Barbigha Assembly Constituency (बरबीघा विधानसभा सीट): बिहार के शेखपुरा जिले की बरबीघा विधानसभा सीट इस बार एक बार फिर सियासी सरगर्मी का केंद्र बनी हुई है। यह सीट नवादा लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है और इसमें बरबीघा, शेखोपुरसराय प्रखंड तथा शेखपुरा प्रखंड की 10 ग्राम पंचायतें शामिल हैं। इस बार विधानसभा चुनाव में यहां से कुल नौ उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनमें जदयू से कुमार पुष्पंजय, कांग्रेस से त्रिशूलधारी सिंह और जन सुराज पार्टी से मुकेश कुमार सिंह प्रमुख दावेदार हैं।
बरबीघा में क्या हैं चुनावी समीकरण
ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर
बरबीघा केवल एक राजनीतिक क्षेत्र नहीं, बल्कि बिहार की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक भी है। सामस गांव का विष्णु धाम मंदिर धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। यहां भगवान विष्णु की 7.5 फीट ऊंची और 3.5 फीट चौड़ी प्राचीन मूर्ति स्थापित है, जो 9वीं सदी की मानी जाती है। प्रतिहार कालीन अभिलेख में मूर्तिकार का नाम ‘सितदेव’ अंकित है। यह मूर्ति जुलाई 1992 में तालाब की खुदाई के दौरान मिली थी। इतिहासकार फ्रांसिस बुकानन-हैमिल्टन ने 1812 में अपनी रिपोर्ट में पहली बार बरबीघा का उल्लेख किया था। इसके बाद यहां 1894 में डाकघर और 1901 में थाना की स्थापना हुई। 1919-20 में यहां दिल्ली सल्तनत काल के 96 प्राचीन सिक्के भी मिले थे।
बरबीघा को विशेष पहचान मिली क्योंकि यह बिहार के पहले मुख्यमंत्री डॉ. श्रीकृष्ण सिंह की जन्मभूमि है। इसके अलावा, राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ का इस क्षेत्र से गहरा जुड़ाव रहा। उन्होंने यहां एक स्थानीय विद्यालय में प्रधानाचार्य (हेडमास्टर) के रूप में कार्य किया था।
बरबीघा का राजनीतिक इतिहास
1951 में विधानसभा क्षेत्र बनने के बाद बरबीघा में अब तक 17 बार चुनाव हो चुके हैं। इसमें कांग्रेस ने 11 बार, जदयू ने 3 बार, निर्दलीयों ने 2 बार, और जनता पार्टी ने 1 बार जीत दर्ज की है। बरबीघा कभी कांग्रेस का अजेय गढ़ माना जाता था, लेकिन पिछले दो दशकों में जदयू ने यहां अपनी पैठ मजबूत की है। 2005 में रामसुंदर कनौजिया के नेतृत्व में जदयू ने पहली बार यहां जीत हासिल की थी। 2010 में भी जदयू विजयी रही। 2015 में कांग्रेस के सुदर्शन कुमार ने भारी अंतर से जीत दर्ज की, लेकिन 2020 में उन्होंने जदयू का दामन थामकर कांग्रेस को 113 वोटों से हराया। सुदर्शन सिंह पूर्व सांसद और विधायक राजे सिंह के पोते हैं, और अब उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान किया है।
जातीय समीकरण और सियासी गणित
बरबीघा सीट पर भूमिहार मतदाता सबसे अधिक हैं और इन्हें निर्णायक भूमिका में देखा जाता है। इनके अलावा कुर्मी, पासवान और यादव समुदायों की भी अच्छी-खासी तादाद है। इन जातीय समीकरणों पर ही चुनावी रणनीति तय होगी।
बरबीघा में कब होंगे चुनाव (Barbigha Election Date)
| नोटिफिकेशन की तारीख | 10 अक्टूबर 2025 |
| नामांकन की आखिरी तारीख | 17 अक्टूबर 2025 |
| नामांकन जांच की आखिरी तारीख | 18 अक्टूबर 2025 |
| नामांकन वापस लेने की अंतिम तारीख | 20 अक्टूबर 2025 |
| मतदान | 6 नवंबर 2025 |
| चुनाव नतीजे | 14 नवंबर 2025 |
अभी कैसी है सियासी तस्वीर
इस बार मुकाबला जदयू और कांग्रेस के बीच सीधा माना जा रहा है, जबकि प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी भी तीसरे मोर्चे के रूप में सक्रिय है। 2020 में महागठबंधन ने ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़त हासिल की थी, जबकि शहरी वोटों का झुकाव एनडीए की ओर था। इस बार सुदर्शन सिंह के निर्दलीय मैदान में उतरने से मुकाबला और दिलचस्प हो गया है।
