उत्तर प्रदेश की बहुचर्चित 69000 सहायक शिक्षक भर्ती मामले में योगी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में बड़ा फैसला पेश किया है। राज्य सरकार ने शीर्ष अदालत में दायर अपने हलफनामे में स्पष्ट किया है कि साल 2020 में नियुक्त 67,867 शिक्षकों की नौकरी पर कोई आंच नहीं आएगी। सरकार ने कहा है कि यदि इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार संशोधित मेरिट सूची में कुछ नए अभ्यर्थी चयनित होते हैं, तो उन्हें मौजूदा रिक्त पदों पर नियुक्ति दी जाएगी। यानी पहले से कार्यरत शिक्षकों को हटाकर नई नियुक्तियां नहीं की जाएंगी।
69000 शिक्षक भर्ती में नहीं जाएगी किसी की नौकरी
गौरतलब है कि 69000 सहायक शिक्षक भर्ती का विज्ञापन वर्ष 2018 में जारी हुआ था और लिखित परीक्षा 2019 में आयोजित की गई थी। इसके बाद कटऑफ, आरक्षण व्यवस्था और मेरिट सूची को लेकर विवाद शुरू हुआ, जो हाईकोर्ट से होते हुए सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया। अब योगी सरकार के ताजा रुख से उन हजारों शिक्षकों को बड़ी राहत मिली है, जो पिछले कई वर्षों से अपनी नौकरी को लेकर असमंजस में थे। वहीं नई मेरिट सूची में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों के लिए भी नियुक्ति का रास्ता खुल सकता है, बशर्ते सुप्रीम कोर्ट सरकार के प्रस्ताव को स्वीकार करता है। मामले की अगली सुनवाई में शीर्ष अदालत इस पूरे विवाद पर महत्वपूर्ण फैसला सुना सकती है।
सरकार ने क्या कहा
सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए संशोधित मेरिट सूची तैयार करने की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। इसके साथ ही 8,270 ऐसे अभ्यर्थियों की सूची भी अदालत में सौंपी गई है, जो नई मेरिट सूची में स्थान पाने के बावजूद फिलहाल सेवा में नहीं हैं। सरकार का कहना है कि यदि रिक्त पद उपलब्ध होंगे और अभ्यर्थी सभी आवश्यक योग्यता पूरी करेंगे, तो उन्हें नियुक्ति दी जाएगी। हालांकि, सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था केवल 69000 शिक्षक भर्ती तक सीमित रहेगी और भविष्य की किसी भर्ती में इसे आधार नहीं बनाया जाएगा।
इलाहाबाद हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने अगस्त 2024 में आदेश दिया था कि भर्ती की मेरिट सूची दोबारा तैयार की जाए। यह मामला आरक्षण नियमों के पालन को लेकर लंबे समय से विवाद में है। इस फैसले को चुनौती देते हुए कई अभ्यर्थी सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे, जिसके बाद नई मेरिट सूची की प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगा दी गई थी। अब राज्य सरकार ने अदालत को बताया है कि उसने सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी कर ली हैं और अंतिम निर्णय का पालन किया जाएगा। अदालत ने कहा था कि आरक्षित वर्ग के वे अभ्यर्थी, जिन्होंने सामान्य वर्ग के कटऑफ से अधिक अंक प्राप्त किए हैं, उन्हें सामान्य श्रेणी में गिना जाए और उसके बाद क्षैतिज आरक्षण लागू किया जाए।
