Lok Sabha Election 2024: लोकसभा चुनाव 2024 की रणभेरी बज चुकी है। 19 अप्रैल से वोटिंग शुरू हो जाएगी और इसी के साथ सियासत के महासमर की भी शुरुआत होगी। पूरे लोकसभा चुनाव में सभी दलों की नजर अगर किसी राज्य पर है, तो वह है उत्तर प्रदेश। भारतीय जनता पार्टी (BJP) को अपने 370 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए उत्तर प्रदेश की 80 में से 80 सीटें जीतनी होंगी। हालांकि, बीजेपी के लिए लक्ष्य इतना आसान नहीं है, क्योंकि इस बार यूपी के चुनावी नतीजे चौंका सकते हैं।
अखिलेश यादव
उत्तर प्रदेश के मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने एक बार फिर सियासी एक्सपेरीमेंट किया है। इस बार उन्होंने बसपा के बजाय इंडिया गठबंधन के तहत कांग्रेस पार्टी से गठबंधन किया है। इसके तहत सपा उत्तर प्रदेश की 80 में से 62 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी जबकि कांग्रेस 17 सीटों पर प्रत्याशी उतारेगी। सपा ने भदोही की सीट इंडिया गठबंधन के तहत तृणमूल कांग्रेस को दी है। दूसरी तरफ बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती ने सभी लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है।
हर चुनाव में सपा का नया प्रयोग
समाजवादी पार्टी पिछले कुछ चुनावों से लगातार गठबंधन करती आ रही है। साल 2017 के विधानसभा चुनाव में सपा ने कांग्रेस और राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के साथ गठबंधन करके लड़ा था। इसके बाद साल 2019 का लोकसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और रालोद के साथ गठबंधन किया। 2022 का विधानसभा चुनाव सपा ने रालोद, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी, अपना दल कमेरावादी तथा कुछ अन्य दलों के साथ गठबंधन करके लड़ा था।
कैसी रही गठबंधन की राजनीति
लोकसभा चुनावों की बात करें तो 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा और उसके सहयोगी दलों ने राज्य की 80 लोकसभा सीटों में से 73 पर जीत हासिल की थी। हालांकि, 2019 में सपा, बसपा और रालोद के इस गठजोड़ ने पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों में कुछ सीटों पर भाजपा को टक्कर दी थी, लेकिन वह कोई बड़ा प्रभाव डालने में विफल रहा था। बसपा को 10 और सपा को पांच सीटों पर कामयाबी मिली थी जबकि रालोद का खाता नहीं खुल सका था। नतीजा यह हुआ कि भाजपा को नुकसान हुआ और उसे 62 सीटें ही मिल सकीं, जबकि उसके सहयोगी अपना दल (सोनेलाल) को दो सीटों पर कामयाबी हासिल हुई थी।
पश्चिमी क्षेत्र: उत्तर प्रदेश में 2019 के लोकसभा चुनाव पर क्षेत्रवार नजर डालें तो भाजपा को सबसे ज्यादा 23 सीटें राज्य के पश्चिमी हिस्से से मिली थीं। बसपा ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सहारनपुर, बिजनौर, अमरोहा और नगीना (एससी) सीटें जीती थीं जबकि सपा संभल, मुरादाबाद, मैनपुरी और रामपुर में विजयी हुई।
मध्य क्षेत्र: मध्य क्षेत्र में अमेठी और रायबरेली प्रमुख संसदीय क्षेत्र हैं। दोनों लंबे समय से कांग्रेस के गढ़ माने जाते रहे हैं। साल 2019 में पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने अपनी रायबरेली सीट बरकरार रखी थी लेकिन उनके बेटे राहुल गांधी अमेठी सीट केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी से हार गए थे। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह लखनऊ से जीते थे। बसपा ने मध्य क्षेत्र से अंबेडकर नगर के रूप में केवल एक सीट जीती थी। भाजपा ने इस क्षेत्र से 13 सीटें जीती थीं, जिसमें प्रतिष्ठित फैजाबाद लोकसभा सीट भी शामिल है।
पूर्वी क्षेत्र: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का संसदीय क्षेत्र वाराणसी राज्य के पूर्वी हिस्से की 30 सीटों में शामिल है। साल 2019 के लोकसभा चुनाव में इस क्षेत्र से बसपा ने पांच सीटें जीतीं थीं जबकि सपा ने आजमगढ़ के रूप में एक सीट और भाजपा के सहयोगी अपना दल (सोनेलाल) ने दो सीटें जीती थीं।
बुन्देलखण्ड क्षेत्र: साल 2019 में बुन्देलखण्ड क्षेत्र में भाजपा की जीत हुई थी। उसे झांसी, बांदा, हमीरपुर और जालौन-एससी की सभी चार लोकसभा सीटों पर कामयाबी मिली थी।
