चुनाव आयोग ने असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी में होने वाले विधानसभा चुनाव और छह राज्यों में उपचुनाव को देखते हुए कुल 1111 केंद्रीय पर्यवेक्षक तैनात किए हैं। आयोग ने कहा है कि इन पर्यवेक्षकों की तैनाती का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि चुनाव पूरी तरह निष्पक्ष, शांतिपूर्ण और बिना किसी दबाव या प्रलोभन के कराए जाएं। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा है पर्यवेक्षक आयोग की आंख और कान की तरह काम करेंगे और मैदान स्तर पर चुनाव प्रक्रिया की निगरानी करेंगे।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार (फाइल फोटो- PTI)
किस राज्य में कितने पर्यवेक्षक तैनात
आयोग के मुताबिक असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी की विधानसभा सीटों के लिए सामान्य, पुलिस और खर्च से जुड़े पर्यवेक्षक अलग अलग संख्या में भेजे गए हैं। पश्चिम बंगाल में सबसे ज्यादा 294 सामान्य पर्यवेक्षक, 84 पुलिस पर्यवेक्षक और 100 व्यय पर्यवेक्षक तैनात किए गए हैं। तमिलनाडु में 136 सामान्य, 40 पुलिस और 151 व्यय पर्यवेक्षक भेजे गए हैं। केरल में 51 सामान्य, 17 पुलिस और 40 व्यय पर्यवेक्षक तैनात हुए हैं, जबकि असम और पुडुचेरी में भी इसी तरह की तैनाती की गई है।
18 मार्च तक सभी पर्यवेक्षक पहुंचेंगे अपने क्षेत्र
चुनाव आयोग ने निर्देश दिया है कि सभी पर्यवेक्षक 18 मार्च तक अपने अपने विधानसभा क्षेत्र में पहुंच जाएं और वहां चुनाव से जुड़ी तैयारियों की निगरानी शुरू करें। आयोग ने कहा है कि पर्यवेक्षक अपने संपर्क विवरण सार्वजनिक करेंगे और रोज एक तय समय पर उम्मीदवारों, राजनीतिक दलों और आम लोगों से मिलकर उनकी शिकायतें सुनेंगे।
संविधान के अधिकार के तहत होती है तैनाती
चुनाव आयोग ने कहा कि केंद्रीय पर्यवेक्षक की नियुक्ति संविधान के अनुच्छेद 324 और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 20बी के तहत की जाती है। इनका काम चुनाव प्रक्रिया को सही तरीके से चलाना और मैदान स्तर पर किसी भी गड़बड़ी को रोकना होता है।
