Ajit Pawar vs Sharad Pawar: राजनीति में राज करने के लिए सबसे सटीक नीति का इस्तेमाल करने वाले को ही राजनीति का चाणक्य कहते हैं। चाचा-भतीजे की जंग में एक बार फिर भतीजे अजित पवार अपना दम दिखाते नजर आ रहे हैं। लोकसभा चुनाव में लगे झटके के बाद अजित की एनसीपी विधानसभा चुनाव में दमदार वापसी करती नजर आ रही है। दोनों पवार में से कौन ज्यादा पावरफुल है इसके बारे में कहने के लिए अब इंतजार की घड़ी खत्म हो रही है। विधानसभा चुनाव के नतीजों से तस्वीर साफ होती दिख रही है कि कौन अधिक शक्तिशाली है।
शरद पवार vs अजित पवार
असली एनसीपी की बागडोर किसके हाथों में?
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजों से अब ये साफ हो जाएगा कि महाराष्ट्र में असली NCP की बागडोर किसके हाथों में है? चाचा और भतीजे की इस लड़ाई में इस बार भतीजे का जलवा देखने को मिल रहा है। तमाम सियासी उठापटक के बीच अजित पवार ने आखिरकार अपने चाचा शरद पवार से बदला लेने की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। अब तक के रुझानों में देखा जा सकता है कि शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) को अजित पवार की एनसपी ने पछाड़ दिया है।
चाचा से बदला लेने की ओर अजित पवार
लोकसभा चुनाव में अजित पवार की पार्टी को तगड़ा झटका लगा था। उस वक्त माना ये जा रहा था कि शरद पवार की पार्टी ही असली एनसपी है। 10 सीटों पर चुनाव लड़कर चाचा की पार्टी ने 8 सीटों पर जीत हासिल की थी। जबकि अजित पवार की एनसीपी के खाते में उस वक्त सिर्फ 1 सीट आई थी। अब महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजे सामने आ रहे हैं। अब तक के रुझानों में देखा जा रहा है कि चाचा को भतीजे ने पटखनी देने का मन बना लिया है।
जब चाचा को भतीजे ने दे दिया था गच्चा
अजित पवार ने न सिर्फ शरद पवार की पार्टी में दो फाड़ किया, बल्कि उनके ज्यादातर विधायक और सांसद को तोड़कर अपने साथ मिला लिया था। चाचा पूरी तरह भौचक्के रह गए थे, शरद पवार के करीबी प्रफुल्ल पटेल और छगन भुजबल जैसे कई नेताओं ने पाला बदल लिया था। भतीजे ने पहले पार्टी तोड़ दी, विधायक और सांसदों को अपने खेमे में शामिल कर लिया, मगर जब लोकसभा चुनाव हुए तो चाचा ने उनसे चुन-चुन कर बदला लिया। अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार तक को हार का मुंह देखना पड़ा, महाराष्ट्र में अजित की एनसीपी को महज एक सीट नसीब हुई। हालांकि अब समय बदल चुका है, विधानसभा चुनाव में भतीजे को हल्के में लेना चाचा को लिए भारी नुकसान झेलने पर मजबूर कर सकता है। इसकी झलक रुझानों में दिख रही है।
इस चुनाव में ये भी तय होना था कि असली एनसीपी की कमान किसके पास है? चुनावी नतीजे इस बात पर मुहर लगा देंगे कि शरद पवार का जलवा अभी बरकरार है या छोटे पवार उनसे आगे निकल चुके हैं। शरद पवार ने 1999 में कांग्रेस से अलग होकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) का गठन किया था। पिछले साल जुलाई में अजित पवार और कुछ अन्य विधायकों के राज्य में शिवसेना-भाजपा सरकार में शामिल होने के बाद राकांपा में विभाजन हो गया था।
