Fatuha Assembly Election 2025: बिहार की राजनीति में फतुहा विधानसभा सीट उन इलाकों में गिनी जाती है, जहां जातीय समीकरण और सामाजिक संतुलन चुनावी नतीजों को बड़े पैमाने पर प्रभावित करते हैं। यह सीट लंबे समय से राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) का गढ़ मानी जाती है। पार्टी के वरिष्ठ नेता रामानंद यादव लगातार तीन बार यहां से जीत दर्ज कर चुके हैं और इस बार भी वे चौथी बार जीत हासिल करने का दावा कर रहे हैं।
फतुहा विधानसभा चुनाव 2025
वहीं, इस चुनाव में फतुहा सीट लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास पासवान) के खाते में गई है, जिसने रूपा कुमारी को अपना उम्मीदवार बनाया है। दूसरी ओर, आरजेडी फिर से डॉ. रामानंद यादव पर भरोसा जता रही है। फतुहा विधानसभा सीट पर पहले चरण के तहत 6 नवंबर को मतदान होगा, जबकि मतगणना 14 नवंबर को निर्धारित है। बिहार चुनावों की सरगर्मी के बीच यह देखना दिलचस्प होगा कि इस बार फतुहा में जातीय समीकरण किसके पक्ष में जाते हैं और मतदाता किसे अपना प्रतिनिधि चुनते हैं।
सियासत में जातिगत समीकरणों का दबदबा
फतुहा की सियासत में जातिगत समीकरणों का दबदबा साफ तौर पर देखा जा सकता है। इस क्षेत्र की राजनीति काफी हद तक जाति आधारित वोटिंग पैटर्न पर निर्भर रही है। यहां कुर्मी समुदाय के मतदाता सबसे अधिक संख्या में हैं, जबकि यादव वोटर दूसरे बड़े समूह के रूप में मौजूद हैं। पिछले दस वर्षों में यादव मतदाताओं की एकजुटता ने आरजेडी को लगातार सफलता दिलाई है। पार्टी को इस बार भी भरोसा है कि उसका पारंपरिक वोट बैंक फिर से एकजुट रहेगा और चौथी बार फतुहा की सीट उनके खाते में जाएगी।
फतुहा विधानसभा सीट पर पिछले चुनावी हालात
फतुहा विधानसभा सीट पर पिछले चुनावी नतीजों पर नजर डालें तो आरजेडी के डॉ. रामानंद यादव ने लगातार मजबूत प्रदर्शन किया है। वर्ष 2020 के चुनाव में उन्होंने भाजपा प्रत्याशी सत्येंद्र कुमार सिंह को हराकर जीत दर्ज की थी। इससे पहले 2015 के विधानसभा चुनाव में भी रामानंद यादव ने एलजेपी के उम्मीदवार सत्येंद्र कुमार सिंह को 30,402 वोटों के अंतर से पराजित किया था। 2010 में उन्होंने पहली बार विधानसभा का चुनाव जीता और विधायक बने। हालांकि, 2010 से पहले हुए 2009 के उपचुनाव में यह सीट जेडीयू के अरुण मांझी के कब्जे में थी।
फतुहा विधानसभा सीट का समीकरण
फतुहा विधानसभा सीट सामान्य श्रेणी में आती है, लेकिन यहां मतदाताओं का सामाजिक संतुलन काफी दिलचस्प है। इस क्षेत्र में अनुसूचित जाति (SC) मतदाताओं की हिस्सेदारी लगभग 18.59% है। वर्ष 2020 के चुनाव में कुल मतदाताओं की संख्या 2,71,238 थी, जिनमें मुस्लिम वोटरों की भागीदारी करीब 1.4% और शहरी मतदाताओं की संख्या लगभग 13.4% रही। वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में यादव मतदाताओं की एकजुटता और आरजेडी की मजबूत जमीनी पकड़ के चलते माना जा रहा है कि डॉ. रामानंद यादव की स्थिति इस बार पहले से कहीं अधिक सशक्त है।
