UT High Court List: भारत में न्यायिक प्रणाली को एकीकृत और मजबूत बनाए रखने में हाईकोर्ट की अहम भूमिका होती है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 214 के तहत प्रत्येक राज्य के लिए एक हाईकोर्ट का प्रावधान है। वहीं, अनुच्छेद 231 संसद को यह अधिकार भी देता है कि वह दो या दो से अधिक राज्यों अथवा किसी केंद्र शासित प्रदेश (UT) के लिए एक ही कॉमन हाईकोर्ट की स्थापना कर सकती है। यही कारण है कि वर्तमान में भारत में 28 राज्य और 8 केंद्र शासित प्रदेश हैं, लेकिन हाईकोर्ट की कुल संख्या 25 ही है।
कहां है 8 केंद्र शासित प्रदेशों के High Court (Photo - AI)
कोर्ट की संख्या को देखते हुए आपके मन में यह सवाल जरूर उठा होगा की अगर देश में केवल 25 हाईकोर्ट (High Court) हैं, जो किन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पास खुद का कोर्ट नहीं है? मन में यह प्रश्न आना स्वाभाविक भी है। बता दें कि प्रशासनिक दक्षता, भौगोलिक निकटता और संसाधनों के अनुकूल उपयोग को ध्यान में रखते हुए कई केंद्र शासित प्रदेशों को पड़ोसी राज्यों के हाईकोर्ट के क्षेत्राधिकार में रखा गया है। यूपीएससी या अन्य प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए जानना जरूरी है कि देश के 8 केंद्र शासित प्रदेशों न्याय के लिए किस हाईकोर्ट में जाते हैं।
केंद्र शासित प्रदेशों का न्यायिक क्षेत्राधिकार
भारत के 8 केंद्र शासित प्रदेशों में से केवल 1 यूटी है, जिसके पास खुद का समर्पित हाईकोर्ट है और उसका नाम है दिल्ली। वहीं 2 यूटी ऐसी है, जिनके पास साझा हाईकोर्ट है और उन केंद्र शासित प्रदेशों का नाम है जम्मू-कश्मीर और लद्दाख। बाकी 6 केंद्र शासित प्रदेश पड़ोसी राज्यों के हाईकोर्ट के क्षेत्रीय क्षेत्राधिकार के तहत आते हैं।
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अंडमान और निकोबार द्वीप समूह
हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी के बीच स्थित अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का अपना कोई अलग हाईकोर्ट नहीं है। इस द्वीप के लोग न्याय के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट जाते हैं। प्रशासनिक और न्यायिक कार्यों को लोगों के लिए सुगम बनाने के लिए पोर्ट ब्लेयर में कलकत्ता हाईकोर्ट की एक स्थायी सर्किट बेंच स्थापित की गई है। इससे लोगों समुद्र पार करने की जरूरत नहीं पड़ती है।
लक्षद्वीप
बात करें केंद्र शासित प्रदेश लक्षद्वीप की तो अरब सागर में स्थित इस द्वीप का न्यायिक क्षेत्राधिकार केरल हाईकोर्ट के अधीन आता है। लक्षद्वीप से जुड़े सभी दीवानी, आपराधिक और संवैधानिक मामलों की सुनवाई के लिए लोगों को समुद्र पार करके केरल हाईकोर्ट जाना पड़ता है।
पुडुचेरी
तमिलनाडु के तट से सटे केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी का न्यायिक क्षेत्राधिकार मद्रास हाईकोर्ट के पास है। पुडुचेरी के अंतर्गत आने वाले चारों क्षेत्र - पुडुचेरी, कराईकल, माहे और यनम के मामलों की सुनवाई मद्रास हाईकोर्ट में होती है।
चंडीगढ़
चंडीगढ़ जो एक केंद्र शासित प्रदेश होने के साथ पंजाब और हरियाणा दोनों राज्यों की संयुक्त राजधानी भी है। इसका न्यायिक कार्य पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा देखा जाता है। बता दें कि यहां के लोगों को न्याय के लिए किसी दूसरे शहर में नहीं जाना पड़ता है, क्योंकि पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट चंडीगढ़ में ही स्थित है।
दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव
साल 2020 में दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव को दो अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेशों को मिलाकर एक कर दिया गया था। यह संयुक्त केंद्र शासित प्रदेश बॉम्बे हाईकोर्ट के न्यायिक क्षेत्राधिकार में आता है।
दिल्ली
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली देश का एकमात्र ऐसा केंद्र शासित प्रदेश है जिसका अपना पूर्ण और स्वतंत्र हाईकोर्ट है 'दिल्ली हाईकोर्ट'। इसकी स्थापना वर्ष 1966 में दिल्ली उच्च न्यायालय अधिनियम, 1966' के तहत की गई थी।
जम्मू और कश्मीर और लद्दाख
2019 में अनुच्छेद 370 को निरस्त किए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को दो अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश के तौर पर स्थापित किया गया। इसका न्यायिक संचालन 'जम्मू और कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट' के तहत होता है। श्रीनगर और जम्मू दोनों स्थानों पर इसकी बैंच कार्य करती है। इन दोनों यूनियन टेरिटरी के न्यायिक मामलों को निपटाने के लिए कॉमन हाईकोर्ट की स्थापना की गई थी।
| केंद्र शासित प्रदेश (UT) | संबंधित उच्च न्यायालय (High Court) | उच्च न्यायालय का स्थान |
| अंडमान और निकोबार द्वीप समूह | कलकत्ता उच्च न्यायालय | कोलकाता (पोर्ट ब्लेयर में सर्किट बेंच) |
| लक्षद्वीप | केरल उच्च न्यायालय | कोच्चि |
| पुडुचेरी | मद्रास उच्च न्यायालय | चेन्नई |
| चंडीगढ़ | पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय | चंडीगढ़ |
| दादरा-नगर हवेली व दमन-दीव | बॉम्बे उच्च न्यायालय | मुंबई |
| दिल्ली (NCT) | दिल्ली उच्च न्यायालय | नई दिल्ली |
| जम्मू और कश्मीर | जम्मू और कश्मीर एवं लद्दाख उच्च न्यायालय | श्रीनगर / जम्मू |
| लद्दाख | जम्मू और कश्मीर एवं लद्दाख उच्च न्यायालय | श्रीनगर / जम्मू |
UPSC के लिए महत्वपूर्ण हाईकोर्ट और इससे जुड़े अनुच्छेद
यूपीएससी प्रीलिम्स परीक्षा हो या मेन परीक्षा, दोनों में ही अनुच्छेद और हाईकोर्ट से जुड़े प्रश्न पूछे जाते हैं। यही कारण है कि यूपीएससी की तैयारी कर रहे छात्रों को हाईकोर्ट की स्थापना और उनसे जुड़े अनुच्छेदों के बारे में जानना जरूरी है।
अनुच्छेद 214 - यह अनुच्छेद प्रत्येक राज्य के लिए एक हाईकोर्ट का प्रावधान करता है।
अनुच्छेद 230 - संसद को यह शक्ति प्रदान करता है कि वह कानून बनाकर किसी भी केंद्र शासित प्रदेश पर हाईकोर्ट के क्षेत्राधिकार का विस्तार कर सकती है या उसे हटा सकती है।
अनुच्छेद 231 - यह अनुच्छेद संसद को दो या अधिक राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों के लिए एक कॉमन हाईकोर्ट स्थापित करने का अधिकार देता है। जैसा पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ और जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के मामले में हुआ है।
अनुच्छेद 241 - यह संसद को कानून बनाकर किसी केंद्र शासित प्रदेश के लिए अलग हाईकोर्ट गठित करने की शक्ति देता है। जैसे दिल्ली के संदर्भ में हमने देखा है।
अगर आप भी यूपीएससी या अन्य प्रशासनिक पदों की भर्ती परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, तो आपको केवल केंद्र शासित प्रदेशों और उनके हाईकोर्ट के बारे में नहीं, बल्कि किन अनुच्छेद के तहत उनकी स्थापना की गई है आदि के बारे में भी विस्तार से जानना जरूरी है।
