क्या होते हैं Self Finance Course, रेगुलर कोर्स से कैसे है‌ अलग

हायर एजुकेशन के लिए जाते समय रेगुलर कोर्स के साथ 'Self Finance Course' का नाम सुनने को मिलता है। 12वीं के बाद कॉलेज या ग्रेजुएशन के बाद पीजी करने की इच्छा रखने वाले छात्रों को इस कोर्स के बारे में जानना जरूरी है। आइए आपको बताएं सेल्फ फाइनेंस कोर्स क्या होते हैं?

हायर एजुकेशन के लिए जब भी कोई छात्र किसी कॉलेज या यूनिवर्सिटी का रुख करते हैं, तो उन्हें एडमिशन प्रॉस्पेक्टस में दो तरह के कोर्सेज नजर आते हैं, एक है रेगुलर कोर्स और दूसरा हैं सेल्फ फाइनेंस कोर्स (Self Finance Course)। जब छात्र सेल्फ फाइनेंस कोर्स पढ़ते हैं तो वह अक्सर असमंजस में पड़ जाते हैं कि यह किस तरह के कोर्स हैं। अधिकांश ऐसे छात्र है, जिन्हें आज भी सेल्फ फाइनेंस कोर्स के बारे में नहीं पता है, साथ ही यह रेगुलर कोर्स से कैसे अलग हैं। एक ही कॉलेज में एक ही डिग्री लेकिन फिर उन्हें दो श्रेणियों में क्यों रखा गया है। दोनों के बीच अंतर क्या है? इस तरह के ढेरों सवाल उठने लगते हैं। अगर आप भी यूजी या पीजी कोर्स में प्रवेश लेने की तैयारी कर रहे हैं और आपको भी नहीं पता है कि सेल्फ फाइनेंस कोर्स क्या हैं तो इनके बारे में जानना आपके लिए बेहद जरूरी हो जाता है।

क्या होते हैं Self Finance Course

क्या होते हैं Self Finance Course (Photo - AI)

क्या होते हैं सेल्फ फाइनेंस कोर्स? (What is a Self Finance Course)

कोर्स के नाम से ही साफ है - 'सेल्फ फाइनेंस' यानी खुद से वित्तपोषित किया जाने वाला कोर्स। ये ऐसे प्रोग्राम या कोर्सेज होते हैं जिन्हें चलाने के लिए सरकार या किसी बाहरी एजेंसी से कोई फाइनेंशियल सहायता या ग्रांट नहीं मिलती है। इस तरह के कोर्स को आयोजित करने का पूरा खर्च, जिसमें शिक्षकों की सैलरी, लैब का रखरखाव, बिजली और आधुनिक बुनियादी ढांचा आदि का खर्च, खुद कॉलेज या यूनिवर्सिटी को उठाना पड़ता है। यही वजह है कि कॉलेज इस पूरे खर्च को निकालने के लिए इन कोर्सेज में दाखिला लेने वाले छात्रों से ही पूरी फीस वसूलते हैं। आज के समय में मार्केट की डिमांड को देखते हुए कई पारंपरिक सरकारी विश्वविद्यालय भी बीबीए, बीसीए, जर्नलिज्म और विभिन्न टेक्निकल डिप्लोमा जैसे कोर्सेज को सेल्फ फाइनेंस मोड में चलाने लगे हैं।

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