Supreme Court Cracks Down on Teacher Appointment Rules: सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए कहा है कि स्कूलों और कॉलेजों में ऐसे शिक्षकों की नियुक्ति या उनकी सेवा जारी नहीं रखी जा सकती है, जिनके पास आवश्यक शैक्षणिक योग्यता नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शिक्षक नियुक्ति के लिए शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम, राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) अधिनियम और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) अधिनियम के तहत निर्धारित योग्यता होना जरूरी है।
शिक्षक नियुक्ति के लिए RTE, NCTE और UGC नियमों का पालन जरूरी: सुप्रीम कोर्ट (फोटो: पीटीआई)
भारत के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने शिक्षकों और शैक्षणिक संस्थानों के कर्मचारियों के प्रांतीयकरण से जुड़ी वैधानिक योजनाओं को चुनौती देने वाली एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई के दौरान यह निर्देश दिया। पीठ ने अपने अंतरिम आदेश में कहा, “अंतरिम उपाय के तौर पर, किसी भी शिक्षक की स्कूल या कॉलेज में नियुक्ति या सेवा जारी नहीं रखी जाएगी, जब तक उसके पास RTE अधिनियम/NCTE अधिनियम/UGC अधिनियम के तहत निर्धारित आवश्यक योग्यता न हो।”
अदालत के इस निर्देश से स्पष्ट होता है कि शैक्षणिक संस्थानों में शिक्षकों की नियुक्ति या उनकी सेवा जारी रखते समय संबंधित कानूनों के तहत निर्धारित अनिवार्य योग्यताओं का पालन करना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षकों और शैक्षणिक संस्थानों में कार्यरत कर्मचारियों के प्रांतीयकरण से संबंधित वैधानिक प्रावधानों और योजनाओं को चुनौती देने वाली जनहित याचिका (PIL) पर नोटिस जारी करने के बाद यह अंतरिम निर्देश दिया। यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि शिक्षकों के लिए निर्धारित योग्यताएं शिक्षा के स्तर और संस्थान की प्रकृति के आधार पर अलग-अलग वैधानिक एवं नियामक व्यवस्थाओं के तहत तय की जाती हैं।
RTE अधिनियम प्रारंभिक शिक्षा से जुड़े मानदंड निर्धारित करता है, जबकि NCTE का ढांचा शिक्षक शिक्षा को विनियमित करने के साथ-साथ स्कूलों में शिक्षकों के लिए आवश्यक योग्यताएं निर्धारित करता है। वहीं, उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए UGC का ढांचा लागू पात्रता और शैक्षणिक योग्यताओं से संबंधित आवश्यकताएं तय करता है। सुप्रीम कोर्ट का यह अंतरिम निर्देश PIL पर आगे होने वाली सुनवाई और कार्यवाही के अधीन रहेगा। अब मामले में प्रतिवादियों को याचिका में उठाए गए मुद्दों पर अपना जवाब दाखिल करना होगा। इसके बाद अदालत इस मामले पर आगे विचार करेगी।
इस आदेश में नियुक्ति के समय ही नहीं, बल्कि सेवा में बने रहने के दौरान भी निर्धारित वैधानिक योग्यताओं का पालन करने पर जोर दिया गया है। यह व्यवस्था तब तक प्रभावी रहेगी, जब तक अदालत याचिका में उठाई गई चुनौती पर अंतिम विचार नहीं कर लेती। मामले में आगे होने वाली सुनवाई से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि इस अंतरिम निर्देश का दायरा क्या होगा और याचिका के तहत आने वाले शिक्षकों एवं शैक्षणिक संस्थानों पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा।
