Indian Army में शामिल होने का सपना देखने वाले लाखों युवाओं के लिए शारीरिक और मानसिक फिटनेस के साथ-साथ आंखों की दृष्टि यानी Vision का एकदम सटीक होना सबसे पहली और अहम शर्त है। देश की रक्षा के लिए सीमाओं पर तैनात होने वाले सैनिकों की आंखें पैनी और दुरुस्त होनी चाहिए ताकि वे हर विपरीत परिस्थिति का सामना कर सकें। अक्सर भारतीय सेना में जाने की इच्छा रखने वाले युवाओं के मन में यह सवाल रहता है कि क्या चश्मा लगाने वाले या कमजोर नजर वाले युवा सेना में जा सकते हैं? (Eye Standards) भारतीय सेना ने इसके लिए बहुत ही स्पष्ट और वैज्ञानिक मेडिकल मानक तय किए हैं। आइए जानते हैं आंखों से जुड़े ये नियम क्या हैं।
Indian Army में शामिल होने के लिए क्या हैं आंखों के नियम (Photo - AI)
बिना चश्मे के नजर का पैमाना
भारतीय सेना में अलग-अलग पदों जैसे जनरल ड्यूटी, तकनीकी पद, और ऑफिसर रैंक के लिए आंखों के मानक अलग-अलग तय किए जाते हैं। सामान्य तौर पर, अच्छे विजन के लिए उम्मीदवार की आंखें 6/6 या 6/9 होनी चाहिए। इसका मतलब है कि बिना किसी चश्मे के उम्मीदवार दूर की चीजों को पूरी स्पष्टता से देख सके। ऑफिसर रैंक जैसे NDA या CDS के लिए बिना चश्मे के विजन 6/6 या 6/9 होना अनिवार्य माना जाता है, जबकि कुछ तकनीकी और क्लेरिकल पदों पर उम्मीदवारों को नियमों में थोड़ी राहत मिल सकती है।
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मायोपिया और हाइपरमेट्रोपिया की तय सीमा
यदि किसी उम्मीदवार को निकट दृष्टि दोष यानी मायोपिया या दूर दृष्टि दोष यानी हाइपरमेट्रोपिया है, तो सेना इसके लिए एक निश्चित डायोप्टर (Dioptre) की सीमा तय करती है। आमतौर पर, सेना में भर्ती के लिए मायोपिया की अनुमति -2.5D से -3.5D तक होती है, जो पदों के आधार पर बदलती भी है। वहीं दूर दृष्टि दोष के लिए +2.5D तक की सीमा स्वीकार की जाती है। इसकी जानकारी आपको सेना की आधिकारिक वेबसाइट या फिर आवेदन के दौरान जारी नोटिफिकेशन में मिलेगी। यदि आपकी नजर इस तय सीमा के भीतर है और आप चश्मा पहनते हैं, तो आप कुछ विशिष्ट पदों के लिए योग्य हो सकते हैं, बशर्ते आपकी दृष्टि चश्मे के साथ पूरी तरह सुधर सके। दृष्टी के संबंध में अधिक जानकारी आपको सेना की आधिकारिक वेबसाइट या फिर आवेदन के दौरान जारी नोटिफिकेशन में मिलेगी।
कलर ब्लाइंडनेस के लिए बेहद सख्त है सेना का नियम
रंगों की पहचान न कर पाना यानी कलर ब्लाइंडनेस (Color Blindness) भारतीय सेना में चयन के दौरान एक बहुत बड़ी बाधा बन सकती है। सेना की मेडिकल जांच के दौरान 'इशिहारा चार्ट' (Ishihara Test) का उपयोग किया जाता है, जिससे यह परखा जाता है कि उम्मीदवार लाल और हरे रंग में सही अंतर कर पा रहा है या नहीं। सेना के लगभग सभी कॉम्बैट और तकनीकी पदों के लिए कलर ब्लाइंड उम्मीदवारों को पूरी तरह से अयोग्य माना जाता है, क्योंकि युद्ध के मैदान या सामरिक अभियानों में रंग-बिरंगे संकेतों और यूनिफॉर्म को पहचानना बेहद अहम होता है। यही कारण है कि कलर ब्लाइंड उम्मीदवार सेना में भर्ती के पात्र नहीं है।
लेसिक सर्जरी को लेकर क्या है नीति?
आज के दौर में कई युवा अपनी कमजोर नजर को ठीक कराने के लिए लेसिक या लेजर सर्जरी का सहारा लेते हैं। भारतीय सेना में लेसिक सर्जरी को लेकर कड़े और स्पष्ट नियम हैं। कुछ चुनिंदा एंट्री स्कीमों में एक निश्चित आयु के बाद कराई गई लेसिक सर्जरी को स्वीकार किया जाता है, लेकिन इसके लिए ऑपरेशन को कम से कम 6 महीने से 1 साल पहले कराया गया होना चाहिए। साथ ही, कॉर्निया पूरी तरह स्वस्थ होना आवश्यक है और मेडिकल बोर्ड इसकी पूरी जांच करता है। जांच के बाद ही पता लगता है कि उम्मीदवार भर्ती के योग्य है कि नहीं।
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नजर की अन्य बीमारियां और भेंगापन
आंखों की अन्य गंभीर चिकित्सीय स्थितियां जैसे ग्लूकोमा, मोतियाबिंद या रेटिना से जुड़ी समस्याएं होने पर उम्मीदवार को सीधे तौर पर मेडिकल अनफिट घोषित कर दिया जाता है। इसके अलावा, आंखों का भेंगापन भी सेना में स्वीकार नहीं है, क्योंकि इससे दूर की वस्तुओं पर सटीक फोकस करने और दूरी का अनुमान लगाने में बाधा उत्पन्न होती है। सेना में भर्ती होने से पहले अपने नजदीकी आई स्पेशलिस्ट से संपूर्ण विजन टेस्ट जरूर करवा लेना चाहिए, ताकि आपको पहले से पता रहे की आपकी आंखें कितनी स्वस्थ है। इससे आपको सेना में भर्ती के दौरान होने वाले मेडिकल टेस्ट में परेशानी नहीं होगी।
