नोएडा में छात्रवृत्ति से जुड़े रिकॉर्ड की जांच के दौरान शिक्षा विभाग के पोर्टल पर दर्ज स्कूलों को लेकर बड़ा अंतर सामने आया है। समीक्षा में पाया गया कि पोर्टल पर सूचीबद्ध 175 स्कूलों में से केवल 60 ही वर्तमान में सक्रिय मिले। बाकी संस्थानों की स्थिति को लेकर विभाग ने सत्यापन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस पूरी कवायद का मकसद छात्रवृत्ति व्यवस्था को ज्यादा पारदर्शी बनाना और यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी सहायता वास्तविक और पात्र विद्यार्थियों तक ही पहुंचे।
नोएडा के स्कॉलरशिप पोर्टल की जांच में बड़ा खुलासा
इस मामले ने छात्रवृत्ति व्यवस्था में इस्तेमाल होने वाले डिजिटल रिकॉर्ड की सटीकता पर भी सवाल खड़े किए हैं। छात्रवृत्ति का लाभ सही विद्यार्थियों तक पहुंचाने के लिए यह जरूरी है कि पोर्टल पर संस्थानों की जानकारी अपडेट और प्रमाणित हो। राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल भी संस्थान स्तर पर आवेदन के सत्यापन की व्यवस्था रखता है, जिसमें संस्थान के नोडल अधिकारी लॉगिन के जरिए रिकॉर्ड की जांच करते हैं।
डुप्लीकेट लॉगिन और रिकॉर्ड से जुड़ी गड़बड़ियां
जांच के दौरान केवल निष्क्रिय स्कूलों की जानकारी ही सामने नहीं आई, बल्कि पोर्टल पर डुप्लीकेट लॉगिन और रिकॉर्ड से जुड़ी गड़बड़ियों की भी पहचान की गई है। ऐसे में अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती पोर्टल पर उपलब्ध डेटा को वास्तविक स्थिति से मिलाने की है, ताकि छात्रवृत्ति प्रक्रिया में गलत संस्थानों या गलत रिकॉर्ड का इस्तेमाल न हो सके।
छात्रों पर क्या पड़ेगा असर?
स्कॉलरशिप के लिए आवेदन करने वाले छात्रों के लिए स्कूल या कॉलेज का सही और सक्रिय रिकॉर्ड होना बेहद जरूरी है। यदि किसी संस्था की जानकारी पोर्टल पर गलत दर्ज है या लॉगिन से जुड़ी समस्या है, तो आवेदन के सत्यापन में परेशानी आ सकती है। ऐसे में विभाग का यह सत्यापन अभियान रिकॉर्ड को दुरुस्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
अधिकारियों ने संबंधित स्कूलों को अपने रिकॉर्ड और पोर्टल पर दर्ज जानकारी की जांच करने के निर्देश दिए हैं। स्कूलों को तीन दिन के भीतर अपनी प्रविष्टियों का सत्यापन करने को कहा गया है। इसके बाद विभाग निष्क्रिय संस्थानों, दोहराए गए लॉगिन और दूसरे संदिग्ध रिकॉर्ड को लेकर आगे की कार्रवाई करेगा।
