Subhash Chandra Bose Jayanti 2026: ‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा…’ का नारा देने वाले भारत माता के वीर सपूत नेताजी सुभाष चंद्र बोस का 23 जनवरी को जन्मदिवस होता है। ओडिशा के कटक शहर (उस समय के बंगाल) में 23 जनवरी 1897 को एक रसूखदार वकील जानकीनाथ बोस और प्रभावती बोस के घर जन्मे सुभाष चंद्र बोस की जयंती देशभर में पराक्रम दिवस के नाम से मनाई जाती है। साल 2021 में नेताजी की 125वीं जयंती के अवसर पर इसकी घोषणा की गई थी। सुभाष चंद्र बोस के पिता उन्हें आईसीएस (Imperial Civil Service) अधिकारी बनाना चाहते थे, इसी कारण उन्होंने उन्हें विदेश भी भेजा। ग्रेजुएशन के बाद सुभाष चंद्र बोस ने आईसीएस का एग्जाम दिया।
Subhash Chandra Bose Jayanti: क्या IAS अधिकारी थे नेताजी सुभाष चंद्र बोस
सुभाष चंद्र बोस सिविल सेवा परीक्षा, Subhash Chandra Bose Jayanti 2026 Education
सिविल सेवा परीक्षा सुभाष चंद्र बोस आईसीएस (Imperial Civil Service) अधिकारी (जिसे आज आईएएस कहते हैं) बन गए थे। 1920 में बोस ने आईसीएस की वरीयता सूची में चौथा स्थान प्राप्त किया था। हालांकि असहयोग आंदोलन (Non-Cooperation Movement) से प्रभावित सुभाष चंद्र बोस ने 1921 में सरकारी सेवा से इस्तीफा दे दिया और भारत आ गए। साल 1923 में सुभाष बाबू कांग्रेस युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान, अंग्रेज़ों के खिलाफ लड़ने के लिए आजाद हिंद फौज का गठन किया था।
सुभाष चंद्र बोस
इंपीरियल सिविल सर्विस और सिविल सर्विस एग्जाम में अंतर, Subhash Chandra Bose IAS
ICS परीक्षा 1922 से भारत में आयोजित होने लगी थी, जो पहले केवल लंदन में होती थी। आजादी के बाद इसे IAS के रूप में नया रूप दिया गया। इंपीरियल सिविल सर्विस (ICS) का नाम बदलकर भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) 1947 में भारत की आजादी के बाद किया गया था, जब ICS को भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) द्वारा प्रतिस्थापित किया गया। 1950 में भारतीय संविधान के तहत इसे आधिकारिक मान्यता मिली।
नेता जी सुभाष चंद्र बोस सिविल सेवा
आजाद हिंद फौज के संस्थापक, Subhash Chandra Bose Azad Hind Fauz
नेताजी सुभाष चंद्र बोस भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान क्रांतिकारी नेता थे। उन्होंने आजाद हिंद फौज का गठन कर “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा” का नारा देकर युवाओं में जोश भर दिया। ब्रिटिश शासन से मुक्ति के लिए उन्होंने विदेशों से समर्थन जुटाया और सशस्त्र संघर्ष का मार्ग चुना। उन्होंने अंडमान-निकोबार द्वीप समूह का नामकरण शहीद और स्वराज किया। सुभाष बाबू का जीवन त्याग, साहस और राष्ट्रप्रेम की प्रेरणादायक मिसाल है।
