बेंगलुरु कैफे ब्लास्ट आरोपियों की गिरफ्तारी पर सियासत, ममता ने बताया BJP का प्रोपगैंडा, पार्टी ने किया पलटवार

  • Authored by: अमित कुमार मंडल
  • Updated Apr 12, 2024, 05:16 PM IST

Bengaluru Cafe Blast case: एनआईए ने रामेश्वरम कैफे विस्फोट में दो मुख्य संदिग्धों को मुसाविर हुसैन शाजिब और साथी अब्दुल मतीन अहमद ताहा को कोलकाता से हिरासत में लिया।

Mamata vs BJP: बेंगलुरु कैफे विस्फोट मामले में दो आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर पश्चिम बंगाल में राजनीतिक घमासान छिड़ गया है। आरोपी मुसाविर हुसैन शाजिब और अब्दुल मतीन ताहा राज्य के पूर्वी मिदनापुर जिले के कांथी के रहने वाले हैं। दोनों को एनआईए ने शुक्रवार को कोलकाता से गिरफ्तार किया। इसे लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भारतीय जनता पार्टी पर हमला बोला है। कूच बिहार में एक चुनावी रैली में ममता ने कहा, उनके पास एक प्रचार विशेषज्ञ है। ये धमाका बेंगलुरु में हुआ। यहां तक कि आरोपी व्यक्ति भी कर्नाटक के रहने वाले हैं। वे बंगाल से नहीं हैं। वे दो घंटे तक बंगाल में छिपे रहे और हमारी पुलिस ने उन्हें दो घंटे में पकड़ लिया। उन्होंने उन बयानों का जिक्र किया कि बंगाल असुरक्षित है और सवाल किया कि क्या दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और बिहार सुरक्षित हैं।

Mamata Banerjee

ममता बनर्जी

बीजेपी ने बोला ममता सरकार पर हमला

वहीं, राष्ट्रीय जांच एजेंसी द्वारा आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद बीजेपी ने ममता बनर्जी सरकार पर हमला बोला है। बीजेपी के बंगाल सह-प्रभारी अमित मालवीय ने एक्स पर कहा, एनआईए ने रामेश्वरम कैफे विस्फोट में दो मुख्य संदिग्धों को मुसाविर हुसैन शाजिब और साथी अब्दुल मतीन अहमद ताहा को कोलकाता से हिरासत में लिया। दोनों संभवतः कर्नाटक के शिवमोग्गा में आईएसआईएस सेल से संबंधित हैं। दुर्भाग्य से ममता बनर्जी के नेतृत्व में पश्चिम बंगाल आतंकवादियों के लिए एक सुरक्षित पनाहगाह बन गया है।

बंगाल पुलिस ने मालवीय के दावे का किया खंडन

हांलांकि, पोस्ट के वायरल होने पर पश्चिम बंगाल पुलिस ने एक बयान जारी कर मालवीय की टिप्पणियों का खंडन किया। पुलिस की ओर से कहा गया, अमित मालवीय के दावों के विपरीत तथ्य यह है कि पश्चिम बंगाल पुलिस और केंद्रीय खुफिया एजेंसियों के संयुक्त अभियान में रामेश्वरम कैफे विस्फोट मामले में दो संदिग्धों को पूर्व मेदिनीपुर से गिरफ्तार किया गया। इस मामले में बंगाल पुलिस की भूमिका को केंद्रीय एजेंसियों ने आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया है। पश्चिम बंगाल कभी भी आतंकवादियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह नहीं रहा है और राज्य पुलिस अपने लोगों को सुरक्षित रखने के लिए हमेशा सतर्क रहती है।

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