Arvinder Singh Lovely: दिल्ली में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (AAP) के बीच गठबंधन होने के बाद जानकार मानने लगे थे कि इस बार राजधानी की सातों सीटों पर मुकाबला दिलचस्प होगा। भाजपा के लिए इस बार सभी सात सीटें जीतने की राह आसान नहीं होगी। समझौते के तहत आप पार्टी दिल्ली की चार और कांग्रेस तीन सीटों पर चुनाव लड़ रही है। आबकारी नीति मामले से जुड़े मनीलॉन्ड्रिंग केस में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के जेल जाने और चुनाव प्रचार के बीच आप जहां सड़क पर भाजपा का मुकाबला कर रही है तो कांग्रेस अपने अंदरूनी अंतर्कलह का शिकार हो गई है। टिकट बंटवारे पर कांग्रेस नेताओं में पैदा हुई नाराजगी इस्तीफे तक जा पहुंची। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरविंदर सिंह लवली ने रविवार को अपने पद से त्यागपत्र दे दिया।
अरविंदर सिंह लवली।
शीला दीक्षित सरकार में मंत्री थे लवली
लवली की गिनती दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में होती है। वह शीला दीक्षित सरकार में मंत्री भी रहे। कुछ समय के लिए वह भाजपा में भी शामिल हुए। अटकलें हैं कि वह फिर भाजपा में शामिल हो सकते हैं। हालांकि उन्होंने कहा है कि वह कहीं नहीं जा रहे। हालांकि, राजनीति में संभावनाएं कभी समाप्त नहीं होतीं। लवली का अगला कदम क्या होगा इस पर सभी की नजरें हैं। कुछ दिनों पहले राजकुमार चौहान भी कांग्रेस छोड़कर भाजपा मे शामिल हुए। दिल्ली में अपना खोया हुआ जनाधार वापस पाने और अपना पैर जमाने की कोशिश कर रही कांग्रेस के लिए लवली का इस्तीफा दोहरा झटका है।
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AICC दिल्ली जनरल सेक्रेटरी पर उठाए सवाल
लवली ने अपने इस्तीफे की वजह कांग्रेस और AAP में बेमेल गठबंधन और AICC जनरल सेक्रेटरी (दिल्ली इन्चार्ज) की कार्यशैली को जिम्मेदार ठहराया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को लिखी 4 पेज की चिट्ठी में उन्होंने लिखा है कि पार्टी के खिलाफ झूठे, मनगढ़त, भ्रष्टाचार के आरोप लगाने वाली पार्टी के साथ गठबंधन का फैसला सही नहीं था। लवली के इस्तीफे के बाद नेताओं के मतभेद खुलकर सामने आ गए। ओखला से कांग्रेस के दो बार के विधायक रह चुके आसिफ मोहम्मद खान ने कहा- पार्टी में मतभेद हो सकते हैं। अगर लवली निराश थे, इस्तीफा देना चाहते थे तो वे चुपचाप कांग्रेस अध्यक्ष को अपना इस्तीफा सौंप देते।
भाजपा से पूर्वी दिल्ली से टिकट मिलने की चर्चा
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि लवली दोबारा भाजपा का दामन थाम सकते हैं। उन्हें पूर्वी दिल्ली सीट से उम्मीदवार बनाया जा सकता है। अभी इस सीट से भाजपा ने हर्ष मल्होत्रा को टिकट दिया है। सूत्रों का कहना है कि भगवा पार्टी इस सीट से लवली को अपना नया उम्मीदवार घोषित कर सकती है। आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज ने ट्वीट कर पूछा है कि भाजपा पूर्वी दिल्ली का उम्मीदवार बदल रही है?
1998 में पहली बार विधयाक बने लवली
लवली की राजनीतिक यात्रा के बारे में बात करें तो वह पहली 1998 में विधायक चुने गए। वह गांधीनगर सीट से पहली बार विधानसभा पहुंचे थे। इस सीट पर वह 2015 तक विधायक रहे। शीला दीक्षित सरकार में लवली शहरी विकास और राजस्व, शिक्षा और परिवहन मंत्री रहे। 2019 में वह पूर्वी दिल्ली सीट पर कांग्रेस के लोकसभा उम्मीदवार थे, लेकिन उन्हें इस सीट पर बीजेपी के गौतम गंभीर से हार का सामना करना पड़ा था। 2017 में वो थोड़े समय के लिए बीजेपी में चले गए थे लेकिन विचारधारा के सवाल पर मतभेद का हवाला देकर वो कांग्रेस में लौट आए। अगस्त 2023 में उन्हें दिल्ली कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया।
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पूर्वी दिल्ली से अभी हर्ष मल्होत्रा हैं भाजपा के उम्मीदवार
पूर्वी दिल्ली और नॉर्थ इस्ट दिल्ली में लवली की अच्छी पकड़ मानी जाती है। तिलक नगर, हरि नगर, राजौरी गार्डन, लक्ष्मी नगर, सिविल लाइन्स और जंगपुरा में सिख आबादी अच्छी खासी है। इन इलाकों में लवली का समर्थन ज्यादा है। पूर्वी दिल्ली में भी लवली की अच्छी पकड़ है। भाजपा यदि उन्हें पूर्वी दिल्ली से अपना उम्मीदवार घोषित करती है तो इस सीट पर उनका मुकाबला आप के मौजूदा विधायक कुलदीप कुमार से होगा। आप ने कोंडली से अपने विधायक कुलदीप को पूर्वी दिल्ली से उम्मीदवार बनाया है।
