मेडिकल की पढ़ाई करने का सपना देख रहे छात्रों के लिए एक राहत भरी खबर आई है। नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने इस साल के सेशन (2026-27) के लिए देश के मेडिकल कॉलेजों की आधिकारिक सीट मैट्रिक्स जारी कर दी है। इस बार देश के 823 सरकारी और प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में कुल 1,36,939 एमबीबीएस सीटों पर एडमिशन दिए जाएंगे। राहत की बात यह है कि इस साल कुल सीटों में 9,911 नई सीटें जोड़ी गई हैं, जबकि पुरानी 1,27,028 सीटों का नवीनीकरण (रिन्यूअल) किया गया है। ध्यान रहे कि इस आंकड़े में एम्स (AIIMS) और जिपमेर (JIPMER) जैसे राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों की सीटें शामिल नहीं हैं, यानी उनके शामिल होने पर कुल सीटों का यह आंकड़ा और भी बड़ा हो जाएगा।
सरकारी और प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों का पूरा समीकरण
इस साल सरकारी कॉलेजों के मुकाबले प्राइवेट कॉलेजों में सीटों की संख्या और नए कॉलेजों की संख्या ज्यादा बढ़ी है:
सरकारी मेडिकल कॉलेज:
कुल कॉलेज: 441
कुल एमबीबीएस सीटें: 63,296 (इनमें 2,111 नई सीटें शामिल हैं)
प्राइवेट मेडिकल कॉलेज:
कुल कॉलेज: 382
कुल एमबीबीएस सीटें: 73,643 (इनमें 7,800 नई सीटें शामिल हैं)
इस साल देश में 25 नए मेडिकल कॉलेज भी खोले गए हैं, जिनसे कुल सीटों में 2,400 सीटों का इजाफा हुआ है। इनमें 7 नए सरकारी कॉलेज (400 सीटें) और 18 नए प्राइवेट कॉलेज (2,000 सीटें) शामिल हैं।
टाइम्स नाउ नवभारत पर ये भी पढ़े: CBSE की थ्री लैंग्वेज पॉलिसी में अंग्रेजी को लेकर क्या है नियम, भारतीय भाषाओं की लिस्ट में इंग्लिश शामिल नहीं
किन राज्यों में खुले नए सरकारी कॉलेज?
इस साल सरकारी क्षेत्र में सीटें बढ़ाने के मामले में छत्तीसगढ़ ने बाजी मारी है। राज्यों के हिसाब से नए सरकारी कॉलेज इस प्रकार हैं:
छत्तीसगढ़: दंतेवाड़ा, जांजगीर-चांपा, जशपुर, कबीरधाम और मनेंद्रगढ़ में 5 नए कॉलेज खुले हैं (हर कॉलेज में 50 सीटें हैं)।
सिक्किम: सिक्किम गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज को मंजूरी मिली है (100 सीटें)।
आंध्र प्रदेश: गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, पिदुगुरल्ला को मंजूरी मिली है (50 सीटें)।
वहीं प्राइवेट सेक्टर के नए कॉलेजों को बिहार, झारखंड, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और कर्नाटक जैसे राज्यों में हरी झंडी मिली है। उत्तर प्रदेश में एफएस यूनिवर्सिटी (फूलन सिंह मेडिकल कॉलेज) और सरदार पटेल इंस्टीट्यूट को नई सीटों की मंजूरी मिली है।
ये भी पढ़ें
इस साल जो 9 हजार से ज्यादा नई सीटें बढ़ी हैं, उनका सीधा असर कट-ऑफ पर पड़ेगा। नियमों के अनुसार, इन सभी नए और पुराने सरकारी कॉलेजों की 15 प्रतिशत सीटें ऑल इंडिया कोटा (AIQ) के तहत भरी जाएंगी, जबकि बची हुई 85 प्रतिशत सीटें संबंधित राज्य के स्टेट कोटा से भरी जाएंगी।
काउंसलिंग के दौरान नए खुले कॉलेजों (विशेषकर नए प्राइवेट कॉलेजों) को अपनी प्रेफरेंस लिस्ट में शामिल करने से पहले वहां के इंफ्रास्ट्रक्चर, ओपीडी (मरीजों की संख्या), लैब की सुविधा और हॉस्टल फीस के बारे में अच्छे से पता कर लें। कई बार नए कॉलेजों में फैकल्टी और पर्याप्त क्लिनिकल एक्सपोजर की कमी होती है, जिसका असर आपकी व्यावहारिक पढ़ाई पर पड़ सकता है।
एनएमसी ने साफ कर दिया है कि किसी भी कॉलेज में तय सीमा से एक भी सीट पर ज्यादा एडमिशन नहीं दिया जाएगा। यदि कोई प्राइवेट कॉलेज अपनी बढ़ाई गई सीटों पर एडमिशन लेना चाहता है, तो उसे 7 दिनों के भीतर ई-बैंक गारंटी जमा करनी होगी। छात्र काउंसलिंग पोर्टल पर विकल्प भरते समय यह जरूर चेक कर लें कि जिस कॉलेज को वे चुन रहे हैं, उसे एनएमसी से फाइनल लेटर ऑफ परमिशन (LoP) मिल चुका हो।
टाइम्स नाउ नवभारत पर ये भी पढ़े: UTET 2026: उत्तराखंड टीईटी के लिए शुरू हुए आवेदन, जानें कब होगा एग्जाम और क्या है आवेदन प्रक्रिया
