एक योगी, नमक का घोल और...जानें कैसे हुई जननायक की मृत्यु; कर्पूरी ठाकुर की मौत का रहस्य जो कभी खुला नहीं

बिहार में पिछड़े वर्गों को आगे लाने की बात हो या हिंदी को बढ़ाने की बात हो, ऐसे कई मुद्दे रहे जिसकी चर्चा अगर बिहार के परिपेक्ष्य में की जाए तो कर्पूरी ठाकुर का नाम लिए बिना खत्म नहीं हो सकती। दो बार मुख्यमंत्री रहे, कई अड़चनें भी साथ रहीं लेकिन ऐसा क्या हुआ जो 64 की उम्र में ही जननायक की मौत हो गई। तो आइए जानते हैं कर्पूरी के मौत के उस किस्से को जिसमें जिसमें एक आयुर्वेदाचार्य था, एक खास घोल था और कुछ भी सामान्य नहीं था फिर भी कभी उसकी जांच नहीं हुई।

किसी परेशानी से जूझ रहे इंसान को क्या करना चाहिए और क्या नहीं, इसपर राय-मशवरे भले विशेषज्ञ दें लेकिन आदमी करता वही है, जो उसे भाता है। साल 1987 की बात है, पटना में पूर्व मंत्री, पूर्व सांसद और बड़े समाजवादी नेता रामजीवन सिंह और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी खाने पर बैठे हुए थे। अचानक रामजीवन सिंह का ध्यान कर्पूरी की उंगलियों की तरफ गया। उन्होंने अंगूठी पहन रखी थी। पूछने पर कर्पूरी बोले कि हाल ही में वे मुजफ्फरपुर गए थे, वहां किसी ने उन्हें सुझाव दिया कि ग्रह-नक्षत्रों को ठीक करने के लिए यह अंगूठी पहननी चाहिए। रामजीवन सिंह को यह जवाब पचा नहीं, उन्होंने कर्पूरी को कहा,'अगर कुछ बांधना है तो मन को बांधिए, तन को बांधने से कुछ नहीं होता।' पत्रकार संतोष सिंह और आदित्य अनमोल अपनी किताब 'जननायक कर्पूरी ठाकुर: बेजुबानों की आवाज' में लिखते हैं कि इस घटना के बाद कर्पूरी ठाकुर ने कोई टोटका नहीं आजमाया।

karpoori thakur death reason

ऐसा क्या हुआ जो नहीं रहे जननायक (चित्र साभार: PTI/जननायक कर्पूरी ठाकुर मेमोरियल म्यूजियम)

नेता प्रतिपक्ष के पद से हटा दिए गए थे कर्पूरी

यह वही साल था जब कर्पूरी ठाकुर को नेता प्रतिपक्ष के पद से हटा दिया गया था। तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष शिव चंद्र झा के सामने कर्पूरी की सारी दलीलें धरी रह गई थीं। इस घटना का कर्पूरी के ऊपर एक गहरा असर पड़ा। उन्होंने यह तक कह डाला था कि अगर वह यादव पैदा होते तो उनके साथ ऐसा व्यवहार न होता। इसके बाद भी वह विधानसभा में सक्रिय तो रहे लेकिन उनपर पिछड़ों के नेता का लगा तमगा लगने के कारण मन थोड़ा परेशान रहता था।

End of Feed