Who Is Ayaan Wadhwa: सरकार की ओर से असंगठित क्षेत्र में काम करने वालों के लिए कई तरह की योजनाएं चलाई जाती हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य घरेलू सहायकों, मजदूरों और दूसरे कामगारों को आर्थिक सहायता और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध करवाना होता है। लेकिन दुर्भाग्य की बात यह है कि आज भी उन लाखों जरूरतमंद परिवारों को इसका लाभ नहीं मिल पाता है, जो वास्तव में इसके हकदार हैं। जानकारी की कमी और ऑनलाइन प्रक्रियाओं की कठिनाई के चलते बड़ी संख्या में लोग इससे वंचित रह जाते हैं। लेकिन यहां हम आपको 17 वर्षीय एक ऐसे छात्र के बारे में बताएंगे, जिसने न केवल इन जरूरतमंद लोगों तक लाभ पहुंचाने का सोचा बल्कि 1000 से ज्यादा श्रमिकों तक पहुंच बनाई और 500 से ज्यादा लोगों को ई-श्रम पोर्टल पर रजिस्टर करवाया।
Who Is Ayaan Wadhwa: कौन हैं अयान वाधवा जो बनें हजारों श्रमिकों के मददगार
कौन हैं अयान वधवा
बता दें यहां हम मुंबई के ओबेरॉय इंटरनेशनल स्कूल में 11वीं कक्षा के छात्र अयान वाधवा की बात कर रहे हैं। खास बात यह है कि उन्होंने अपनी पढ़ाई के साथ-साथ उन लोगों की मदद का जिम्मा भी उठाया, जिन्हें सरकारी योजनाओं की सबसे ज्यादा जरूरत है। उन्होंने कानून, तकनीक और श्रम अर्थशास्त्र (Labour Economics) का इस्तेमाल करते हुए 'वर्कर्स ऑफ इंडिया' फाउंडेशन की स्थापना की ताकि उन लोगों के जीवन में वास्तविक बदलाव लाया जा सके, जो अक्सर हमारी व्यवस्था में अनदेखे रह जाते हैं।
अयान वाधवा (PC: workersofindia.com)
इस घटना ने सोचने पर कर दिया मजबूर
अयान के मन में यह ख्याल एक घटना के चलते आया। उनके घर में मनीषा माने नाम की 40 वर्षीय महिला घरेलू सहायिका के रूप में काम करती हैं। एक बार मनीषा को मेडिकल इमरजेंसी के लिए कुछ पैसों की जरूरत पड़ी। ऐसे में उन्होंने आर्थिक मदद के लिए वधवा परिवार से संपर्क किया। परिवार ने उनकी सहायता कर दी, लेकिन इस घटना ने अयान को सोचने पर मजबूर कर दिया। अयान के मन में सवाल आया कि अगर किसी घरेलू कामगार को अचानक पैसों की जरूरत पड़ जाए और उसके मालिक आर्थिक मदद करने की स्थिति में न हों तो वह क्या करेगा? क्या ऐसे लोगों को सरकारी योजनाओं के माध्यम से मदद नहीं मिलनी चाहिए? इसी सवाल ने अयान को असंगठित क्षेत्र के लाखों करोड़ों मजदूरों, कामगारों के लिए कुछ करने की प्रेरणा दी।
6 महीने ई श्रम पोर्टल का किया अध्ययन
इसके बाद अयान ने करीब 6 महीने तक लगातार ई-श्रम पोर्टल, उसमें रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया और असंगठित कामगारों से जुड़े श्रम कानूनों का अध्ययन किया। इस दौरान उन्होंने समझा कि सरकारी योजनाएं मौजूद होने के बावजूद जानकारी की कमी व ऑनलाइन प्रक्रिया की समझ न होने के चलते लाखों लोग इसका लाभ नहीं उठा पाते हैं।
जागरूकता वर्कशॉप से मिली मदद
महाराष्ट्र के घरेलू कामगार कल्याण बोर्ड से जुड़ी जानकारी जुटाने के दौरान उन्हें पता चला कि नवी मुंबई में कई कामगारों को इस बोर्ड और इससे मिलने वाली सुविधाओं के बारे में जानकारी ही नहीं है। कुछ लोगों को योजनाओं के बारे में पता था, लेकिन वे सरकारी प्रक्रिया पर भरोसा न होने के कारण रजिस्ट्रेशन करने से बच रहे थे। एक महिला कामगार ने कहा कि उन्हें सरकारी व्यवस्था पर विश्वास नहीं है। यही वजह थी कि जब एक अधिकारी उनसे संपर्क करने पहुंचा तो उन्होंने उससे बात करने से भी मना कर दिया। ऐसे में अयान की ओर से रिहायशी सोसायटियों में आयोजित जागरूकता वर्कशॉप काफी मददगार साबित हुई।
