Sitamarhi Assembly Constituency (सीतामढ़ी विधानसभा सीट) : सीतामढ़ी जिले की सीतामढ़ी विधानसभा सीट हाई प्रोफाइल सीट है। इस सीट का सांस्कृतिक महत्व है। पिछले विधानसाभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवार मिथिलेश कुमार ने जीत हासिल की। इस चुनाव में मिथिलेश कुमार को 90236 वोट मिले थे। राजद के उम्मीदवार सुनील कुमार को इस सीट पर कुल 78761 वोट मिले थे। इससे पहले साल 2015 के विधानसभा चुनाव में राजद के सुनील कुमार ने बीजेपी के सुनील कुमार पिंटू को शिकस्त दी थी। साल 2003 से इस सीट पर भाजपा का दबदबा रहा था।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025।
बीते सात चुनावों में 5 बार जीती भाजपा
इस सीट पर भाजपा का दबदबा रहा है क्योंकि पिछले सात चुनावों में भाजपा ने इस सीट पर पांच बार जीत हासिल की है, जबकि आरजेडी ने 2000 और 2015 में दो बार इस सीट पर जीत दर्ज की। मिथिलेश कुमार ने आरजेडी नेता सुनील कुमार को लगभग 11,500 वोटों के अंतर से हराया था। यह सीट सीतामढ़ी लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है और लोकसभा सीट के अंतर्गत आने वाले छह विधानसभा क्षेत्रों में से एक है। 1951 में स्थापना के बाद से, कांग्रेस ने इस सीट पर चार बार जीत दर्ज की। सोशलिस्ट पार्टी ने इस सीट पर दो बार, सीपीआई और जनता दल ने एक-एक बार, आरजेडी ने दो बार, और बीजेपी ने लगभग छह बार जीत दर्ज की है।
1972 में मुजफ्फरपुर से अलग कर एक स्वतंत्र जिला बनाया गया
नेपाल से दो ओर से घिरे सीतामढ़ी को 1972 में मुजफ्फरपुर से अलग कर एक स्वतंत्र जिला बनाया गया था। 2024 तक सीतामढ़ी विधानसभा क्षेत्र में कुल मतदाताओं की संख्या 3,10,237 थी, जिनमें अनुसूचित जाति (SC) के मतदाता 10 प्रतिशत से अधिक और मुस्लिम मतदाता 18.5 प्रतिशत थे। लगभग 75 प्रतिशत ग्रामीण और लगभग 25 प्रतिशत शहरी मतदाता थे। जिले में आठ विधानसभा क्षेत्र हैं। इसमें रीगा, बथनाहा, परिहार, सीतामढ़ी विधानसभा सीट पर भाजपा का तो, रुन्नीसैदपुर व सुरसंड विधानसभा सीट पर जदयू का कब्जा है। यानी छह सीटों पर राजग का कब्जा है। वहीं, बाजपट्टी व बेलसंड विधानसभा सीट पर राजद का कब्जा है।
