बीते कुछ दिनों से पेपर लीक का मामला तूल पकड़ रहा है। नीट पेपर लीक के बाद से लगातार किसी न किसी पेपर के लीक होने की खबरें सोशल मीडिया पर आ रही है और फैक्ट चेक करने पर वह फर्जी निकल रही है। इन खबरों के बाद हाल ही में आयोजित हुई यूपीएससी सिविल सर्विस प्रीलिम्स परीक्षा 2026 पेपर लीक होने की खबरें भी तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रही थी। सरकार ने मंगलवार, 16 जून 2026 को इन सभी दावों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें पूरी तरह 'फर्जी' और भ्रामक करार दिया है।
UPSC CSE Prelims 2026 पेपर लीक का दावा पूरी तरह 'फर्जी' (Photo- AI)
पीआईबी फैक्ट चेक ने पेपर लीक दावों की खोली पोल
प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) के फैक्ट चेक विंग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर यूपीएससी सिविल सेवा प्रीलिम्स परीक्षा के पेपर लीक मामले की सचाई एक पोस्ट के जरिए देश के सामने रखी। पीआईबी ने साफ किया कि इंटरनेट पर कई पोस्ट के माध्यम से यह झूठी अफवाह फैलाई जा रही है कि यूपीएससी प्रीलिम्स 2026 का पेपर लीक हुआ था, जो कि पूरी तरह गलत है।
इतना ही नहीं, इसके साथ पीआईबी ने कांग्रेस पार्टी के छात्र संगठन 'नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया' (NSUI) के उस सोशल मीडिया पोस्ट की तस्वीर अपने पोस्ट के साथ साझा की, जिसने इस मुद्दे को उठाया था। पीआईबी ने जनता से अपील की है कि वे बिना पुष्टि वाली और भ्रामक खबरों को आगे शेयर करने से बचें और केवल आधिकारिक स्रोतों से मिली जानकारी पर ही विश्वास करें।
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कोचिंग संस्थान 'अनंतम IAS' ने दी सफाई
बता दें कि इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब सोशल मीडिया पर यह दावा किया गया कि 'अनंतम IAS' नामक कोचिंग संस्थान के पास परीक्षा के पेपर पहले से ही मौजूद थे, क्योंकि उनके कुछ आंसर-की वाले लेखों पर परीक्षा से पहले की तारीख दिखाई दे रही थी। इस गंभीर मामले पर संस्थान ने अपनी वेबसाइट पर एक स्पष्टीकरण नोट जारी करते हुए पूरी सच्चाई बताई है। इस नोट में कहा गया कि परीक्षा समाप्त होने और पेपर सार्वजनिक होने के बाद उनकी फैकल्टी ने जनरल स्टडीज पेपर-I को हल किया और हर उत्तर के पीछे का कॉन्सेप्ट व एलिमिनेशन लॉजिक समझाते हुए दर्जनों विस्तृत लेख लिखे।
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NSUI ने की थी जांच की मांग
इस बीच छात्र संगठन NSUI ने सोमवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की थी। संगठन का कहना था कि अगर किसी एक कोचिंग संस्थान के कंटेंट से 100 में से 82 सवाल मैच खाते हैं, तो यह कोई मामूली इत्तेफाक नहीं हो सकता। हालांकि एनएसयूआई के इस पोस्ट और सोशल मीडिया पर पेपर लीक मामले के दावों पर पीआईबी और संबंधित संस्थान के स्पष्टीकरण के बाद पूरी तरह विराम लग गया है।
