई दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और उसे 16 सीटें मिली थी। जबकि एसपी को 12 और भारतीय जनसंघ ने 3 सीटें जीती थीं।
दिलचस्प तथ्य
खास बात ये है कि देश के पहले चुनाव में मतदान करने की उम्र 18 साल नहीं बल्कि 21 साल थी। तब सुकुमार सेन देश के मुख्य चुनाव आयुक्त थे। उस वक्त चुनाव आयोग को कई बड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। चुनाव बैलेट पर हुआ था। चुनाव आयोग ने कुल ढाई लाख मतदान केंद्र बनवाए थे। चुनाव आयोग ने मतदान के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए नुक्कड़ नाटक कराए थे।
