Why army keep two humped camels : आप सभी जानते हैं कि लद्दाख में कितनी ज्यादा ठंड पड़ती है। ठंड के मौसम में माइनस 30 डिग्री से भी कम तापमान और ऑक्सीजन की भारी कमी वाले इलाके लद्दाख में जहां इंसान और मशीनें दोनों ही बेबस हो जाते हैं, वहीं भारतीय सेना के साथ कदम से कदम मिलाकर चलता है एक खास योद्धा। और वो है दो कूबड़ वाला ऊंट।
two humped camels
सेना क्यों रखती है 2 कूबड़ वाले ऊंट ?
लद्दाख की दुर्गम पहाड़ियों पर भारतीय सेना ऊंट पर भरोसा करती है। मगर ये सामान्य ऊंट नहीं बल्कि दो कूबड़ वाले ऊंट होते हैं। मगर सवाल ये कि हैलीकॉप्टर और तकनीक के इस जमाने में सेना क्यों इन दो कूबड़ वाले ऊंट को रखती है ? चलिये जानते हैं इस सवाल का जवाब क्या है...
बैक्ट्रियन ऊंट रखती है सेना, क्या है वजह ?
लद्दाख में इस्तेमाल होने वाले ये ऊंट डबल हंप्ड या फिर बैक्ट्रियन ऊंट कहलाते हैं। इनके दो कूबड़ होते हैं जो इन्हें सामान्य रेगिस्तानी ऊंटों से अलग और खास बनाते हैं।
क्या होती है इन ऊंटों की खासियत ?
अब आपको बताते हैं कि इन ऊंटों की खासियत क्या होती है? दरअसल, लद्दाख के ये ऊंट 40 डिग्री तक का तापमान सह सकते हैं, जहां पर इंजन फेल हो जाए वहां ये ऊंट बड़े आराम से चलते रहते हैं। ये बर्फीले, पथरीले और संकरे रास्तों पर भी आराम से चलते हैं। इन्हें किसी तरह की परेशानी नहीं होती है।
कमाल की होती है इन ऊंटों की सहनशक्ति
जिन ऊंचाई वाले इलाकों में इंसान थक जाते हैं, वहां ये ऊंट लंबे समय तक काम करते रहते हैं। कम ऑक्सीजन में भी इनकी कमाल की सहनशक्ति होती है। लद्दाख को कोल्ड डेजर्ट कहा जाता है। ऐसे में इन डबल हंप वाले ऊंटों की मोटी फर, मजबूत टांगे, शरीर में फैट स्टोर करने की अच्छी खासी क्षमता होती है।
सेना के बेहद काम के ये दो कूबड़ वाले ऊंट
सेना के लिए ऐसे ऊंट काफी काम में आते हैं। चाहे सामान इधर से उधर ले जाना हो या फिर आपात स्थिति में बैकअप के तौर पर इस्तेमाल करना हो, ये ऊंट सेना के बेहद काम आते हैं। ऐसे में सेना को इनसे काम करने में काफी सहूलियत मिल जाती है।
