ATS क्या है जिससे कंपनियां शॉर्टलिस्ट करती हैं रिज्यूम, ATS Friendly रिज्यूम कैसे करें तैयार

आज कंपनी बड़े पैमाने पर हायरिंग करती है, ऐसे में हर रिज्यूम चेक करना को संभव नहीं होता। तब काम आता है ATS सिस्टम, जिसके माध्यम से कैंडिडेट्स को शॉर्टलिस्ट किए जाते हैं। तो आइए जानते हैं कि कैसे बना सकते हैं आप भी ATS Friendly रिज्यूम

नेवी की नौकरी छोड़ UPSC पर साधा निशाना, एलएलबी, MBA और MPA के बने IPSआजकल जब आप किसी कंपनी में नौकरी के लिए आवेदन करते हैं, तो आपका रिज्यूम सीधे किसी इंसानी रिक्रूटर के हाथों में नहीं जाता। अधिकांश बड़ी और मध्यम स्तर की कंपनियां सबसे पहले आपके रिज्यूम को एक विशेष सॉफ्टवेयर से भरोसे छोड़ देती हैं। अगर आपका रिज्यूम इस सॉफ्टवेयर के मानकों पर खरा नहीं उतरता, तो आपकी योग्यता और अनुभव के बावजूद आप रिजेक्ट हो सकते हैं। इसीलिए आज के दौर में केवल रिज्यूम बनाना ही काफी नहीं है, बल्कि उसे ATS Friendly बनाना सबसे जरूरी हो गया है। लेकिन एटीएस क्या है, यह कैसे काम करता है और क्यों आज के समय एटीएस फ्रेंडली रिज्यूम बनाना जरूरी है आइए जानते हैं विस्तार में -

ATS क्या है जिससे कंपनियां शॉर्टलिस्ट करती हैं रिज्यूम

ATS क्या है जिससे कंपनियां शॉर्टलिस्ट करती हैं रिज्यूम (Photo - AI)

ATS क्या है? (What is ATS)

ATS का पूरा नाम एप्लीकेशन ट्रैकिंग सिस्टम (Applicant Tracking System) है। यह एक ऐसा सॉफ्टवेयर या सिस्टम है जिसका उपयोग कंपनियां भर्ती प्रक्रिया को आसान, तेज और ऑटोमेटेड बनाने के लिए करती हैं। जी हां, आपने सही सुना, आज देश की बड़ी से बड़ी कंपनी और मध्यम स्तर की कंपनियां जब सैकड़ों या हजारों उम्मीदवारों के लिए भर्ती निकालती है और उसके लिए उनका रेज्यूमे लेती हैं तो एचआर (HR) टीम हर रेज्यूमे को चेक नहीं करती है, क्योंकि हर किसी का सीवी खोलकर पढ़ना संभव नहीं है। ऐसे में कैंडिडेट के रेज्यूमे शॉर्टलिस्ट करने का काम आता है ATS पर। एटीएस सॉफ्टवेयर सभी रिज्यूम को स्कैन करता है, जॉब डिस्क्रिप्शन के आधार पर प्रासंगिक कीवर्ड्स और स्किल्स को मैच करता है, और सबसे उपयुक्त उम्मीदवारों के रिज्यूम को शॉर्टलिस्ट करके आगे बढ़ाता है।

End of Feed