PhD पूरी करने के लिए मिलते हैं कितने साल? बैक और टाइम-लिमिट के नियम जान रह जाएंगे हैरान

भारत में हर साल हजारों-लाखों छात्र पोस्टग्रेजुएशन के बाद अपने नाम के आगे Dr लगाने के सपने के साथ PhD कोर्स में प्रवेश लेते हैं। ऐसे में छात्रों के मन में बैक के साथ कोर्स पूरा करने की अधिकतम अवधि को लेकर सवाल होते हैं। आइए उनके जवाब जानते हैं।

भारतीय विश्वविद्यालय प्रणाली में शोध (Research) करने और अपने नाम के आगे 'डॉक्टर' (Dr.) लगाने का सपना लाखों युवा देखते हैं। लेकिन पीएचडी की राह जितनी आकर्षक दिखती है, उतनी ही अनुशासित और नियमों से बंधी हुई है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के दिशा-निर्देशों के अनुसार, पीएचडी पूरा करने के लिए एक निश्चित समय-सीमा तय की गई है, जिसके भीतर अभ्यर्थियों को अपना रिसर्च वर्क जमा करना अनिवार्य होता है। इसके साथ ही, कोर्सवर्क में न्यूनतम अंक न ला पाने या फेल होने पर 'बैक' से जुड़े कड़े नियम लागू होते हैं, जिनकी सही जानकारी होना हर स्कॉलर के लिए या पीएचडी करने की इच्छा रखने वाले उम्मीदवार के लिए जानना जरूरी है।

PhD पूरी करने के लिए मिलते हैं कितने साल

PhD पूरी करने के लिए मिलते हैं कितने साल (Photo - AI/ Verified by Newsroom)

पीएचडी पूरा करने के लिए मिलते हैं कितने साल?

यूजीसी (UGC) के नवीनतम पीएचडी नियमों के अनुसार, रिसर्च कार्य पूरा करने के लिए न्यूनतम और अधिकतम अवधि तय की गई है। कोर्स को पूरा करने की न्यूनतम अवधि 3 साल और अधिकतम अवधि 6 साल तय की गई है। इस ड्यूरेशन के दौरान पीएचडी पूरी न करने वाले छात्र की डिग्री रद्द हो जाती है।

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