Jallianwala Bagh Massacre Causes and Historic Facts in Hindi: भारत पर ब्रिटिश शासकाल के दौरान 13 अप्रैल 1919 को एक हत्याकांड में 500 से 1,200 अहिंसक प्रदर्शनकारियों की एक पार्क में हत्या कर दी गई थी, जिसे जलियांवाला बाग हत्याकांड के रूप में जाना जाता है। भारत सरकार ने 1951 में इस आपदा में मारे गए सभी निर्दोष व्यक्तियों के सम्मान में एक स्मारक बनवाया था। भारत सरकार ने उस इतिहास की याद में याद-ए-जलियां संग्रहालय का उद्घाटन मार्च 2019 में किया गया था। 2023 में भारत ने उस भयानक दिन की 104वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है। प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी यह इतिहास का अहम टॉपिक है, जिसके बारे में कुछ जरूरी बातें यहां जान सकते हैं।
जलियावाला बाग कांड फैक्ट्स
जनरल डायर और जलियांवाला बाग हत्याकांड का आदेश (Jallianwala Bagh Massacre and General Dyer)
13 अप्रैल, 1919 की दोपहर को कम से कम 10,000 पुरुष, महिलाएं और बच्चे जलियांवाला बाग में इकट्ठा हुए। यह पार्क लगभग पूरी तरह से दीवारों से घिरा हुआ था और बाहर निकलने का एक ही रास्ता था। यह स्पष्ट नहीं है कि विरोध प्रदर्शनों में कितने लोगों ने भाग लिया और कितने लोग वहां बैसाखी पर्व मना रहे थे।
जब अंग्रेज अधिकारी रेजिनाल्ड एडवर्ड हैरी डायर और उसके सैनिक वहां पहुंचे, तो उन्होंने बाहर निकलने वाले गेट को बंद कर दिया। सैनिकों ने बिना किसी चेतावनी के सभा पर गोलियां चलाईं, कथित तौर पर सैकड़ों गोलियां तब तक चलाईं गईं जब तक कि सैनिकों के पास बारूद खत्म नहीं हो गया।
जलियावाला बाग नरसंहार से जुड़े अनजाने तथ्य (Jallianwala Bagh Massacre 10 Unknown Facts)
1. फायरिंग के दौरान लोग जान बचाने के लिए छटपटा रहे थे। कई लोग पार्क में कुएं (अब शहीद वेल के रूप में जाना जाता है) में कूद गए। शूटिंग के बाद कुएं में 200 से अधिक लाशें बरामद की गईं।
2. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने पंजाब में 1919 के जलियांवाला बाग हत्याकांड से पहले की घटनाओं की जांच के लिए एक उपसमिति की स्थापना की।
3. 25 मार्च, 1920 तक, उन्होंने 'द कांग्रेस पंजाब इंक्वायरी' नाम की एक ग्राउंडब्रेकिंग रिपोर्ट के रूप में पब्लिश के लिए मुंबई की एक प्रिंटिंग कंपनी को अपनी रिसर्च पेश की।
4. यह रिपोर्ट मुख्य रूप से महात्मा गांधी की ओर से तैयार की गई थी और सीआर दास, अब्बास तैयबजी और एमआर जयकर सहित महत्वपूर्ण हस्तियों ने इस पर हस्ताक्षर किए थे।
5. समिति ने 1700 से अधिक बोनाफाइड गवाहों को देखा, डेटा और फर्स्ट हैंड अकाउंट्स को इकट्ठा किया और अपनी 160 पेज की जांच में परीक्षण रिकॉर्ड का अध्ययन किया।
6. रिपोर्ट में यह भी मांग की गई कि जनरल डायर और तत्कालीन वायसराय लॉर्ड चेम्सफोर्ड सहित दोषी अधिकारियों को न्याय के कठघरे में लाया जाए।
7. आधिकारिक मौत की संख्या पर भी विवाद हुआ, जिसमें कहा गया कि लगभग 1200 मौतें और 3600 घायलों के लिए सरकार को दोषी ठहराया गया था।
8. कुछ महीने बाद, हंटर कमेटी की रिपोर्ट में ब्रिटेन का पक्ष रखा गया और इसमें घटना के पीछे इसमें बताए कारण ने सबको हैरान कर दिया।
9. हंटर कमेटी की रिपोर्ट में गांधी के आंदोलन को जिम्मेदार ठहराकर इसने ज्यादातर अत्याचारों को छुपाया गया। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि रिपोर्ट का नेतृत्व एक यूरोपीय लोगों की ओर से किया गया था।
10. साल 1920 की कांग्रेस रिपोर्ट अभी भी एक सदी से भी अधिक समय के बाद भारतीय क्षेत्र में किए गए अमानवीय ब्रिटिश अपराध का वर्णन करने वाले सबसे मजबूत दस्तावेजों में से एक है।
जलियांवाला बाग नरसंहार के कथित कारण (Jallianwala Bagh Causes and Rowlatt Act):
भारत में ब्रिटिश सरकार ने प्रथम विश्व युद्ध (1914-18) के दौरान आजादी से जुड़ी गतिविधियों को दबाने के लिए कई दमनकारी आपातकालीन कानून पारित किए। युद्ध के अंत में, भारतीय लोगों को बड़ी उम्मीद थी कि ये प्रतिबंध हटा दिए जाएंगे और भारत को राजनीतिक स्वतंत्रता की अनुमति मिलेगी। 1918 की मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड रिपोर्ट में प्रतिबंधित स्थानीय स्वशासन की सिफारिश की थी, जिसे ब्रिटिश संसद को भेजा गया था।
इसके बजाय, भारत सरकार ने 1919 के शुरुआती महीनों में रोलेट एक्ट लागू किया, जिसने मूल रूप से दमनकारी युद्धकालीन नियमों को लंबा कर दिया। इसके बाद भारतीयों के अंदर विशेष रूप से पंजाब क्षेत्र में व्यापक रोष दिखा। 10 अप्रैल को अमृतसर में हिंसक दंगे हुए, जिसमें कई विदेशी नागरिक मारे गए और एक ईसाई मिशनरी की क्रूर पिटाई हुई।
इस हिंसा को उन रिपोर्ट्स से हवा मिली थी जिसमें कहा कि कई भारतीय नेताओं को हिरासत में ले लिया गया है। व्यवस्था को बहाल करने के लिए ब्रिगेडियर जनरल रेजिनाल्ड एडवर्ड हैरी डायर को विशेष शक्तियां दी गईं, इनमें से एक सार्वजनिक बैठकों या सभाओं को रोकना भी था।
