Bihar Assembly Elections 2025: विधानसभा चुनाव में बड़े-बड़े दिग्गजों की किस्मत दांव पर है। एक तरफ NDA की ओर से कई दिग्गज ताल ठोंक रहे हैं तो दूसरी तरफ महागठबंधन की तमाम पार्टियों के बड़े नाम भी चुनावी मैदान में हैं। इन दो पक्षों के अलावा कुछ और पक्ष भी हैं, जिसमें असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM, प्रशांत किशोर की जन सुराज और लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप की पार्टी जनशक्ति जनता दल भी मैदान में हैं। लेकिन सारी सीटों को में कुछ ऐसी भी सीटें हैं जहां के उम्मीदवार सुर्खियां बटोरने वाले हैं। ऐसी ही एक सीट है वैशाली जिले की महुआ सीट। राजद की पारंपरिक सीट माने जाने वाली महुआ से इस बार लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव चुनावी मैदान में हैं। आज इस सीट पर वोटिंग चल रही है, जो महुआ का भविष्य तय करेगी।
महुआ सीट पर RJD के लिए चुनौती बने तेज प्रताप यादव
महुआ विधानसभा सीट
बिहार में कुल 243 विधानसभा क्षेत्रों में से एक सीट महुआ की भी है। 126 नंबर की यह विधानसभा सीट वैशाली जिले में है और हाजीपुर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है। पिछले कुछ विधानसभा चुनावों की बात करें तो 2020 के पिछले विधानसभा चुनाव में RJD को यहां से जीत मिली थी और मुकेश कुमार रौशन विधानसभा पहुंचे थे। 2015 के विधानसभा चुनाव में तो तेज प्रताप यादव ने ही RJD की टिकट पर यहां से चुनाव लड़ा और जीते भी थे। तब उन्हें 43.3 फीसद यानी कुल 66927 वोट मिले थे।तब उन्हें 28 हजार 155 वोटों से जीत मिली थी। 2010 के विधानसभा चुनाव में महुआ सीट पर JDU उम्मीदवार रविंद्र राय को यहां से जीत मिली थी। आज, 6 नवंबर को पहले चरण में इस सीट पर मतदान हो रहा है और इसके नतीजे 14 नवंबर को आएंगे।
महुआ विधानसभा सीट से कौन-कौन उम्मीदवार है?
- जनशक्ति जनता दल - तेज प्रताप यादव
- RJD - मुकेश कुमार रौशन
- LJP (RV) - संजय कुमार सिंह
- AIMIM - अमित कुमार (बच्चा राय)
- जन सुराज पार्टी - इंद्रजीत प्रधान
- NCP - अखिलेश कुमार ठाकुर
- BSP - रिमझिम देवी
इस लिस्ट को देखने के बाद कहा जा सकता है कि बिहार की महुआ विधानसभा सीट पर चुनाव जंग जबरदस्त है। खासतौर पर यहां सिर्फ राजनीतिक दलों में ही मुकाबला नहीं है, बल्कि परिवार के बीच भी जबरदस्त मुकाबला देखने को मिल रहा है। साल 2015 में महुआ से RJD की टिकट पर चुनाव जीतने वाले तेज प्रताप यादव ने इस बार अपनी पार्टी बना ली है। वह इस बार जनशक्ति जनता दल के मुखिया के नाते यहां से चुनावी मैदान में हैं। बता दें कि आज दोपहर 11:00 बजे तक वैशाली जिले में 28.67 प्रतिशत वोटिंग हुई है।
घी हमेशा दाल में ही गिरता है
यह कहावत इन दिनों महुआ विधानसभा क्षेत्र के मतदाताओं के बीच काफी चल रही है। RJD समर्थकों का मानना है कि वोट चाहे तेज प्रताप को मिलें या पार्टी के उम्मीदवार मुकेश रौशन को, आखिरकार फायदा RJD को ही होगा। इस कहावत से यह उनका लालू परिवार के प्रति भावनात्मक जुड़ाव के साथ ही RJD की लोकप्रियता भी दिखती है। वैसे बता दें कि RJD के उम्मीदवार मुकेश रौशन यहां से मौजूदा विधायक भी हैं और तेजस्वी यादव के करीबी भी माने जाते हैं। वह लोगों के बीच जाकर कह रहे हैं कि अगर तेजस्वी को मुख्यमंत्री बनाना है तो उन्हें ही वोट करें। आज 2.95 लाख मतदाताओं को तय करना है कि वह इस सीट पर उठे कुल 15 उम्मीदवारों में से किसके वादों पर भरोसा करते हैं और किन अन्य को नकार देते हैं।
महुआ विधानसभा का निर्माण 1951 में हुआ था। 1952, 1957 और 1962 के चुनाव के बाद यह सीट चुनावी मानचित्र से गायब हो गई थी। फिर 1977 में एक बार फिर महुआ विधानसभा सीट अस्तित्व में आई।
महुआ नाम कैसे पड़ा
इस क्षेत्र में जहां-तहां महुआ के पेड़ ही नजर आते हैं। यही कारण है कि इस क्षेत्र का नाम महुआ पड़ गया। यह जिला मुख्यालय हाजीपुर से करीब 25 किमी और राजधानी पटना से 50 किमी दूर है। तिरहुत डिवीजन के मुख्यालय मुजफ्फरपुर से इस क्षेत्र की दूरी करीब 45 किमी है। यह क्षेत्र गंगा नदी का मैदानी इलाका है और कृषि के लिए काफी उपयोगी है। यहां पर गेहूं, धान, मक्का और दालें मुख्य उपज हैं।
साल 2016 में बिहार में शराब बंदी (Dry State) लागू कर दी गई। इससे पहले यह क्षेत्र महुआ आधारित शराब के प्रोडक्शन का केंद्र था। अब महुआ के फूलों से शराब बनाने की बजाय इसके बीजों से स्थानीय स्तर पर तेल निकाला जाता है, जिसे महुआ बटर कहते हैं। महुआ बटर का इस्तेमाल दवाओं और कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स में होता है।
